केरल कैबिनेट ने राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों और कॉलेज परिसरों में छात्रों के उत्पीड़न को रोकने के लिए एक बेहद सख्त नए एंटी-रैगिंग ड्राफ्ट बिल को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। इस प्रस्तावित कानून में दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है, जिसमें रैगिंग के कारण किसी छात्र की मौत होने की स्थिति में मृत्युदंड तक की सजा शामिल है। यह निर्णायक कदम विश्वविद्यालय के छात्र जे.एस. सिद्धार्थन की दुखद मौत के बाद उठाया गया है। इस दर्दनाक घटना ने पूरे राज्य में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था और परिसर सुरक्षा से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था की कमियों को उजागर किया था।
सिद्धार्थन एक्ट और नया डिस्ट्रेस ऐप
इस नए ड्राफ्ट बिल को 'सिद्धार्थन एक्ट' का नाम दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य उन सभी कानूनी खामियों को दूर करना है जिनका फायदा उठाकर अक्सर आरोपी सजा से बच निकलते थे। इस कड़े कानूनी ढांचे के साथ ही, राज्य सरकार ने छात्रों की सुरक्षा के लिए एक विशेष 'सिद्धार्थन' डिस्ट्रेस मोबाइल ऐप लॉन्च करने को भी हरी झंडी दिखा दी है। इस तकनीक आधारित पहल की घोषणा सबसे पहले केरल के राज्य बजट में की गई थी। इस ऐप की मदद से छात्र किसी भी तरह की रैगिंग, मारपीट या उत्पीड़न की शिकायत सीधे संबंधित अधिकारियों को तुरंत दर्ज करा सकेंगे, जिससे आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी।
शशि थरूर ने की फैसले की तारीफ
कैबिनेट से इस अहम बिल को मंजूरी मिलने के बाद, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस विधायी विकास की सराहना की। अपनी पोस्ट में केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन को टैग करते हुए, थरूर ने इस दिशा में किए गए उनके प्रयासों की तारीफ की। इस मुद्दे पर अपने पुराने रुख को याद करते हुए थरूर ने स्पष्ट रूप से कहा, "रैगिंग एक असामाजिक व्यवहार है जिसे कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।" उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि आखिरकार इस खतरे से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
बढ़ती हिंसक घटनाओं पर रोक लगाने की कोशिश
इस व्यापक कानून की आवश्यकता तब और अधिक महसूस की गई जब केरल हाई कोर्ट ने अपनी एक टिप्पणी में राज्य के मौजूदा एंटी-रैगिंग उपायों को छात्रों की सुरक्षा के लिए अपर्याप्त बताया था। कैबिनेट की इस बैठक से कुछ ही दिन पहले, केरल के एक प्रमुख कॉलेज में प्रथम वर्ष के छात्र के साथ बेरहमी से मारपीट और रैगिंग करने के आरोप में 13 वरिष्ठ छात्रों को निलंबित कर दिया गया था। यह नया कानून केवल प्रशासनिक चेतावनियों तक सीमित न रहकर सीधे तौर पर आपराधिक मुकदमे चलाने की ओर एक बड़ा बदलाव है, जिसका उद्देश्य राज्य में एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल तैयार करना है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर शशि थरूर के बयान को लेकर आम जनता की प्रतिक्रिया मुख्य रूप से सकारात्मक रही। कई नागरिकों ने परिसर की सुरक्षा को लेकर सरकार के इस सख्त रवैये का स्वागत किया। हालांकि कई यूजर्स ने शैक्षणिक संस्थानों में होने वाली बदमाशी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के लिए राजनीतिक नेताओं को बधाई दी, लेकिन कुछ लोगों ने इस पोस्ट के कमेंट सेक्शन का इस्तेमाल शिक्षा फेलोशिप चयन से जुड़ी अपनी अन्य समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए भी किया।



























