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जी5 से दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज अचानक हटाए जाने पर छिड़ा विवाद, देश भर में स्वतंत्र स्क्रीनिंग कराएगी दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटीOTT
8 जुल॰ 2026, 5:12 pm (45 दिन पहले)· 3

जी5 से दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज अचानक हटाए जाने पर छिड़ा विवाद, देश भर में स्वतंत्र स्क्रीनिंग कराएगी दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी

दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को रिलीज के दो दिन बाद ही ओटीटी से हटाए जाने पर सिख समुदाय में भारी आक्रोश है, जिसके बाद दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने इसे खुद जन-जन तक पहुंचाने का फैसला किया है।

मशहूर अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की मुख्य भूमिका वाली राजनीतिक ड्रामा फिल्म 'सतलुज' को लेकर देश में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस बहुप्रतीक्षित फिल्म को मशहूर ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर काफी शांति से रिलीज किया गया था, लेकिन रिलीज होने के महज दो दिनों के भीतर ही इसे अचानक प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इस आकस्मिक कदम के बाद सिख समुदाय में गहरा रोष फैल गया है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने इस फैसले पर अपनी बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है और इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा की है। कमेटी ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से अनुचित बताते हुए इसे मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के ऐतिहासिक संघर्षों और उनकी सच्चाई को दबाने का एक गंभीर प्रयास करार दिया है। सिख समुदाय में बढ़ते गुस्से को देखते हुए अब कमेटी ने इस फिल्म को खुद आम लोगों तक पहुंचाने का एक बड़ा बीड़ा उठाया है, जिसके तहत देश भर में इसकी स्वतंत्र और सार्वजनिक स्क्रीनिंग की जाएगी।

सिख कमेटी का कड़ा रुख और राष्ट्रव्यापी योजनाएं

यह पूरी फिल्म पंजाब में 1980 और 1990 के दशक में हुए उग्रवाद के दौर और उस दौरान चले पुलिस ऑपरेशनों के बीच मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघनों को उजागर करने वाले जसवंत सिंह खालरा के असल जीवन पर आधारित है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटाए जाने की कड़ी आलोचना की है। हरमीत सिंह कालका ने कहा कि जसवंत सिंह खालरा एक ऐसे समर्पित और निडर सामाजिक कार्यकर्ता थे जिन्होंने दुनिया को बेहद कड़वी सच्चाई से रूबरू कराया था। उन्होंने पंजाब के उस अशांत दौर में पुलिस द्वारा लगभग 25000 अज्ञात शवों के अवैध रूप से और बिना किसी रिकॉर्ड के दाह संस्कार किए जाने के पुख्ता दस्तावेजी सबूत जुटाए थे। इस बेहद संवेदनशील और गंभीर मुद्दे को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रमुखता से उठाया था। कालका के अनुसार, ऐसी ऐतिहासिक और सच बयां करने वाली कहानी को जनता के बीच जाने से रोकना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।

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सिख समुदाय की गहरी धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने एक बड़ा कदम उठाया है। कमेटी ने अपने अधीन आने वाले सभी गुरुद्वारा सदस्यों और प्रबंधकों को विशेष निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सदस्यों से कहा गया है कि वे इस फिल्म को डाउनलोड करें और अपने-अपने स्थानीय क्षेत्रों में आम लोगों को दिखाने के लिए विशेष स्क्रीनिंग का आयोजन करें। इसके साथ ही, युवा पीढ़ी और छात्रों को इस इतिहास के प्रति जागरूक करने के लिए कमेटी के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों और कॉलेजों में जसवंत सिंह खालरा के जीवन, उनके संघर्ष और मानवाधिकारों के क्षेत्र में उनके योगदान पर विशेष सेमिनार और चर्चाएं आयोजित की जाएंगी।

क्या है फिल्म 'सतलुज' की वास्तविक कहानी?

