विश्वविख्यात कवि, महान साहित्यकार, दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि के अवसर पर अरविंद केजरीवाल ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। 7 अगस्त को सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए अपने विशेष संदेश में अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रगान के रचयिता को नमन करते हुए देश के प्रति उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि पूरा भारत गुरुदेव द्वारा रचे गए राष्ट्रगान के लिए सदैव उनका आभारी रहेगा और उनका महान साहित्य आने वाले कई युगों तक देशवासियों का मार्गदर्शन करता रहेगा।
अरविंद केजरीवाल का श्रद्धांजलि संदेश
अरविंद केजरीवाल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया खाते के माध्यम से पोस्ट करते हुए लिखा कि महान कवि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उन्होंने अपने संदेश में विशेष रूप से रेखांकित किया कि भारत को 'जन गण मन' जैसा महान और गौरवमयी राष्ट्रगान देने के लिए हम सब सदैव उनके ऋणी रहेंगे। अरविंद केजरीवाल के अनुसार, रवींद्रनाथ टैगोर की कालजयी और असाधारण रचनाएं न केवल भारतीय संस्कृति की प्रतीक हैं, बल्कि वे देश की हर पीढ़ी में देशप्रेम और नैतिक चेतना की अलख जगाती रहेंगी।
कौन थे नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर
गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर भारतीय साहित्य, कला और दर्शन के वह युगद्रष्टा महापुरुष थे जिन्होंने बांग्ला साहित्य और संगीत के माध्यम से संपूर्ण भारतीय सांस्कृतिक चेतना में एक नई ऊर्जा का संचार किया। कोलकाता में जन्मे रवींद्रनाथ टैगोर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध और चित्रकला के क्षेत्रों में अमूल्य योगदान दिया। वर्ष 1913 में उनकी विश्वप्रसिद्ध काव्य कृति 'गीतांजलि' के लिए उन्हें साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह सर्वोच्च वैश्विक सम्मान प्राप्त करने वाले वह पहले एशियाई और गैर-यूरोपीय नागरिक बने थे।
दो देशों के राष्ट्रगान के रचयिता और ऐतिहासिक योगदान
रवींद्रनाथ टैगोर दुनिया के इतिहास में एकमात्र ऐसे महान कवि हैं जिनकी रचनाएं दो स्वतंत्र देशों का राष्ट्रगान बनीं। भारत का राष्ट्रगान 'जन गण मन' और बांग्लादेश का राष्ट्रीय गान 'आमार सोनार बांङ्ला' दोनों गुरुदेव की ही कालजयी रचनाएं हैं। इसके अलावा श्रीलंका के राष्ट्रगान की प्रेरणा भी गुरुदेव के विचारों और संगीत पद्धतियों से ही ली गई थी। उनके द्वारा विकसित की गई संगीत की विशेष शैली को 'रवींद्र संगीत' कहा जाता है, जो आज भी दक्षिण एशियाई सांस्कृतिक विरासत की रीढ़ माना जाता है। उन्होंने शांतिनिकेतन में विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना कर आधुनिक शिक्षा और प्रकृति के समावेश का एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया था।
जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में नाइटहुड का त्याग
रवींद्रनाथ टैगोर केवल एक महान रचनाकार ही नहीं थे, बल्कि वह अदम्य नैतिक साहस रखने वाले सच्चे राष्ट्रभक्त भी थे। वर्ष 1919 में जब ब्रिटिश शासन के दौरान अमृतसर के जलियांवाला बाग में निहत्थे भारतीय नागरिकों का भीषण संहार किया गया, तब गुरुदेव ने इसके विरोध में ब्रिटिश क्राउन द्वारा दी गई 'नाइटहुड' यानी सर की सम्मानित उपाधि को वापस लौटा दिया था। अंग्रेजों के क्रूर और अमानवीय रवैये के खिलाफ उनका यह कड़ा विरोध भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक ऐतिहासिक मोड़ बन गया था।
सोशल मीडिया पर जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया मंच एक्स पर अरविंद केजरीवाल द्वारा साझा किए गए इस श्रद्धांजलि संदेश के बाद आम नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की विविध प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई उपयोगकर्ताओं ने महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर के अनमोल विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। वहीं कुछ अन्य उपयोगकर्ताओं ने समकालीन राजनीतिक परिस्थितियों और सामाजिक मुद्दों को लेकर अपने विचार रखे तथा विभिन्न प्रकार की टिप्पणियां और सवाल भी उठाए।


























