पश्चिम बंगाल की राजनीति में आगामी सात शहरी निकाय चुनावों को लेकर सरगर्मी काफी बढ़ गई है। साल के आखिरी महीनों में होने वाले इन स्थानीय चुनावों के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस की एक प्रमुख नेता ने अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पार्टी के भीतर चल रही खींचतान के बीच वफादार कार्यकर्ताओं की पहचान करना इस रणनीति का मुख्य हिस्सा बन गया है।
नेतृत्व ने जिला स्तर पर उन सभी जमीनी कार्यकर्ताओं और नेताओं का पूरा विवरण जुटाने का काम शुरू कर दिया है जो ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े हैं। जैसे ही जिलों से ये फेहरिस्त केंद्रीय नेतृत्व को मिल जाएगी, पार्टी आलाकमान राज्य स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक करेगा। इस मंत्रणा के दौरान ही आगामी शहरी निकाय चुनावों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी और चुनाव जीतने की ठोस रणनीति भी तैयार की जाएगी।
इस पूरी कवायद के पीछे चुनाव आयोग के समक्ष अपनी दावेदारी को पुख्ता करना मुख्य वजह है। पार्टी के एक जिम्मेदार पदाधिकारी ने बताया कि वफादारों की यह सत्यापित सूची भारतीय चुनाव आयोग को सौंपी जाएगी ताकि यह कानूनी रूप से साबित किया जा सके कि असली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और ‘फूल और घास’ वाला चुनाव चिह्न किसके पास रहना चाहिए। इसके साथ ही जिला स्तर के कार्यकर्ताओं से शपथ-पत्र हासिल करने का सिलसिला भी जोरों पर चल रहा है।
हालांकि इस प्रक्रिया में सांगठनिक अड़चनों का सामना भी करना पड़ रहा है। अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि राज्य सरकार की मशीनरी और पुलिस स्थानीय स्तर के कार्यकर्ताओं पर यह दबाव बना रही है कि वे बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के गुट के समर्थन में शपथ-पत्रों पर अपने हस्ताक्षर करें। इसके बावजूद ममता खेमे के कार्यकर्ता अपनी निष्ठा पर डटे हुए हैं और प्रशासनिक दबाव के आगे झुकने से इनकार कर रहे हैं।
पूर्व मेदिनीपुर के नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद के रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में हाल ही में संपन्न हुए उपचुनावों की तर्ज पर ही इस बार भी ममता बनर्जी के गुट को नए नाम और नए चुनाव चिह्न के साथ चुनावी मैदान में उतरना होगा। इस खेमे को आधिकारिक रूप से “ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस” नाम और “फुटबॉल खिलाड़ी” वाला चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है, जिसके सहारे वे अपनी राजनीतिक जमीन बचाने उतरेंगे।
दूसरी तरफ, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी खेमा ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम से चुनाव लड़ेगा और उन्हें निर्वाचन आयोग की तरफ से ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न मिला है। कोलकाता नगर निगम और हावड़ा नगर निगम समेत कुल सात शहरी निकायों के लिए मतदान प्रक्रिया नवंबर माह के अंतिम सप्ताह में संपन्न होने की पूरी संभावना है, जबकि इन सभी चुनावों के परिणाम दिसंबर के शुरुआती सप्ताह में सार्वजनिक किए जा सकते हैं।
चुनावी समीकरणों की बात करें तो ममता बनर्जी का गुट कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर इन चुनावों को लड़ना चाहता था ताकि विपक्षी ताकतों को एकजुट रखा जा सके। लेकिन कांग्रेस की प्रदेश इकाई ने इस तरह के किसी भी चुनावी गठबंधन से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। वहीं दूसरी ओर, बागी नेता ऋतब्रत का खेमा भी पूरी तरह से अकेले ही दम पर चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर चुका है, जिससे त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबले के आसार बन गए हैं।


