हनी त्रेहान के कुशल निर्देशन में बनी इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने मुख्य किरदार निभाया है, जिसमें उन्होंने जसवंत सिंह खालरा की भूमिका को परदे पर जीवंत किया है। फिल्म की मुख्य कहानी एक बेहद साधारण बैंक क्लर्क से मानवाधिकार कार्यकर्ता बने जसवंत सिंह खालरा के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे उन्होंने अमृतसर में एक बैंक कर्मचारी के रूप में काम करते हुए अचानक गायब हो रहे युवाओं के सच का पता लगाने की कोशिश की थी। इसके बाद उन्होंने पंजाब के उस उथल-पुथल भरे दौर में सुरक्षा बलों द्वारा किए गए कथित फर्जी एनकाउंटर और गुपचुप तरीके से शवों को ठिकाने लगाने के काले सच को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब किया था।

इस ऐतिहासिक सच को उजागर करने की जसवंत सिंह खालरा को भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। साल 1995 में वे रहस्यमयी परिस्थितियों में अचानक लापता हो गए थे। उनके लापता होने के करीब एक दशक बाद भारतीय अदालत ने पंजाब पुलिस के चार अधिकारियों को उनके अपहरण, अमानवीय उत्पीड़न और हत्या का दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी। हालांकि, जसवंत सिंह खालरा का पार्थिव शरीर कभी भी बरामद नहीं किया जा सका, जिससे यह मामला सिख इतिहास के सबसे संवेदनशील पन्नों में दर्ज हो गया।

सेंसरशिप का लंबा संघर्ष और अचानक फिल्म हटाने का कारण

इस फिल्म के निर्माण से लेकर इसके प्रदर्शन तक का पूरा सफर हमेशा से विवादों और कानूनी अड़चनों से घिरा रहा है। यह फिल्म मूल रूप से 'पंजाब 95' के नाम से बनाई गई थी। फिल्म को सेंसर बोर्ड से हरी झंडी दिलाने के लिए निर्माताओं को लगभग चार साल तक लंबी और थका देने वाली कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी थी। सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को पास करने के लिए लगभग 120 कट्स लगाने की कड़ी मांग रखी थी, जिसका निर्माताओं ने लगातार विरोध किया था। आखिरकार, बिना किसी बड़े प्रमोशन, बिना किसी आधिकारिक ट्रेलर रिलीज या पूर्व सूचना के, पिछले शुक्रवार को इस फिल्म को बिना किसी कट के नए नाम 'सतलुज' के साथ अचानक जी5 पर स्ट्रीम कर दिया गया था।

लेकिन यह स्ट्रीमिंग अधिक समय तक नहीं चल सकी और महज दो दिन बाद रविवार को इसे प्लेटफॉर्म से अचानक हटा लिया गया। स्ट्रीमिंग कंपनी ने इस कदम के पीछे तकनीकी रूप से कुछ बदलाव और संशोधन करने का हवाला दिया है। वहीं दूसरी ओर, अंदरूनी सूत्रों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, फिल्म को आईटी नियमों के कथित उल्लंघन के चलते प्लेटफॉर्म से हटाया गया है। आरएसवीपी और मैकगफिन पिक्चर्स के संयुक्त बैनर तले बनी इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ के अलावा अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह और सुविंदर विक्की जैसे दिग्गज कलाकारों ने बेहद महत्वपूर्ण और दमदार भूमिकाएं निभाई हैं।

सवाल-जवाब

फिल्म 'सतलुज' को जी5 से क्यों हटाया गया?
जी5 ने कुछ आवश्यक बदलावों और संशोधनों का हवाला देते हुए फिल्म को हटाया है, जबकि सूत्रों का कहना है कि इसे आईटी नियमों के उल्लंघन के चलते हटाया गया है।
फिल्म 'सतलुज' की कहानी किस वास्तविक व्यक्ति पर आधारित है?
यह फिल्म प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के वास्तविक जीवन और उनके संघर्षों पर आधारित है, जिन्होंने पंजाब में अवैध दाह संस्कारों का भंडाफोड़ किया था।
इस फिल्म का मूल नाम क्या था और इस पर क्या विवाद था?
इस फिल्म का मूल नाम 'पंजाब 95' था। इसे सेंसर बोर्ड से मंजूरी पाने के लिए चार साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी थी, जिसमें बोर्ड ने करीब 120 कट्स की मांग की थी।
फिल्म को हटाए जाने के विरोध में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी क्या कदम उठा रही है?
कमेटी ने देश भर में इस फिल्म की सार्वजनिक और स्वतंत्र स्क्रीनिंग आयोजित करने तथा अपने स्कूलों और कॉलेजों में सेमिनार आयोजित करने का निर्णय लिया है।
फिल्म 'सतलुज' में मुख्य भूमिकाएं किसने निभाई हैं और इसके निर्देशक कौन हैं?
इस फिल्म का निर्देशन हनी त्रेहान ने किया है। इसमें दिलजीत दोसांझ ने मुख्य भूमिका निभाई है, जबकि अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह और सुविंदर विक्की भी सहायक भूमिकाओं में हैं।
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