राजस्थान के खैरथल-तिजारा में साइबर ठगी की जांच के दौरान बड़ा हादसा, पुलिस की मौजूदगी में युवक ने लगाया फंदाउत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026: भाजपा ने बनाई बढ़त, सपा ने दी कड़ी टक्कर; सीएम योगी आदित्यनाथ ने दी बधाईपारे की सतह पर सोना बनाने का दावा, राजस्थान के वैज्ञानिक लाल बहादुर के प्रयोग की शुरू हुई वैज्ञानिक जांचफरीदाबाद में फर्जी जॉब ऑफर के ज़रिए 89750 रुपये की साइबर ठगी, गाजियाबाद के 3 आरोपी गिरफ्तारराजस्थान के डीग में पंचायत चुनाव के दौरान भड़की हिंसा, सरपंच प्रत्याशियों के गुटों में पथराव से कई घायलयूडीपी से पाला बदलकर एनपीपी में शामिल हुए दो विधायक, मेघालय में बदला राजनीतिक गणित500 करोड़ के ऑडियो क्लिप मामले पर बोले मनोज जरांगे, जांच न होने पर 29 तारीख को दी सीधे टकराव की चेतावनीइलाहाबाद हाई कोर्ट दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम पर आदेश सुरक्षित करने के बाद निर्णय देगा29 अक्टूबर को चंद्रमा का मिथुन राशि में प्रवेश, इन 7 राशियों के खुलेंगे उन्नति के द्वारमैनपुरी विधानसभा सीट का तीन दशक का इतिहास और 2027 के भावी सियासी समीकरण
इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा एनएसए निरस्त करने के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाएगी उत्तर प्रदेश सरकारभारत
9 सित॰ 2026, 4:01 pm (49 दिन पहले)· 2

इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा एनएसए निरस्त करने के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाएगी उत्तर प्रदेश सरकार

उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है जिसमें नोएडा डीएम मेधा रूपम द्वारा छात्र पर लगाए गए NSA को रद्द कर 5 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया गया था।

उत्तर प्रदेश सरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही है, जिसमें नोएडा की जिला मजिस्ट्रेट (DM) मेधा रूपम द्वारा एक छात्र पर लगाए गए एनएसए (NSA) के तहत हिरासत आदेश को रद्द कर दिया गया था। भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के इस कदम की जानकारी दी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में प्रशासनिक कार्रवाई को अनुचित बताते हुए पीड़ित छात्र को आर्थिक राहत प्रदान करने और दोषी अधिकारी के वेतन से मुआवजा वसूलने का आदेश जारी किया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला और मुआवजे का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा क्षेत्र में मजदूरों के आंदोलन से जुड़े एक छात्र को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिए जाने के जिला प्रशासन के आदेश को निरस्त कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए टिप्पणी की थी कि जिला मजिस्ट्रेट ने बिना पर्याप्त विवेक का इस्तेमाल किए और बिना सोचे-समझे यह हिरासत का आदेश पारित कर दिया था। उच्च न्यायालय ने छात्र के अधिकारों के हनन पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य प्रशासन को निर्देश दिया था कि पीड़ित छात्र को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि मुआवजे की यह रकम किसी सरकारी कोष से देने के बजाय नोएडा की डीएम मेधा रूपम के मासिक वेतन से काटी जानी चाहिए।

ये भी पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आई चर्चा

यह पूरा मामला बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में उस समय चर्चा में आया जब प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ एक अन्य याचिका पर सुनवाई कर रही थी। वह मामला ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को CJP द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के संबंध में भेजे गए कारण बताओ नोटिस से जुड़ा हुआ था। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नोटिस जारी किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही छात्र प्रदर्शनों में शामिल होने वाले युवाओं के खिलाफ दंडात्मक या दमनकारी कार्रवाई पर स्पष्ट रोक लगा चुका है, तो फिर स्थानीय प्रशासन की ओर से इस तरह का नोटिस जारी करने का क्या औचित्य था।

नोटिस पर प्रशासनिक सफाई और राज्य सरकार का रुख

चीफ जस्टिस की टिप्पणियों के बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के सामने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि मीडिया और अन्य माध्यमों में इस नोटिस को लेकर नोएडा की डीएम से सवाल पूछे जा रहे हैं और भ्रम की स्थिति बनी हुई है। सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि संबंधित कारण बताओ नोटिस नोएडा की जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी नहीं किया गया था, बल्कि यह कार्रवाई ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट के स्तर पर की गई थी। इसी संवाद के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस चर्चित फैसले का संदर्भ दिया जिसमें नोएडा डीएम के एनएसए आदेश को रद्द कर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को अवगत कराया कि उत्तर प्रदेश सरकार हाईकोर्ट के इस आदेश से सहमत नहीं है और इसे चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेगी।

सवाल-जवाब

यूपी सरकार किस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा रही है?
यूपी सरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी जिसमें नोएडा डीएम के एनएसए आदेश को रद्द कर छात्र को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।
नोएडा डीएम मेधा रूपम पर कोर्ट ने क्या निर्देश दिया था?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि एनएसए रद्द होने पर पीड़ित छात्र को दिए जाने वाले 5 लाख रुपये के मुआवजे की राशि नोएडा डीएम मेधा रूपम के वेतन से वसूली जाए।
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला किस दौरान उठा?
सुप्रीम कोर्ट में ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को सीजेपी प्रदर्शन में भाग लेने पर जारी कारण बताओ नोटिस पर सुनवाई के दौरान यह मुद्दा सामने आया।
कारण बताओ नोटिस किसने जारी किया था?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को स्पष्ट किया कि कारण बताओ नोटिस नोएडा डीएम ने नहीं, बल्कि ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने जारी किया था।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने क्या सवाल पूछा?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सवाल उठाया कि जब अदालत छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होने पर सख्त कार्रवाई पर रोक लगा चुकी है, तो फिर प्रशासन ने कारण बताओ नोटिस कैसे जारी किया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp