कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की कार्यप्रणाली की खुलकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव जी बातों में नहीं बल्कि ठोस काम में भरोसा रखते हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान रेलवे से जुड़ी परियोजनाएं ठप पड़ी हुई थीं, लेकिन वर्तमान डबल इंजन सरकार के आने से राज्य में विकास को गति मिली है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन नीतियों के प्रभाव से पश्चिम बंगाल आने वाले समय में एक विकसित राज्य बनेगा और देश में शीर्ष स्थान हासिल करेगा।
औद्योगिक निवेश और कानून व्यवस्था का आश्वासन
राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने निवेशकों को खुला आमंत्रण दिया है। उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए उन्होंने अपील की कि वे पश्चिम बंगाल में आएं और खुलकर निवेश करें। राज्य सरकार की प्रतिबद्धता जताते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन जमीन से लेकर हर स्तर पर मजबूत और चाक-चौबंद कानून व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। इसके साथ ही उन्होंने निवेशकों से आग्रह किया कि वे राज्य में और अधिक रेलवे से जुड़े उद्योग स्थापित करें ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकें और औद्योगिक ढांचे को मजबूती मिल सके।
गंगा सागर को रेलवे मैप में शामिल करने की अपील
धार्मिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण गंगा सागर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री के सामने एक नया प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि गंगा सागर तक सुगम तरीके से पहुंचने के लिए हमें मजबूत रेलवे कनेक्टिविटी की सख्त आवश्यकता है। वर्तमान में इस क्षेत्र तक पहुंचने के लिए एक नए पुल का निर्माण किया जा रहा है। इसी सिलसिले में उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से औपचारिक अनुरोध किया कि वे गंगा सागर को आधिकारिक रेलवे मानचित्र से जोड़ें क्योंकि यह स्थान सीधे तौर पर करोड़ों श्रद्धालुओं की गहरी धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है।
गंगा सागर का धार्मिक और भौगोलिक महत्व
गंगा सागर पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित एक बेहद प्रसिद्ध और पवित्र हिंदू तीर्थस्थल है। इसी स्थान पर महर्षि कपिल मुनि का प्राचीन आश्रम स्थित है और हर साल मकर संक्रांति के पावन अवसर पर यहां दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगता है। इस विशाल मेले में स्नान करने के लिए लाखों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के बीच एक मशहूर कहावत भी प्रचलित है कि सब तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार। भौगोलिक रूप से यह वह स्थान है जहां गंगा नदी की भागीरथी और हुगली शाखा बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है।
परिवहन की चुनौतियां और रेलवे कनेक्टिविटी के लाभ
वर्तमान समय में गंगा सागर के लिए कोई सीधी ट्रेन सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि इस क्षेत्र को रेलवे नेटवर्क से जोड़ दिया जाए तो लोगों को सीधी ट्रेन सेवा का सीधा लाभ मिलेगा, जिससे तीर्थयात्री और पर्यटक बिना किसी बाधा के आसानी से यहां पहुंच सकेंगे। बेहतर रेल सुविधा होने से मकर संक्रांति मेले का दायरा और अधिक विस्तृत होगा। साथ ही इसकी वैश्विक पहचान मजबूत होगी क्योंकि आवागमन आसान होने पर बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी भी यहां आसानी से आ सकेंगे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेले को बढ़ावा देने की योजना
गंगा सागर मेले को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने, वहां आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और पूरे द्वीप के समग्र विकास के लिए यह एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना है। चूंकि गंगा सागर का मेला सनातन धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है, इसलिए रेल कनेक्टिविटी का यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी उस वक्त भी सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने एक टिप्पणी करते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री की क्या पूंछ होती है या सींग हैं। हाल ही में उनके उस बयान ने भी सियासी हलचल तेज कर दी थी जिसमें उन्होंने कहा था कि जो सनातन धर्म को मानते हैं, वही मूर्ति को हाथ लगाएंगे।























