चुनाव आयोग द्वारा देशभर में शुरू की गई एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। मतदाता सूची के इस विशेष सत्यापन अभियान पर विपक्षी दलों द्वारा लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि सत्ताधारी दल इसे फर्जी मतदाताओं की पहचान के लिए जरूरी कदम बता रहा है।
एसआईआर पर अमित शाह का बयान
अमित शाह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कांग्रेस एसआईआर को इसलिए रोकने की कोशिश कर रही है क्योंकि घुसपैठिए उसका वोट बैंक हैं, जबकि भाजपा एसआईआर के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस देश में केवल भारत के नागरिक ही मतदान करने के हकदार होंगे।
राहुल गांधी के दावों पर पलटवार
मतदाता सूची संशोधन को लेकर राहुल गांधी के रुख पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा कि मतदाता सूची में 3 करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठिए नहीं हैं। राहुल गांधी के एंटी-एसआईआर रुख को खारिज करते हुए उन्होंने साफ किया कि मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी और सटीक बनाना निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।
विपक्ष की आपत्तियां और भाजपा के आरोप
भाजपा नेता नितिन नवीन सहित कई नेताओं ने भी कांग्रेस के रुख की तीखी आलोचना की है। सत्तापक्ष का आरोप है कि विपक्षी दल अवैध प्रवासियों के दम पर चुनावी लाभ हासिल करने की कोशिश में इस कवायद का विरोध कर रहे हैं। वहीं विपक्षी दलों का तर्क है कि एसआईआर की यह पूरी कवायद वोट चोरी और वास्तविक चुनावी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का जरिया है।
बिहार चुनाव परिणाम और राष्ट्रव्यापी बहस
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद यह विवाद और व्यापक हो गया। अमित शाह ने बिहार में जीत को घुसपैठियों के खिलाफ जनादेश बताते हुए विपक्ष को एसआईआर पर कड़ा संदेश दिया था। निर्वाचन आयोग द्वारा पूरे देश में इस विशेष सत्यापन अभियान को आगे बढ़ाने के निर्णय के बाद से ही पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।


























