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ओडिशा में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से कटेगा गुजारा भत्ता, अदालत के आदेश पर मोहन चरण माझी का सख्त फैसलाओडिशा
30 अग॰ 2026, 3:45 pm (2 घंटे पहले)· 1

ओडिशा में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से कटेगा गुजारा भत्ता, अदालत के आदेश पर मोहन चरण माझी का सख्त फैसला

ओडिशा सरकार ने अदालती आदेश के बावजूद पत्नी और बच्चों को गुजारा भत्ता न देने वाले सरकारी कर्मचारियों पर शिकंजा कस दिया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नए निर्देश के तहत अब सीधे वेतन से पैसे काटकर आश्रितों के खातों में भेजे जाएंगे।

ओडिशा सरकार ने उन सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ बहुत सख्त कदम उठाने का फैसला किया है जो अदालत के आदेश के बाद भी अपनी पत्नी या बच्चों को गुजारा भत्ता नहीं देते हैं। अब ऐसे लापरवाह कर्मचारियों के वेतन से सीधे पैसे काटे जाएंगे और उन्हें सीधे उनकी पत्नी तथा बच्चों के बैंक खातों में भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से रविवार को जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस पूरे मामले पर बहुत कड़ा रुख अपनाया है और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

शिकायतों के बाद सरकार का बड़ा एक्शन

राज्य स्तरीय शिकायत सुनवाई के कार्यक्रमों के दौरान हर बार लगातार दो से तीन ऐसी शिकायतें सामने आ रही थीं, जिनमें महिलाएं और उनके बच्चे इस बात से परेशान थे कि उनके परिवार के सरकारी कर्मचारी पति या पिता उन्हें नियमानुसार गुजारा भत्ता या एलिमनी नहीं दे रहे हैं। सरकार के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कई पुरुष कर्मचारियों ने अदालतों के एकदम स्पष्ट आदेश होने के बावजूद अपनी पत्नी या बच्चों को भरण-पोषण की तय राशि का भुगतान नहीं किया था। तलाक से जुड़े मामलों में भी एलिमनी न चुकाने की इसी प्रकार की लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिन्हें प्रशासन ने गंभीरता से लिया।

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सीधे सैलरी से कटौती का निर्देश

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कड़ा निर्देश दिया है कि अदालत द्वारा तय की गई राशि को अब सीधे संबंधित कर्मचारी के वेतन से काटा जाए और उसे सीधे तौर पर पत्नी या बच्चों के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाए। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि राज्य का एक सरकारी कर्मचारी होते हुए अदालत के आदेश की अवहेलना करना और अपनी ही पत्नी व बच्चों के साथ ऐसा अन्याय करना राज्य सरकार के लिए किसी भी स्थिति में पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

डीडीओ को सौंपी गई कटौती की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री की ओर से जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के तहत अब विभागीय ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर को इस कटौती की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जैसे ही भरण-पोषण के भुगतान से जुड़ा कोई भी अदालत का आदेश प्राप्त होगा, डीडीओ संबंधित कर्मचारी का मासिक वेतन बिल तैयार करते समय ही अदालत द्वारा निर्धारित राशि उसमें से काट लेगा और उसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पत्नी तथा बच्चों के बैंक खातों में जमा करवा देगा।

एचआरएमएस पोर्टल से जोड़ा जाएगा पूरा सिस्टम

इस पूरी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह निर्देश भी दिए हैं कि वे अदालत द्वारा निर्देशित भरण-पोषण से जुड़े सभी मामलों को ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ दें। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और ऑटोमेटेड बनाना है ताकि न्यायिक आदेशों का पालन हर हाल में समय पर सुनिश्चित किया जा सके और किसी भी स्तर पर हीला-हवाली न हो।

सवाल-जवाब

ओडिशा सरकार के नए आदेश का उद्देश्य क्या है?
इस आदेश का उद्देश्य अदालत के आदेश के बावजूद पत्नी और बच्चों को गुजारा भत्ता न देने वाले सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से सीधे पैसे काटकर उनके खातों में भेजना है।
यह आदेश किसने जारी किया है?
मुख्यमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, यह सख्त निर्देश ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा दिए गए हैं।
वेतन से पैसे काटने की जिम्मेदारी किसकी होगी?
विभागीय ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ) को संबंधित कर्मचारी के वेतन से अदालत द्वारा तय राशि काटने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कटी हुई राशि सीधे किस तक पहुंचाई जाएगी?
वेतन से काटी गई भरण-पोषण की राशि को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पत्नी और बच्चों के बैंक खातों में जमा किया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया को किस प्रणाली से जोड़ा जाएगा?
अधिकारियों को अदालत द्वारा निर्देशित भरण-पोषण के मामलों को ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ने का निर्देश दिया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली के दृष्टिकोण से यह प्रशासनिक कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है। अक्सर अदालती आदेशों के बावजूद भरण-पोषण के मामलों में कागजी कार्रवाई और टालमटोल की शिकायतें मिलती थीं। एचआरएमएस पोर्टल के जरिए इस प्रक्रिया को ऑटोमेटेड करने से प्रशासनिक जवाबदेही तय होगी और आश्रितों को न्याय मिलने में देरी नहीं होगी। भविष्य में यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक कड़ा कानूनी दृष्टांत बन सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

यह प्रशासनिक निर्णय वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक डिजिटल सुधार का एक बेहतरीन उदाहरण है। जब वेतन वितरण प्रणाली यानी एचआरएमएस पोर्टल को सीधे न्यायिक आदेशों और बैंक खातों से जोड़ दिया जाता है, तो इससे मानवीय हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो जाती है। डिजिटल गवर्नेंस का यह मॉडल इस बात को साबित करता है कि तकनीक का उपयोग करके कैसे अदालती आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सकता है और राज्य स्तर पर वित्तीय देनदारियों में पारदर्शिता लाई जा सकती है।

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