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दिल्ली मास्टर प्लान 2047: टीओडी क्षेत्र में आने वाले पट्टाधारकों को मिलेगा मालिकाना हक, डीडीए का नियंत्रण होगा खत्मदिल्ली
22 अग॰ 2026, 10:50 pm (1 घंटे पहले)· 3

दिल्ली मास्टर प्लान 2047: टीओडी क्षेत्र में आने वाले पट्टाधारकों को मिलेगा मालिकाना हक, डीडीए का नियंत्रण होगा खत्म

दिल्ली में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट के तहत आने वाले निजी पट्टा भूखंडों को जल्द ही फ्रीहोल्ड में बदला जाएगा. दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार मास्टर प्लान 2047 से 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के संपत्ति मालिकों को सीधा अधिकार मिलेगा.

राष्ट्रीय राजधानी में संपत्ति मालिकों को बड़ी राहत देने के उद्देश्य से दिल्ली मास्टर प्लान-2047 में एक महत्वपूर्ण प्रावधान तैयार किया गया है. इसके तहत ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) क्षेत्रों के भीतर आने वाली पट्टे वाली निजी जमीनों को फ्रीहोल्ड में बदला जाएगा. इस कदम का मुख्य उद्देश्य निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाना और जमीन मालिकों को उनकी अचल संपत्ति पर पूर्ण और स्थायी कानूनी अधिकार प्रदान करना है.

पट्टा व्यवस्था से मुक्ति और पूर्ण स्वामित्व का मार्ग

वर्तमान समय में दिल्ली में बड़े पैमाने पर आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां पट्टा व्यवस्था के अधीन काम करती हैं. इस पुरानी व्यवस्था में जमीन का वास्तविक मालिकाना हक दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) या अन्य सरकारी निकायों के पास रहता है, जबकि पट्टाधारक को केवल उस जमीन का उपयोग करने का सीमित अधिकार मिलता है. नए मास्टर प्लान के लागू होने से यह स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी.

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मास्टर प्लान-2047 में स्पष्ट किया गया है कि समेकित टीओडी भूखंड के अंतर्गत आने वाले व्यक्तिगत पट्टाधारक सभी बकाया शुल्कों का भुगतान करने और आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करने के बाद अपनी जमीन को फ्रीहोल्ड करवा सकेंगे. एक बार फ्रीहोल्ड का दर्जा मिलने के बाद संपत्ति मालिक को संबंधित भूखंड और उस पर बने ढांचे का पूर्ण और स्थायी कानूनी स्वामित्व प्राप्त हो जाएगा. हालांकि, नीति में यह भी साफ किया गया है कि पट्टे पर दिए गए संस्थागत भूखंडों को इस योजना में शामिल नहीं किया जाएगा और वे मौजूदा नियमों के तहत ही बने रहेंगे.

डीडीए की नोडल भूमिका और सड़क ढांचा विकास

संपूर्ण टीओडी क्षेत्र को विकास क्षेत्र घोषित किया जाएगा, जिससे इस विशेष गलियारे में निर्माण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को गति मिलेगी. दिल्ली विकास प्राधिकरण इस पूरी प्रक्रिया में नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा. टीओडी परियोजनाओं के मूल्यांकन, भवन योजनाओं की स्वीकृति और प्रशासनिक मंजूरी देने की जिम्मेदारी डीडीए के पास ही होगी.

इसके अलावा, शहर के यातायात को व्यवस्थित करने के लिए 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ाई वाली प्रमुख सड़कों को सीधे डीडीए द्वारा अधिसूचित किया जाएगा और प्राधिकरण ही उनका विकास करेगा. नए विकसित होने वाले शहरी क्षेत्रों को आत्मनिर्भर पड़ोस के मॉडल पर तैयार किया जाएगा. इन क्षेत्रों में विश्वस्तरीय स्कूल, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं, सार्वजनिक पार्क, हरित क्षेत्र, व्यावसायिक केंद्र और आवश्यक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि निवासियों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूर न जाना पड़े.

