अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में एलन मस्क का बड़ा दांव, झोंके 7.6 करोड़ डॉलरमूलांक 2 राशिफल 29 अक्टूबर 2026: दिल की बातों और पैसों के लेन-देन में बरतें सावधानीअमेरिका में मतदान केंद्रों पर ICE की हरकतों पर नजर रखने के लिए उतरे हजारों वॉलंटियर्समूलांक 3 राशिफल 29 अक्टूबर: बैंक और पेमेंट से जुड़े रिकॉर्ड में न बरतें लापरवाहीझारखंड की इस रहस्यमयी नदी की रेत में चमकता है सोना, जानिए क्या है इसके पीछे का पूरा सचलातूर में 28 साल के किसान ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में बयां किया कर्ज का दर्दएमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद अमित शाह का कांग्रेस पर तंज, बोले- बैलट बॉक्स इस्तीफा दोत्रिपुरा में नए नर्सिंग कैंपस का हुआ शुभारंभ, मुख्यमंत्री माणिक साहा ने हेल्थकेयर एजुकेशन को दी नई मजबूतीबिहार विधान परिषद चुनाव में बड़ा उलटफेर, शिक्षक सीटों पर सभी मौजूदा पार्षदों की हार से भाजपा को तगड़ा झटकानागालैंड की मतदाता सूची पर विवाद, 1.57 लाख से अधिक नामों में गड़बड़ी का आरोप
पश्चिम बंगाल में छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता लाने की तैयारी, धर्मांतरण विरोधी कड़े प्रावधानों पर भी जोरपश्चिम बंगाल
5 अक्तू॰ 2026, 6:53 am (24 दिन पहले)· 2

पश्चिम बंगाल में छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता लाने की तैयारी, धर्मांतरण विरोधी कड़े प्रावधानों पर भी जोर

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अगले छह महीने में समान नागरिक संहिता लागू करने का फैसला किया है। इसके साथ ही लव जिहाद, लैंड जिहाद और जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए सख्त कानून लाने की रूपरेखा तय की गई है।

पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता यानी UCC को अमलीजामा पहनाने की दिशा में कदम तेज कर दिए गए हैं। राज्य सरकार अगले छह महीने के भीतर उत्तराखंड और गुजरात के मॉडल को अपनाते हुए इस संहिता को प्रभावी बनाने की तैयारी में है। कोलकाता में विश्व हिंदू परिषद की एक सभा में यह घोषणा करते हुए स्पष्ट किया गया कि उत्तराखंड और गुजरात के बाद पश्चिम बंगाल ऐसा तीसरा राज्य बनने जा रहा है जो इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नागरिक नियमों में एकरूपता लाने के अतिरिक्त राज्य में लव जिहाद, लैंड जिहाद और जबरन धर्मांतरण के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए अलग से कठोर वैधानिक प्रावधान भी लाए जाएंगे।

सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा और असामाजिक तत्वों पर सख्त रुख

सार्वजनिक मंच से बात रखते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रेखांकित किया कि बीजेपी सरकार संवैधानिक दायरे में ही अपने सारे कामकाज करेगी, परंतु भारतीय संस्कृति, परंपराओं तथा मठ-मंदिरों पर होने वाले किसी भी प्रहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राज्य के भीतर किसी भी प्रकार की राष्ट्रविरोधी गतिविधि को पनपने की अनुमति नहीं मिलेगी। नागरिकों से एकता बनाए रखने और समाज को बांटने वाली शक्तियों के प्रति पूरी तरह सतर्क रहने की अपील की गई।

ये भी पढ़ें

विहिप का रुख और मुस्लिम महिलाओं के अधिकार

समान नागरिक संहिता को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने इस प्रशासनिक पहल का खुला समर्थन किया है। संगठन का मानना है कि नागरिक कानूनों के एक समान होने से प्रत्येक नागरिक के मूल अधिकारों की रक्षा होगी। संगठन के अनुसार, इस नए कानूनी ढांचे का सबसे सकारात्मक प्रभाव मुस्लिम महिलाओं के जीवन पर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें व्यक्तिगत कानूनों के भेदभाव से मुक्ति मिलेगी और अधिकार सुरक्षित होंगे।

मसौदा समिति और प्रमुख चुनावी संकल्प

पश्चिम बंगाल में इस कानून का खाका खींचने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। सरकारी अधिसूचना में उल्लेख किया गया है कि इस विधेयक का प्राथमिक लक्ष्य हर धर्म और समुदाय के लोगों के लिए सिविल कानूनों को एकसमान स्तर पर लाना है। इसके दायरे में मुख्य रूप से विवाह, तलाक, संपत्ति उत्तराधिकार और बच्चे को गोद लेने से संबंधित प्रावधान रखे गए हैं। वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने समान नागरिक संहिता को अपने प्रमुख चुनावी वादों की सूची में प्रमुखता से शामिल किया था।

