गोवा क्रांति दिवस पर Arvind Kejriwal का संदेश
Aam Aadmi Party के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने गोवा क्रांति दिवस के मौके पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिये उन महान सेनानियों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने पुर्तगाली उपनिवेशी सत्ता की जड़ें हिलाने में अपना सर्वस्व झोंक दिया था। अपने संदेश में उन्होंने Dr. Ram Manohar Lohia, Dr. Julião Menezes और उन तमाम साहसी गोवावासियों का उल्लेख किया जिनके ऐतिहासिक संकल्प और अदम्य विद्रोह ने उत्पीड़न की जंजीरों को काटने का काम किया और औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध व्यापक संघर्ष को एक नई गति दी।
Kejriwal ने रेखांकित किया कि इन नायकों का साहस और समर्पण आज भी उतना ही प्रासंगिक है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। यह पोस्ट महज एक औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं थी, बल्कि उस लोकतांत्रिक भावना की याद थी जो अन्याय के सामने कभी नहीं झुकती।
18 जून 1946: Margao में विद्रोह की वह ऐतिहासिक चिंगारी
गोवा क्रांति दिवस की जड़ें 18 जून 1946 की उस घटना में हैं जो Margao, गोवा में घटी। उस दौर में पुर्तगाली औपनिवेशिक प्रशासन ने सार्वजनिक सभाओं पर कड़ा प्रतिबंध लगाया हुआ था ताकि किसी भी संगठित विरोध को दबाया जा सके। इसके बावजूद समाजवादी नेता Dr. Ram Manohar Lohia और गोवा के राष्ट्रवादी Dr. Julião Menezes ने उस प्रतिबंध की खुलेआम अवहेलना की और एक व्यापक जन सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की।
Margao में उठी यह विद्रोह की लहर केवल दो नेताओं के साहस का प्रदर्शन नहीं था, यह एक पूरी पीढ़ी की उस आकांक्षा का विस्फोट था जो विदेशी दासता से मुक्ति चाहती थी। इस आंदोलन ने हजारों साधारण गोवावासियों को एकजुट होने की ताकत दी और स्वतंत्रता की लड़ाई को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की। इतिहास में इस घटना को गोवा की मुक्ति यात्रा का एक निर्णायक मोड़ माना जाता है, जो अंततः 1961 में पुर्तगाली शासन के अंत के रूप में फलीभूत हुई।
जनता की प्रतिक्रिया
Kejriwal की इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिला। बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं ने 1946 के स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धाभाव से नमन किया और यह उम्मीद जताई कि गोवा के इस अनूठे ऐतिहासिक संघर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मान्यता व सम्मान मिलना चाहिए।













