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पश्चिम बंगाल में शिक्षक की दरियादिली से 13 साल बाद छात्र को मिली नजर, शिक्षक दिवस पर छलक आए पिता के आंसूपश्चिम बंगाल
6 सित॰ 2026, 12:03 pm (6 दिन पहले)· 2

पश्चिम बंगाल में शिक्षक की दरियादिली से 13 साल बाद छात्र को मिली नजर, शिक्षक दिवस पर छलक आए पिता के आंसू

पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले में एक स्कूल के प्रधानाध्यापक ने अपनी निजी बचत से आठवीं कक्षा के जन्म से नेत्रहीन छात्र का सफल ऑपरेशन कराया, जिससे 13 साल बाद उसकी आंखों में रोशनी लौट आई है।

शिक्षक दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले के भेदिया उच्च विद्यालय ने मानवता और गुरु-शिष्य की एक अनोखी मिसाल कायम की है। जन्म से ही दोनों आंखों की रोशनी से महरूम रहने वाले आठवीं कक्षा के छात्र रामकृष्ण टुडू की जिंदगी में अब रोशनी लौट आई है। एक जटिल मेडिकल सर्जरी के बाद छात्र की आंख की दुनिया बदल गई है। इस पूरी मानवीय पहल के केंद्र में विद्यालय के शिक्षकों के साथ-साथ प्रभारी प्रधान शिक्षक नवकुमार घोष की अहम भूमिका रही है, जिन्होंने अपने निजी संसाधनों से इस इलाज को संभव बनाया।

जन्म से ही अंधेपन से जूझ रहा था छात्र

आउशग्राम-1 ब्लॉक की उक्ता पंचायत के अंतर्गत आने वाले सुंदरपुर गांव के रहने वाले रामकृष्ण टुडू पैदाइशी रूप से देखने में असमर्थ थे। उनके पिता गोपाल टुडू ने अपने बेटे के अंधेपन को दूर करने और उसकी आंखों की रोशनी वापस लाने के लिए पिछले 13 सालों से कोई कसर नहीं छोड़ी थी। इस लंबी अवधि के दौरान उन्होंने विभिन्न चिकित्सा केंद्रों पर इलाज के चक्कर में अपने जीवन की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपये खर्च कर दिए, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। जब रामकृष्ण ने भेदिया उच्च विद्यालय में दाखिला लिया, तब विद्यालय के शिक्षकों को उसकी इस गंभीर शारीरिक समस्या के बारे में गहराई से जानकारी मिली। इसके बाद पिछले लगभग एक साल से विद्यालय के सभी शिक्षक अपने स्तर पर लगातार यह प्रयास कर रहे थे कि किसी तरह इस छात्र का उचित उपचार करवाया जा सके ताकि वह भी सामान्य बच्चों की तरह दुनिया देख सके।

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लाखों रुपये का खर्च और सफल सर्जरी

विद्यालय के प्रभारी प्रधान शिक्षक नवकुमार घोष ने इस मामले में आगे बढ़कर कमान संभाली और छात्र के इलाज के लिए पुख्ता बंदोबस्त किए। कोलकाता के एक प्रतिष्ठित निजी नर्सिंग होम में रामकृष्ण के इलाज की सारी प्रक्रिया तय की गई। पिछले सोमवार को उसकी आंख का एक बेहद जटिल ऑपरेशन डॉक्टरों द्वारा किया गया। इस पूरी चिकित्सीय प्रक्रिया और सर्जरी में कुल मिलाकर 1 लाख 50 हजार रुपये का भारी खर्च आया। इस संपूर्ण वित्तीय बोझ को प्रभारी प्रधान शिक्षक नवकुमार घोष ने अपनी खुद की बचत की राशि से पूरा किया और छात्र के परिवार पर कोई आर्थिक संकट नहीं आने दिया। इस सफल ऑपरेशन के बाद फिलहाल रामकृष्ण एक आंख से स्पष्ट रूप से देख पा रहा है। लंबे समय तक गहरे अंधकार में रहने के बाद जब उसकी आंखों में रोशनी वापस आई, तो छात्र के साथ-साथ उसका पूरा परिवार और स्कूल के तमाम शिक्षक बेहद आनंदित और संतुष्ट नजर आए।

