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100 करोड़ के भ्रष्टाचार मामले में घिरे असम के खनन निदेशक परागमणि महंता, ईडी ने भेजा समनअसम
20 अग॰ 2026, 6:45 pm (2 घंटे पहले)· 2

100 करोड़ के भ्रष्टाचार मामले में घिरे असम के खनन निदेशक परागमणि महंता, ईडी ने भेजा समन

प्रवर्तन निदेशालय ने करीब 100 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में असम के भूविज्ञान एवं खनन विभाग के निदेशक परागमणि महंता को पूछताछ के लिए समन जारी किया है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करीब 100 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में असम सिविल सेवा (एसीएस) अधिकारी परागमणि महंता को पूछताछ के लिए समन भेजा है। परागमणि महंता वर्तमान में असम के भूविज्ञान और खनन विभाग के निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी विभिन्न सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में उनकी तैनाती के दौरान हुए वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक फैसलों की गहनता से जांच कर रही है।

असम खनिज विकास निगम में गड़बड़ियों के आरोप

जांच का एक बड़ा हिस्सा असम खनिज विकास निगम (एएमडीसी) में परागमणि महंता के कार्यकाल से जुड़ा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, उन पर निगम से हर महीने लगभग 50,000 रुपये का अनधिकृत भुगतान प्राप्त करने का आरोप है। इसके अलावा, उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों के कारण निगम को करीब 5.60 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। एजेंसी इस दौरान भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन की भी पड़ताल कर रही है।

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कर्मचारी कल्याण कोष में हेरफेर और अन्य शिकायतें

प्रवर्तन निदेशालय सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए तय किए गए फंड के दुरुपयोग से जुड़े गंभीर आरोपों की भी जांच कर रहा है। मामले में सामने आई शिकायतों के मुताबिक, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के कल्याण कोष से लगभग 2 लाख रुपये की कीमत का लैपटॉप खरीदा गया था, जिसे बाद में महंता के बच्चे को दे दिया गया। इसके साथ ही, एक सफाई कर्मचारी के नाम पर हर महीने लगभग 15,000 रुपये की राशि के फर्जी ट्रांसफर या डायवर्जन से जुड़े मामले की भी समीक्षा की जा रही है।

विभिन्न विभागों में कार्यकाल और जारी जांच

वित्तीय गड़बड़ियों की इस जांच का दायरा केवल खनन निगम तक ही सीमित नहीं है। एजेंसी असम रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड टेक्नोलॉजी (आर्टफेड) और हथकरघा एवं वस्त्र विभाग के निदेशक के रूप में उनके कार्यकाल की भी जांच कर रही है, जहां इसी तरह के वित्तीय आरोपों की शिकायतें मिली हैं। पूछताछ के दौरान ईडी उनके विभिन्न पदों पर रहते हुए किए गए सभी वित्तीय सौदों का जवाब मांगेगी। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि महंता पर लगे आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं और मामले की विस्तृत जांच जारी है।

सवाल-जवाब

ईडी ने असम के एसीएस अधिकारी परागमणि महंता को क्यों समन भेजा है?
प्रवर्तन निदेशालय ने परागमणि महंता को लगभग 100 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में पूछताछ के लिए समन भेजा है।
परागमणि महंता वर्तमान में किस पद पर तैनात हैं?
वह वर्तमान में असम सरकार के भूविज्ञान और खनन विभाग में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
असम खनिज विकास निगम (एएमडीसी) से जुड़े मुख्य आरोप क्या हैं?
उन पर एएमडीसी से 50,000 रुपये का मासिक अनधिकृत भुगतान लेने, निगम को 5.60 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने और भर्ती में अनियमितता बरतने के आरोप हैं।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों के फंड के दुरुपयोग का क्या मामला है?
आरोप है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के फंड से लगभग 2 लाख रुपये का लैपटॉप खरीदकर महंता के बच्चे को दिया गया और सफाई कर्मचारी के नाम पर मासिक 15,000 रुपये का डायवर्जन किया गया।
क्या अधिकारी पर लगे आरोप साबित हो चुके हैं?
नहीं, केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोप अभी तक साबित नहीं हुए हैं और मामले की जांच फिलहाल जारी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·40 मिनट पहले

यह मामला प्रशासनिक भ्रष्टाचार और वित्तीय कुप्रबंधन का एक गंभीर उदाहरण है, जहाँ एएमडीसी से लेकर हथकरघा विभाग तक कई मोर्चों पर गड़बड़ियों के तार जुड़े हैं। ईडी की इस व्यापक जाँच से यह स्पष्ट होता है कि केंद्रीय एजेंसियाँ अब केवल बड़े वित्तीय घोटालों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि छोटे स्तर के फंड के दुरुपयोग और प्रशासनिक फैसलों में भाई-भतीजावाद पर भी पैनी नज़र रख रही हैं। आने वाले दिनों में पूछताछ के बाद अन्य विभागों में भी शिकंजा कस सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·40 मिनट पहले

यह मामला केवल एक नौकरशाह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के प्रशासनिक ढांचे में आंतरिक सतर्कता और लेखा परीक्षा प्रणालियों की विफलता को भी उजागर करता है। जब तक विभिन्न विभागों में तैनात अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए एक मजबूत निवारक तंत्र नहीं बनता, तब तक केंद्रीय जाँच एजेंसियों के ये समन केवल एक तात्कालिक सुधारात्मक कदम बने रहेंगे, जो दीर्घकालिक संस्थागत सुधार की गारंटी नहीं दे सकते।

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