उत्तर प्रदेश में शिक्षक और स्नातक विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। राज्य भर में चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है और प्रमुख दल मतदाताओं को साधने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इसी क्रम में लखनऊ में शिक्षक-स्नातक सम्मेलन का आयोजन किया गया, जहां भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में रणनीति पर चर्चा हुई और विपक्षी दलों की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया गया।
योगी आदित्यनाथ ने साधा विपक्षी दल पर निशाना
सम्मेलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनावी शंखनाद करते हुए समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले राज्य की स्थिति बेहद खराब थी और उपद्रव, दंगे तथा कर्फ्यू आम बात बन चुके थे। उनके मुताबिक उस दौर में प्रदेश को बीमारू बना दिया गया था, लेकिन अब राज्य में सुरक्षा और कानून का माहौल स्थापित हुआ है। उन्होंने मतदाताओं से कहा कि वे इस बार चुनावी प्रक्रिया में बैलेट पेपर के जरिए समाजवादी पार्टी को कड़ा जवाब दें।
चुनावी समीकरण और जमीनी तैयारियां
राज्य में आगामी 23 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा। इस चुनावी दंगल से 7 प्रत्याशियों द्वारा नाम वापस लिए जाने के बाद अब 152 उम्मीदवार मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें खण्ड शिक्षक से 16 और स्नातक क्षेत्र से 23 प्रत्याशी प्रमुख मुकाबले में शामिल हैं। लखीमपुर खीरी में मतदान के लिए 85 बूथ तैयार किए गए हैं, जबकि प्रतापगढ़ के कुंडा से लेकर छतोह तक प्रशासनिक अधिकारी और राजनीतिक संगठन स्तर-स्तर पर समीक्षा कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने भी चुनावी शुचिता और सुरक्षा को लेकर जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपे हैं, जिसमें मतदान से मतगणना तक पुख्ता पहरे की मांग उठाई गई है।
मतदाताओं पर पकड़ बनाने की होड़
लखनऊ स्नातक क्षेत्र में 1.71 लाख मतदाताओं की भागीदारी को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने सांसदों से लेकर बूथ प्रमुखों तक को सक्रिय कर दिया है। इधर शासन स्तर पर भी मतदाताओं की सहूलियत का ध्यान रखा गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के आदेश के अनुसार, 23 अक्टूबर को मतदान के दिन पात्र कर्मचारियों के लिए अवकाश घोषित किया गया है ताकि लोग बिना किसी बाधा के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
लखनऊ के बारे में
लखनऊ भारत के उत्तर प्रदेश राज्य की राजधानी है। प्रशासनिक रूप से यह क्षेत्र लखनऊ जिले के अंतर्गत आता है और प्रदेश की नीति-निर्धारण तथा शासन व्यवस्था का सबसे प्रमुख केंद्र माना जाता है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस पूरे सियासी घटनाक्रम पर जनता की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां कुछ लोगों ने राज्य में सुरक्षा, विकास और शिक्षकों के सम्मान को समर्थन दिया, वहीं कई नागरिकों ने भर्ती प्रक्रियाओं, पारदर्शी कामकाज और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर सवाल भी उठाए।



























