विश्व गैंडा दिवस के खास अवसर पर भारत के अनूठे वन्यजीव वैभव, विशेषकर विशाल एक सींग वाले गैंडे के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया गया है। पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता की सुरक्षा में जुटे अग्रिम पंक्ति के वनकर्मियों और स्थानीय समुदायों के योगदान को इस दिन विशेष रूप से याद किया गया। भारत में वन्यजीव संरक्षण की इस यात्रा में असम की भूमिका केंद्रीय रही है, जहाँ इन दुर्लभ जीवों के आवास को सुरक्षित करने के लिए लगातार ठोस कदम उठाए गए हैं।
संरक्षण के मोर्चे पर असम की ऐतिहासिक उपलब्धि
एक सींग वाले गैंडों की वैश्विक आबादी के लिहाज से असम एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। वर्तमान में दुनिया भर के कुल गैंडों की आबादी का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा अकेले असम में मौजूद है। राज्य के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और आसपास के अभयारण्यों में किए गए वैज्ञानिक प्रबंधन, सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्थानीय भागीदारी के चलते इस प्रजाति के अस्तित्व पर मंडराता संकट काफी हद तक कम हुआ है। काजीरंगा में अवैध शिकार पर प्रभावी रोक लगाने की मुहिम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सराहना मिली है।
नरेंद्र मोदी का संदेश और संरक्षण प्रयासों की सराहना
इस अवसर पर X पर लिखा गया कि विश्व गैंडा दिवस पर शानदार विशाल एक सींग वाले गैंडे की मौजूदगी का उत्सव मनाया जा रहा है और इसकी सुरक्षा में सबसे आगे खड़े सभी लोगों की सराहना की जाती है। साझा किए गए संदेश में इस बात पर जोर दिया गया कि असम में अब विश्व की लगभग 80 प्रतिशत गैंडा आबादी निवास करती है और काजीरंगा द्वारा गैंडों के अवैध शिकार को समाप्त करने के संकल्प को व्यापक रूप से सराहा गया है। यह संदेश वन्यजीवों की सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देखने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
शिकार के खिलाफ शून्य सहनशीलता और मजबूत सुरक्षा ढांचा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस अवसर पर आंकड़ों को साझा करते हुए शिकार के मामलों में आई भारी गिरावट और शून्य शिकार की उपलब्धि पर प्रकाश डाला है। पिछले कई दशकों में गैंडों के सींगों के अवैध अंतरराष्ट्रीय व्यापार के कारण यह प्रजाति भारी खतरे में थी। इस खतरे से निपटने के लिए आधुनिक निगरानी तकनीक, ड्रोन गश्त, सुसज्जित वन सुरक्षा बल और कड़े कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल किया गया। इन समन्वित पहलों के परिणामस्वरूप शिकार की घटनाओं पर लगभग पूरी तरह लगाम कसी जा सकी है, जिससे गैंडों की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस संदेश के सामने आने के बाद आम नागरिकों ने भारत की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के कदमों की जमकर प्रशंसा की। कई लोगों ने काजीरंगा के वनकर्मियों के समर्पण को नमन किया, जबकि कुछ उपयोगकर्ताओं ने पर्यावरण नीतियों और देश के अन्य विकासात्मक मुद्दों को लेकर अपने विचार और सवाल भी रखे।



