शिक्षक दिवस पर भावुक हुए छात्र के पिता

बीते शनिवार को भेदिया उच्च विद्यालय में शिक्षक दिवस का विशेष समारोह धूमधाम से आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में रामकृष्ण के पिता गोपाल टुडू को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था और वे वहां मौजूद थे। समारोह के दौरान विद्यालय के प्रभारी प्रधान शिक्षक नवकुमार घोष ने उन्हें मंच पर बुलाकर सम्मानित किया। अपने जिगर के टुकड़े की आंखों की रोशनी लौटाने में शिक्षक द्वारा निभाए गए इस अतुलनीय योगदान को याद करते हुए गोपाल टुडू बेहद भावुक हो गए और उनकी आंखों से खुशी व कृतज्ञता के आंसू छलक पड़े। उन्होंने इस मौके पर शिक्षक के प्रति अपना असीम सम्मान और आभार व्यक्त किया।

गोपाल टुडू ने मीडिया से बातचीत में साझा किया कि लंबे समय तक बेटे की नजर वापस पाने के लिए संघर्ष करने के बाद जब उन्हें कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था, तब स्कूल के शिक्षक उनके संकट के समय में ढाल बनकर खड़े हुए। प्रधान शिक्षक ने अपनी निजी बचत के पैसे खर्च करके उनके बेटे के इलाज की पूरी व्यवस्था की, जिसके लिए वे जिंदगी भर उनके ऋणी और आभारी रहेंगे।

चारों तरफ हो रही इस नेक कार्य की सराहना

प्रधान शिक्षक और विद्यालय के अन्य शिक्षकों द्वारा उठाए गए इस महान मानवीय कदम की खबर जब पूरे इलाके में फैली, तो हर तरफ इसकी जमकर प्रशंसा होने लगी। विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्थानीय निवासियों ने शिक्षकों के इस संवेदनशील प्रयास को समाज के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत बताया है। शिक्षक दिवस के मौके पर सामने आई यह घटना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि एक शिक्षक का दायित्व केवल कक्षाओं में किताबें पढ़ाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि जरूरत पड़ने पर वह अपने छात्र के जीवन में उम्मीद और रोशनी का नया सूरज भी बन सकता है।

सवाल-जवाब

छात्र रामकृष्ण टुडू किस जिले का रहने वाला है?
रामकृष्ण टुडू पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले के आउशग्राम-1 ब्लॉक की उक्ता पंचायत के सुंदरपुर गांव के रहने वाले हैं।
छात्र की आंखों का इलाज किसने कराया?
भेदिया उच्च विद्यालय के प्रभारी प्रधान शिक्षक नवकुमार घोष ने अपनी निजी बचत से छात्र की आंख की सर्जरी का खर्च उठाया।
इलाज में कुल कितना खर्च आया था?
रामकृष्ण टुडू के आंख के जटिल ऑपरेशन और इलाज में कुल 1 लाख 50 हजार रुपये का खर्च आया था।
ऑपरेशन के बाद छात्र की स्थिति कैसी है?
सफल सर्जरी के बाद फिलहाल रामकृष्ण एक आंख से देखने में सक्षम हो गया है।
यह घटना किस अवसर पर सामने आई?
यह प्रेरणादायक घटना शिक्षक दिवस के अवसर पर विद्यालय में आयोजित समारोह के दौरान सामने आई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 1

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

यह घटना न केवल मानवीय संवेदना की मिसाल है, बल्कि इसके कानूनी और प्रशासनिक आयाम भी महत्वपूर्ण हैं। इस मामले से यह रेखांकित होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से आर्थिक तंगी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक वंचित बच्चों के लिए संस्थागत सहयोग कितना आवश्यक है। यदि ऐसे मामलों में सरकारी सहायता या जिला प्रशासन की ओर से चिकित्सा सहायता कोष से वित्तीय मदद मिले, तो कई अन्य बच्चों का जीवन संवर सकता है। भविष्य में इस प्रकार की पहलों को औपचारिक रूप देने के लिए एक स्थायी स्थानीय स्वास्थ्य और शिक्षा सहायता प्रणाली स्थापित किए जाने की आवश्यकता है।

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