बलूचिस्तान के चागाई जिले में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के काफिले को निशाना बनाकर किए गए एक घातक हमले ने पूरे सीमावर्ती इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नोख-कुंडी क्षेत्र में हुए इस वाकये में 7 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है। घटना के बाद सामने आए विवरण के अनुसार, मौके से 5 जवानों के शवों को निकाल लिया गया, लेकिन बाकी 2 शव रेगिस्तानी इलाके में ही छूट गए क्योंकि वहां लगातार सुरक्षा का भारी जोखिम बना हुआ था। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और पाकिस्तानी सेना की ओर से भी 7 जवानों की मौत पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
क्वेटा-तफ्तान मार्ग पर सीमा के पास हुई घटना
यह हमला चागाई जिले के अंतर्गत आने वाले नोख-कुंडी इलाके में हुआ, जो सामरिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यह पूरा क्षेत्र क्वेटा-तफ्तान मार्ग पर स्थित है और ईरान के साथ-साथ अफगानिस्तान की सीमाओं के बेहद करीब पड़ता है। वहां से आ रही जानकारियों के अनुसार, अचानक हुए इस जोरदार हमले के बाद सुरक्षा बलों को उस स्थान से पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। क्षेत्र में हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि बचाव कार्य के लिए बुलाई गई एंबुलेंस टीमें भी मौके पर जाने से कतराती रहीं। नए सिरे से दूसरा हमला होने की आशंका के कारण राहत कर्मी आगे बढ़ने से बचते रहे, जिसकी वजह से मारे गए दो जवानों के पार्थिव शरीर काफी समय तक घटना स्थल से बाहर नहीं लाए जा सके।
रेगिस्तानी इलाके में शव निकालने में आई भारी मुश्किलें
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि सुरक्षा बलों को अपने ही गिरे हुए साथियों के शवों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सामने आ रहे दावों के मुताबिक, पांच शवों को तो किसी तरह वहां से हटा लिया गया, लेकिन लगातार खतरे के बीच दो शव खुले रेगिस्तान में ही पड़े रह गए। सुरक्षा व्यवस्था बिगड़ने और रास्ते में घात लगाए जाने के डर से एंबुलेंस चालकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने भी उस ओर जाने से साफ मना कर दिया। यदि ये दावे पूरी तरह सही साबित होते हैं, तो यह नोख-कुंडी जैसे सीमांत क्षेत्र में नियंत्रण और सुरक्षा तैयारियों की बेहद लचर तस्वीर को उजागर करता है। फिर भी, पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों की तरफ से इस पूरे मसले पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं दी गई है।
बलूचिस्तान में लगातार बढ़ रहे अलगाववादी टकराव
नोख-कुंडी में सामने आई यह घटना ऐसे समय में हुई है जब बलूचिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षा बलों और विद्रोही समूहों के बीच संघर्ष तेजी से गहराता दिख रहा है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी BLA पर पाकिस्तानी सेना के काफिलों, दूरदराज की चौकियों और रक्षा प्रतिष्ठानों को लगातार निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं। इस अलगाववादी संगठन ने हाल के दिनों में हुए कई बड़े हमलों की जिम्मेदारी भी अपने सिर ली है। हालांकि BLA अपने बयानों में हताहतों की जो संख्या जारी करता है, उसकी निष्पक्ष या स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाती है।



