207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और चिन्हित इलाके

दिल्ली में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट नीति 2026 और मास्टर प्लान-2047 के संयुक्त ढांचे के तहत एक विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र चुना गया है. इसमें दिल्ली मेट्रो, आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) और रेलवे कॉरिडौर के 500 मीटर के दायरे में आने वाला लगभग 207 वर्ग किलोमीटर का इलाका शामिल किया गया है.

इस व्यापक योजना में राजधानी के कई प्रमुख परिवहन केंद्रों को केंद्र में रखा गया है. इनमें आनंद विहार, कड़कड़डूमा, कश्मीरी गेट और सराय काले खां से लेकर निजामुद्दीन तक के क्षेत्र शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, विभिन्न मेट्रो स्टेशनों के आसपास की घनी आबादी वाले इलाकों को भी इसमें जोड़ा गया है, जिनमें झिलमिल, ताहिरपुर, शाहदरा, मदीपुर, मंडावली, फाजलपुर और प्रीत विहार शामिल हैं. इन सभी क्षेत्रों में आने वाले योग्य निजी भूखंड धारक पट्टा प्रणाली के स्थान पर पूर्ण स्वामित्व का लाभ उठा सकेंगे.

सवाल-जवाब

दिल्ली मास्टर प्लान 2047 के तहत किस प्रकार की जमीनों को फ्रीहोल्ड किया जाएगा?
ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) क्षेत्र के भीतर आने वाले व्यक्तिगत निजी पट्टा भूखंडों को सभी बकाया शुल्कों के भुगतान और मंजूरी की शर्त पर फ्रीहोल्ड में बदला जाएगा.
किन संपत्तियों को इस फ्रीहोल्ड नीति से बाहर रखा गया है?
पट्टे पर दिए गए संस्थागत भूखंडों (इन्स्टिट्यूशनल प्लॉट्स) को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है.
टीओडी योजना के तहत कितना क्षेत्र शामिल किया गया है?
मेट्रो, आरआरटीएस और रेलवे कॉरिडौर के 500 मीटर के दायरे में आने वाला लगभग 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र इस योजना में शामिल है.
किन प्रमुख इलाकों को इस योजना के तहत चिन्हित किया गया है?
आनंद विहार, कड़कड़डूमा, कश्मीरी गेट, सराय काले खां, निजामुद्दीन के साथ-साथ झिलमिल, ताहिरपुर, शाहदरा, मदीपुर, मंडावली, फाजलपुर और प्रीत विहार मेट्रो स्टेशन के आसपास के इलाके शामिल हैं.
टीओडी क्षेत्र में सड़कों के विकास की जिम्मेदारी किसकी होगी?
डीडीए 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों को सीधे अधिसूचित करेगा और खुद उनका विकास करेगा.
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·42 मिनट पहले

दिल्ली मास्टर प्लान-2047 के तहत टीओडी क्षेत्रों में पट्टाधारकों को मालिकाना हक मिलने से कानूनी मुकदमों और संपत्ति विवादों में कमी आने की संभावना है। हालांकि, डीडीए की नोडल एजेंसी के रूप में व्यापक शक्तियां और बकाया शुल्कों का निर्धारण इस प्रक्रिया की गति और पारदर्शिता को तय करेंगे। यह बदलाव शहरी पुनर्विकास और कानूनी व्यवस्था दोनों दृष्टियों से एक बड़ा प्रशासनिक कदम है।

Rohan Verma@rohan-verma·42 मिनट पहले

सहकर्मी करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह समझना अहम है कि 207 वर्ग किलोमीटर के इस विशाल दायरे में 500 मीटर के मेट्रो और आरआरटीएस कॉरिडोर पर पट्टा मुक्ति का यह कदम आर्थिक तरक्की को नई रफ्तार देगा। हालांकि, फ्रीहोल्ड रूपांतरण के दौरान बकाया शुल्कों का मूल्यांकन और प्रशासनिक मंजूरी की प्रक्रिया यदि पारदर्शी नहीं रही, तो आम संपत्ति मालिकों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। डीडीए की नोडल भूमिका के बीच स्थानीय निकायों और नागरिकों के बीच तालमेल ही इस महत्वाकांक्षी शहरी पुनर्विकास योजना की असल परीक्षा होगी।

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