ओडिशा के बलांगीर जिले में एक अजीबोगरीब ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें एक कारोबारी को बंदूक की नोक पर अगवा कर हनुमान जी की तस्वीर वाले एक पुराने सिक्के के नाम पर करोड़ों रुपये ऐंठने की कोशिश की गई। पुलिस ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश करते हुए एक महिला सब-इंस्पेक्टर और एक पत्रकार समेत मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है।
कैसे चलता है हनुमान सिक्का रैकेट?
पश्चिमी ओडिशा में लंबे समय से एक खास तरह का ठगी गिरोह सक्रिय है, जो तांबे या पीतल से बने पुराने सिक्कों को लेकर अंधविश्वास फैलाता है। इन सिक्कों पर हनुमान जी की आकृति उकेरी होती है और गिरोह के सदस्य लोगों को यकीन दिलाते हैं कि इनमें अलौकिक शक्ति है और विदेशी बाजार में इनकी कीमत करोड़ों रुपये तक जा सकती है। इसी लालच और अंधविश्वास का सहारा लेकर आम लोगों से मोटी रकम वसूली जाती है।
रंदा चौक से अगवा हुए कारोबारी
इसी रैकेट की चपेट में इस बार बलांगीर के 62 वर्षीय कारोबारी नरेंद्र साहू आए, जिन्हें लोग गुंडा साहू के नाम से भी जानते हैं। 14 अगस्त को मुख्य आरोपी 50 वर्षीय क्षितिश चंद्र साहू और उसके साथियों ने नरेंद्र को रंदा चौक पर बुलाया। वहां पिस्टल दिखाकर उन्हें जबरन गाड़ी में बिठाया गया और सीधे भुवनेश्वर ले जाया गया, जहां एक होटल के कमरे में उन्हें बंधक बनाकर रखा गया। हालांकि पुलिस ने फुर्ती दिखाते हुए अगले ही दिन नरेंद्र को भुवनेश्वर से सकुशल छुड़ा लिया।
2.7 करोड़ के पुराने लेन-देन का दावा, पर सबूत नदारद
उत्तरी रेंज के आईजी हिमांशु कुमार लाल के मुताबिक आरोपी क्षितिश यह दावा करता रहा कि उसने 2020 में एक दुर्लभ सिक्के के बदले नरेंद्र को 2.7 करोड़ रुपये दिए थे, लेकिन बदले में उसे न तो सिक्का मिला और न ही पैसे वापस आए। जांच में पुलिस को इस कथित लेन-देन से जुड़ा कोई ठोस वित्तीय दस्तावेज या सबूत नहीं मिल पाया।
पिस्टल हाथ में थमाकर बनवाया फर्जी वीडियो
बलांगीर के एसपी अभिलाष जी. ने बताया कि बंधक बनाए जाने के दौरान नरेंद्र को हथियार दिखाकर बुरी तरह डराया गया और घरवालों को फोन कर झूठा भरोसा दिलाने को मजबूर किया गया कि वे सुरक्षित हैं। जांच के दौरान क्षितिश के मोबाइल फोन से पुलिस को 12 डरावने वीडियो मिले, जिनमें बिना कारतूस की पिस्टल नरेंद्र के हाथ में थमाकर ऐसा दृश्य रचा गया मानो उन्होंने ही क्षितिश पर हमला बोला हो। इसका मकसद नरेंद्र से माफी मंगवाना और रकम लौटवाना था, ताकि झूठे सबूत खड़े किए जा सकें।
सब-इंस्पेक्टर बहन और पत्रकार भी साजिश में शामिल
इस पूरी साजिश में क्षितिश अकेला नहीं था। उसने अपनी सगी बहन को भी इसमें घसीटा, जो भुवनेश्वर के खंडगिरी थाने में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। इसके अलावा स्थानीय पत्रकार संजय जेना भी इस षड्यंत्र का हिस्सा बना। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर सामने आया कि जेना ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर नरेंद्र को खंडगिरी थाने के अंदर तक पहुंचाया और वहां उनके खिलाफ मारपीट की झूठी शिकायत भी दर्ज करवा दी। दूसरी ओर, सब-इंस्पेक्टर स्नेहमंजरी साहू पर आरोप है कि उन्होंने अपने ओहदे का दुरुपयोग करते हुए नरेंद्र को फर्जी मामले में फंसाने की धमकी दी।
50 लाख से 10 करोड़ तक वसूली की थी योजना
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने नरेंद्र से 50 लाख रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक ऐंठने का पूरा खाका खींचा था। फिलहाल पुलिस ने बीएनएस (BNS) और आर्म्स एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और जांच में तेजी ला दी है। डिजिटल फॉरेंसिक टीम ने आरोपियों के बीच लगातार हो रही बातचीत के सबूत भी जुटा लिए हैं, जिससे साजिश की परतें और साफ होती जा रही हैं।



















