दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के ताजा चुनाव परिणामों के बाद देश की मुख्यधारा की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। छात्र राजनीति के नतीजों को व्यापक राष्ट्रीय संदर्भ से जोड़ते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सत्ता पक्ष की युवा नीति और युवाओं के बीच उसकी वास्तविक पकड़ पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शैक्षणिक संस्थानों में नई पीढ़ी के असंतोष का सामना कर रही भारतीय जनता पार्टी को चुनावी नतीजों को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए अनियमितताओं का सहारा लेना पड़ा है।
युवा जनाधार और चुनावी परिणामों पर अखिलेश का हमला
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि नई पीढ़ी यानी जेन ज़ी ने यह साफ कर दिया है कि सत्ताधारी दल के खिलाफ युवाओं में नाराजगी किस कदर बढ़ चुकी है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि इसी भारी विरोध की वजह से दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में जीत हासिल करने के लिए घपला करना पड़ा। अपने वक्तव्य में उन्होंने तंज कसते हुए रेखांकित किया कि जब खुद को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बताने वाला संगठन निर्दलीय प्रत्याशियों के सामने भी पस्त हो जाए, तो इससे साबित होता है कि युवा वर्ग के बीच उसका आधार कितना कमजोर हो चुका है। उनका दावा है कि नैतिक रूप से सत्ता पक्ष छात्रसंघ के सभी महत्वपूर्ण पदों पर शिकस्त खा चुका है।
छात्र असंतोष और देशव्यापी राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि
यह तल्खी ऐसे समय में सामने आई है जब हाल के महीनों में युवा आंदोलनों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग लगातार तेज रही है। राजधानी में जंतर-मंतर पर हुए व्यापक छात्र प्रदर्शनों ने राजनीतिक हलकों में खासी असहजता पैदा की थी, जहां कई प्रमुख नेताओं के परिजन भी विरोध में शामिल दिखाई दिए थे। इसके बाद कई बयानबाजियों ने विवाद को और हवा दी थी, जिसमें अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत द्वारा छात्रों के प्रदर्शन पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें 'गटर जेनरेशन' कहा जाना शामिल था, जिस पर बाद में उन्होंने सफाई दी थी। वहीं दूसरी तरफ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने एक अलग रुख अपनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया था कि युवा पीढ़ी देश विरोधी नहीं है बल्कि वह व्यवस्था से अधिक ईमानदार है। छात्र संगठनों के स्तर पर भी खींचतान दिखी, जहां पंजाब विश्वविद्यालय के प्रधान अंकित बिढान ने प्रदर्शनों में असामाजिक तत्वों के होने का आरोप लगाते हुए नई पीढ़ी को सत्ताधारी दल के साथ बताया था। इसी राजनीतिक खींचतान में बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी युवाओं को आगाह किया था कि वे अपने आंदोलन को किसी अन्य दल द्वारा हाईजैक न होने दें और स्वतंत्र रास्ता चुनें।
जनता की प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव के इस बयान पर आम लोगों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कई समर्थकों ने उनके रुख को सही ठहराते हुए छात्र राजनीति में बदलाव की बात कही, वहीं आलोचकों ने इसे हार के बाद का राजनीतिक बहाना बताते हुए विपक्षी दलों को केवल बयानबाजी के बजाय जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत करने की नसीहत दी।



























