समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर एक पोस्ट के जरिए भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक मामले में पहले SIT के नाम पर सबूतों के साथ खेल किया गया, यह तय कर लिया गया कि किसे बचाना है और किसे फंसाना है, और उसके बाद ही FIR दर्ज की जा रही है।
अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव ने व्यंग्य करते हुए कहा कि भाजपा राज में नाइंसाफी की यह झांकी देखने को मिलेगी, जहां छोटे लोगों पर तो कार्रवाई होगी, लेकिन असली और बड़े जिम्मेदार आराम से बच निकलेंगे। उन्होंने अपनी बात को कविता की पंक्तियों में पिरोते हुए लिखा:
भाजपा राज में नाइंसाफ़ी की दिखेगी ये झांकी, फुनगी को फाँसी, शाखाओं को मिलेगी माफ़ी!
इसमें फुनगी यानी पेड़ की सबसे ऊपरी और कमजोर टहनी से उनका इशारा छोटे लोगों की ओर था, जबकि शाखाओं यानी मोटी डालियों से इशारा बड़े और ताकतवर लोगों की ओर था, जिन्हें माफी मिल जाने का आरोप उन्होंने लगाया।
क्या है अखिलेश का आरोप
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि जनता मान रही है कि SIT के बहाने पहले सारे सबूत साफ कर दिए गए होंगे और यह पक्का कर लिया गया होगा कि किन बड़ी मछलियों को बचाना है और किसे फंसाना है। उनके मुताबिक यह सब तय हो जाने के बाद ही FIR दर्ज की जा रही है। उन्होंने जांच की प्रक्रिया और उसकी मंशा दोनों पर सवाल खड़े किए हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
इस पोस्ट पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई यूजर्स ने अखिलेश यादव के सवालों का समर्थन करते हुए जांच की निष्पक्षता पर शक जताया, तो कई लोगों ने उन पर पलटवार किया और कहा कि जब SIT की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई हो रही है, दर्जनों लोगों पर गाज गिरी है और गड़बड़ी की रकम वसूली जा रही है, तो फिर विरोध क्यों। कुछ लोगों ने सरकार के रवैये को सही ठहराया, जबकि कुछ ने व्यवस्था पर तीखे सवाल भी उठाए।
गया के बारे में
गया भारत के बिहार राज्य में स्थित एक नगर है, जो जिला मुख्यालय होने के साथ ही राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर भी है। यहां की क्षेत्रीय भाषा मगही है और यह हिंदू, बौद्ध तथा जैन तीनों धर्मों के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है, जिसका जिक्र रामायण और महाभारत में भी मिलता है। शहर तीन ओर से रामशिला, प्रेतशिला और ब्रह्मयोनि नाम की छोटी पथरीली पहाड़ियों से घिरा है और इसके पूर्व में फल्गू नदी बहती है। यही वजह है कि यहां हर साल लाखों की संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं।





















