अमित शाह ने दिल्ली प्रवास के दौरान कर्नाटक के उडुपी स्थित प्रसिद्ध पेजावर मठ के प्रमुख संत श्री विश्वप्रसन्न तीर्थ स्वामीजी से आत्मीय भेंट की और उनका मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद लिया। यह पावन मुलाकात स्वामीजी के 39वें चातुर्मास्य व्रत के विशेष अवसर पर आयोजित हुई। इस मुलाकात की जानकारी देते हुए उन्होंने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में चातुर्मास्य के महत्व और संतों के योगदान की खुलकर सराहना की।
चातुर्मास्य व्रत का पावन अनुष्ठान और संतों की साधना
अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि दिल्ली में जारी उडुपी पेजावर मठ के परमपूज्य श्री विश्वप्रसन्न तीर्थ स्वामीजी के 39वें पवित्र चातुर्मास्य व्रत के दौरान उनसे मिलकर आशीर्वाद प्राप्त करना अत्यंत सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में चातुर्मास्य व्रत बेहद पवित्र अनुष्ठान माना जाता है, जिसमें पूज्य संन्यासी निरंतर ध्यान, जप और जनकल्याणकारी साधना में लीन रहते हैं। इस आध्यात्मिक अवधि में संत समाज देश और समाज की शांति, प्रगति एवं नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए गहन तपस्या करता है।
पेजावर मठ की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा
उडुपी का श्री पेजावर मठ द्वैत वेदांत परंपरा के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है, जिसकी समाज सेवा, धर्म जागरण और राष्ट्र निर्माण में सदैव अग्रणी भूमिका रही है। वर्तमान मठाधीश स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ भी अपने गुरुओं की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए निरंतर लोक कल्याण और धार्मिक चेतना के विस्तार में जुटे हुए हैं। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित इस 39वें चातुर्मास्य अनुष्ठान के दौरान अनेक विशिष्ट व्यक्तित्व और श्रद्धालु स्वामीजी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
आध्यात्मिक ऊर्जा और राष्ट्र सेवा का संगम
सार्वजनिक जीवन में कार्यरत नेतृत्व के लिए ऐसे आध्यात्मिक संतों का सान्निध्य नैतिक बल और प्रेरणा का स्रोत माना जाता है। इस बैठक के दौरान सनातन मूल्यों के संवर्धन, भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार और समाज में समरसता बनाए रखने जैसे विषयों पर संतों की भूमिका रेखांकित की गई। संन्यासियों द्वारा किए जाने वाले इस प्रकार के व्रत न केवल व्यक्तिगत साधना का मार्ग प्रशस्त करते हैं, बल्कि पूरे समाज को सदाचार और सेवा का संदेश भी देते हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
इस मुलाकात के सार्वजनिक होते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने व्यापक प्रतिक्रिया व्यक्त की। कई नागरिकों ने इस भेंट को भारतीय सनातन संस्कृति के प्रति गहरा आदर बताते हुए संतों के आशीर्वाद की सराहना की, जबकि कुछ प्रयोक्ताओं ने स्थानीय प्रशासनिक समस्याओं, जमीन पुनर्वास और आम जनहित से जुड़ी मांगों को उठाते हुए नेतृत्व से शीघ्र समाधान की गुहार लगाई।

