नागरिक जीवन में बदलाव और समान कानून के प्रभाव

समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन से समाज और कानूनी व्यवस्था पर कई दूरगामी असर पड़ने की बात कही गई है

  • धर्म और लिंग के भेदभाव को समाप्त कर प्रत्येक नागरिक को बराबरी का अधिकार मिलेगा और महिलाओं के पैतृक संपत्ति अधिकारों में एकरूपता आएगी।
  • तलाक से जुड़े नियम सभी समुदायों पर एक समान तरीके से लागू होंगे, जिससे पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण प्रथाओं पर पूर्ण विराम लगेगा।
  • एक देश और एक विधान का विचार सशक्त होगा, जिससे विभिन्न समुदायों के मध्य कानूनी असमानताएं और दूरियां घटेंगी।
  • अलग-अलग पर्सनल लॉ की जटिलताएं समाप्त होने से सामाजिक सौहार्द बढ़ेगा और राष्ट्रीय स्तर पर एकीकरण को मजबूती मिलेगी।
  • अदालतों में दीवानी मुकदमों की सुनवाई की प्रक्रिया तेज तथा पारदर्शी बनेगी, जिससे मामलों के निस्तारण में लंबे समय से बना भ्रम समाप्त होगा।

देश के अन्य राज्यों में समान नागरिक संहिता की वर्तमान स्थिति

देश भर में समान नागरिक संहिता को लेकर विभिन्न राज्यों ने अलग-अलग कदम उठाए हैं

  • गोवा में आजादी मिलने से पूर्व से ही एकसमान नागरिक संहिता प्रभावी है।
  • उत्तराखंड में जनवरी 2025 से समान नागरिक संहिता को पूरी तरह लागू किया जा चुका है।
  • गुजरात में समान नागरिक संहिता से संबंधित विधेयक को विधानसभा द्वारा मंजूरी मिल चुकी है।
  • असम में भी यूसीसी से जुड़ा विधेयक विधानसभा पटल से पारित हो चुका है।
  • मध्य प्रदेश की विधानसभा ने भी समान नागरिक संहिता के विधेयक को औपचारिक रूप से पारित कर दिया है।

सवाल-जवाब

पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता कब तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है?
राज्य सरकार ने अगले छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता को लागू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
पश्चिम बंगाल यूसीसी का मसौदा तैयार करने वाली समिति की अध्यक्षता कौन कर रहा है?
इस उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।
यूसीसी के दायरे में कौन-कौन से मुख्य विषय शामिल होंगे?
इसके अंतर्गत सभी समुदायों के लिए विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार और बच्चे को गोद लेने के नियम शामिल होंगे।
समान नागरिक संहिता के अलावा राज्य में किन मामलों पर सख्त कानून लाने की घोषणा की गई है?
राज्य में लव जिहाद, लैंड जिहाद और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ भी सख्त कानून लाने की घोषणा की गई है।
देश में किन राज्यों में पहले से यूसीसी लागू या पारित हो चुका है?
गोवा में यह आजादी से पहले से लागू है, उत्तराखंड में जनवरी 2025 से लागू है, जबकि गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में विधेयक पास हो चुका है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·23 दिन पहले

कानून तो महिलाओं के हक की बात करता है, पर ज़मीनी स्तर पर इसका असर समाज में रिश्तों और तालमेल पर कैसा होगा, यह देखना दिलचस्प रहेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·23 दिन पहले

पश्चिम बंगाल में छह महीने के भीतर यूसीसी लागू करने और धर्मांतरण पर कड़े कानून लाने की बात से सियासी पारा फिर चढ़ेगा। चुनावी वादों को अमलीजामा पहनाने की यह रफ्तार बंगाल की राजनीति में एक नया और बड़ा टकराव ला सकती है।

Ravikash Gupta@ravikash·23 दिन पहले

अरे अर्जुन भाई, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई का नाम देखकर ही समझ आ गया कि मामला अब तेज़ी से आगे बढ़ेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·23 दिन पहले

छह महीने के भीतर यूसीसी लागू करने की बात तो कह दी गई है, लेकिन क्या विपक्ष और अदालतों में इसके खिलाफ आने वाली कानूनी चुनौतियों से निपटने की भी कोई ठोस तैयारी है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·23 दिन पहले

रोhan भाई, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई का नाम देखकर लगता है कि कानूनी पेचीदगियों से निपटने का होमवर्क पूरा ही होगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp