पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र के लिए लंबे समय से बड़ी चुनौती बने बलूच नेता की स्थिति में एक बड़ा बदलाव आया है। इस्लामाबाद और रावलपिंडी के हुक्मरानों की नींद उड़ाने वाले बलूच लिबरेशन आर्मी के शीर्ष कमांडर को लेकर अब संगठन के भीतर ही नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। पहाड़ों में बाइक चलाते और राइफल थामे नजर आने वाले इस प्रमुख चेहरे की विदाई को लेकर बलूचिस्तान से लेकर पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों तक हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम को एक रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसके पीछे कई अंदरूनी कारण बताए जा रहे हैं।
बशीर जेब की पृष्ठभूमि और प्रमुख हमले
बशीर जेब मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं और साहित्य में भी रुचि रखते रहे हैं। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत बलूच छात्र राजनीति से की थी। दिसंबर 2018 में अफगानिस्तान में हुए एक आत्मघाती हमले में असलम बलूच के मारे जाने के बाद उन्होंने संगठन की बागडोर संभाली थी। उनके नेतृत्व में बलूच लड़ाकों की कार्यशैली में बड़ा बदलाव आया और उन्होंने देश के सबसे सुरक्षित ठिकानों के साथ-साथ विदेशी हितों को भी निशाना बनाया। उनके कार्यकाल के दौरान कराची में चीनी कांसुलेट पर हमला, ग्वादर के लक्जरी पर्ल कॉन्टिनेंटल होटल पर हमला और कराची में पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज को निशाना बनाया गया। इसके अलावा मार्च 2025 में जाफर एक्सप्रेस का अपहरण और 2024 से 2026 के बीच चलाए गए बड़े अभियानों ने पाकिस्तानी सेना के जनरलों को चिंता में डाल दिया था।
संगठन द्वारा बताई गई आधिकारिक वजह
संगठन की मीडिया शाखा के माध्यम से जारी प्रेस रिलीज में स्पष्ट किया गया कि अब से सभी प्रशासनिक, सैन्य और नीतिगत निर्णय एक सीनियर कमांड काउंसिल के हाथों में होंगे। इस बदलाव के पीछे संगठन के 2018 के संविधान का हवाला दिया गया है। बयान में कहा गया कि कोई भी कमांडर चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, आजीवन इस पद पर नहीं रह सकता। इसे एक शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन करार दिया गया है, जिसमें किसी भी प्रकार के आपसी मनमुटाव से इनकार किया गया है।
तख्तापलट के पीछे के असली कारण
विश्लेषकों और सुरक्षा मामलों के अध्ययन से जुड़े संस्थानों के अनुसार इस फेरबदल के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी वजहें रहीं। पहली वजह ऑपरेशन हेरॉफ-2 की विफलता और भारी नुकसान को माना जा रहा है। 31 जनवरी 2026 को शुरू किए गए इस बड़े अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लड़ाकों को मैदान में उतारा गया था, जिसका कड़ा विरोध मजीद ब्रिगेड के प्रमुख कैप्टन रहमान गुल ने किया था। इतने बड़े पैमाने पर बल तैनात किए जाने से लड़ाके पाकिस्तानी सेना की रडार पर आ गए, जिसके बाद हुई जवाबी कार्रवाई में संगठन को भारी जनहानि उठानी पड़ी। दूसरी वजह महिला सुसाइड बॉम्बर्स का इस्तेमाल बताया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बलूच आंदोलन की नैतिक साख को नुकसान पहुंचा और दुनिया भर में समर्थन घटने लगा।
पाकिस्तान का प्रोपेगैंडा और भारत विरोधी नैरेटिव
नेतृत्व परिवर्तन की खबर सामने आते ही पाकिस्तानी सेना और जनरल आसिम मुनीर से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल्स ने एक नया और मनगढ़ंत नैरेटिव फैलाना शुरू कर दिया। कई प्रोपेगैंडा अकाउंट्स के जरिए यह झूठा दावा किया गया कि बशीर जेब को कंधार में जहर दे दिया गया है और इलाज के लिए उन्हें भारत लाया गया है। स्वतंत्र जांच में यह बात सामने आई कि यह पूरी थ्योरी पाकिस्तानी सेना के आईटी सेल द्वारा गढ़ी गई थी, जिसका उद्देश्य अपनी नाकामियों को छुपाना और हमेशा की तरह हर आंतरिक विद्रोह का ठीकरा भारत के सिर फोड़ना है।



















