एक तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली शांति डील को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहे थे, तो दूसरी ओर खुद ईरान ने ही उनके दावे की हवा निकाल दी। शहबाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था कि अगले 24 घंटे के भीतर यह समझौता फाइनल हो जाएगा और इस पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हस्ताक्षर भी हो सकते हैं। लेकिन ईरान ने इस पूरे दावे को सिरे से नकार दिया और दो टूक कहा कि रविवार (14 जून) को डील पर कोई साइन नहीं होने जा रहा।
ईरान ने तय तारीख के दावे पर लगाई रोक
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने इस मामले पर रुख साफ करते हुए कहा कि इस्लामाबाद मेमोरेंडम पर आने वाले दिनों में हस्ताक्षर होने की गुंजाइश से इनकार नहीं किया जा सकता, मगर अभी से कोई पक्की तारीख बता देना जल्दबाजी होगी। यानी ईरान ने संभावना तो मानी, लेकिन शहबाज के '24 घंटे' वाले टाइमलाइन को मानने से इनकार कर दिया। इसी बयान के बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के उस दावे पर सवाल उठने लगे, जिसमें उन्होंने एक दिन के भीतर शांति समझौते पर दस्तखत होने की बात कही थी। नतीजा यह कि दोनों देशों के आधिकारिक बयानों में आपस में ही विरोधाभास नजर आने लगा।
इस्लामाबाद मेमोरेंडम पर साइन होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन दूसरी ओर से हिचकिचाहट की वजह से डील पर हस्ताक्षर की तारीख पर कोई भी स्टेटमेंट देने में सावधानी बरतनी चाहिए: Esmaeil Baghaei
शहबाज ने क्या-क्या दावा किया था
ईरान की ओर से सफाई आने से पहले शहबाज शरीफ ने X पर बेहद आत्मविश्वास के साथ पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा, 'हम पीस डील के काफी करीब हैं। अगले 24 घंटों में इसके फाइनल होने की उम्मीद है, जिसके तुरंत बाद पाकिस्तान पीस डील पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से साइन करने की तैयारी कर रहा है। इसके बाद अगले हफ्ते तकनीकी स्तर की बातचीत होगी।' इस पोस्ट से साफ था कि पाकिस्तान खुद को इस समझौते के अहम किरदार के तौर पर पेश करना चाहता था और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर की प्रक्रिया तक की रूपरेखा गिना दी थी।
अमेरिका और ईरान का जताया था आभार
अपने इसी संदेश में शहबाज शरीफ ने दोनों पक्षों का शुक्रिया भी अदा किया था। उन्होंने आगे लिखा, 'हम बातचीत के दौरान लगातार प्रतिबद्धता बनाए रखने के लिए अमेरिका और ईरान का शुक्रिया करना चाहते हैं, और इस इलाके में अपने भाइयों के सहयोग के लिए हम उनका दिल से आभार जताते हैं। हमें पूरा विश्वास है कि यह ऐतिहासिक पीस डील स्थायी शांति के लिए एक मजबूत आधार बनेगी।' लेकिन ईरान के प्रवक्ता के बयान ने इस पूरे जोश पर पानी फेर दिया, क्योंकि जिस समयसीमा को लेकर पाकिस्तान आश्वस्त दिख रहा था, ईरान उसकी पुष्टि करने को तैयार ही नहीं था।













