आर्य समाज के संस्थापक और महान चिंतक स्वामी दयानंद सरस्वती की पुण्यतिथि पर देश भर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। इस मौके पर अमित शाह ने सोशल मीडिया पर स्वामी दयानंद सरस्वती को स्मरण करते हुए राष्ट्र निर्माण, वैदिक ज्ञान के पुनरुत्थान और सामाजिक सुधारों में उनके अमूल्य योगदान को रेखांकित किया।
अमित शाह ने अपने संदेश में क्या कहा
अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि राष्ट्रवादी चिंतक, महान समाज सुधारक और युगद्रष्टा स्वामी दयानंद सरस्वती की पुण्यतिथि पर वह उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने ‘वेदों की ओर लौटो’ का प्रसिद्ध आह्वान देकर भारतीय जनमानस में धर्म और संस्कृति के प्रति गौरव की भावना भरी, साथ ही राष्ट्र के स्वाभिमान तथा स्वराज्य की चेतना को जागृत किया।
कौन थे महर्षि दयानंद सरस्वती
महर्षि दयानंद सरस्वती (1824-1883) आधुनिक भारत के अग्रणी दार्शनिक, समाज सुधारक और आर्य समाज के संस्थापक थे। उनके बचपन का नाम मूलशंकर था। उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने के लिए वैदिक परंपराओं की शुद्धता पर जोर दिया और प्रसिद्ध ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश की रचना की। उनके दर्शन में कर्म सिद्धांत, पुनर्जन्म और सन्यास को प्रमुख स्तंभ माना गया।
स्वराज्य की अवधारणा और सांस्कृतिक योगदान
स्वामी दयानंद सरस्वती ही वह पहले चिंतक थे जिन्होंने 1876 में सबसे पहले स्वराज्य का विचार प्रस्तुत किया था, जिसे आगे चलकर लोकमान्य तिलक ने जन आंदोलन बनाया। उन्होंने देश में शिक्षा के विस्तार, नारी सशक्तिकरण और सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया। इसके अलावा, प्रथम जनगणना के दौरान स्वामी जी ने आगरा से देश के सभी आर्य समाजों को यह निर्देश दिया था कि सभी सदस्य अपने धर्म के कॉलम में सनातन धर्म दर्ज कराएं।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर लोगों ने अमित शाह के इस संदेश का स्वागत किया और स्वामी दयानंद सरस्वती को वैदिक ज्ञान और भारतीय पुनर्जागरण का अग्रदूत बताते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कई उपयोगकर्ताओं ने उनके द्वारा जगाई गई स्वराज्य चेतना और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ उनके कड़े रुख को आज भी बेहद प्रासंगिक बताया।


























