पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा हालात बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच चुके हैं। मस्तुंग जिले के बेहद संवेदनशील खद कोचा इलाके से गुजर रहे बलूचिस्तान के गृह मंत्री मीर ज़ियाउल्लाह लांगो के काफ़िले पर अज्ञात हमलावरों ने अचानक अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस भीषण हमले में गृह मंत्री बाल-बाल बच गए, लेकिन उनकी सुरक्षा में तैनात तीन पुलिसकर्मियों सहित छह लोग गोलियां लगने से घायल हो गए हैं। दो घायल जवानों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इस घटना को सेनापति आसिम मुनीर द्वारा हाल ही में बलूचिस्तान में करवाई गई एयरस्ट्राइक के जवाब में देखा जा रहा है, जिसमें मासूम बच्चों सहित 28 नागरिकों की मौत हो गई थी। इस दुस्साहसिक हमले ने पाकिस्तानी सैन्य मुख्यालय रावलपिंडी और केंद्र सरकार में हड़कंप मचा दिया है।
मस्तुंग के खद कोचा में हमले का विवरण और हताहतों की स्थिति
बलूचिस्तान सरकार के प्रांतीय प्रवक्ता शाहिद रिंद ने इस जानलेवा हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि गृह मंत्री मीर ज़ियाउल्लाह लांगो का काफ़िला मस्तुंग के खद कोचा क्षेत्र में स्थित एक मुख्य हाईवे से गुजर रहा था। उसी दौरान रास्ते में घात लगाकर बैठे हमलावरों ने स्वचालित हथियारों से भारी गोलीबारी कर दी। अचानक हुए इस हमले से मौके पर अफ़रा-तफरी मच गई और सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों ने अदम्य साहस दिखाते हुए मंत्री की गाड़ियों को सुरक्षा घेरा प्रदान किया। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि गृह मंत्री पूरी तरह सुरक्षित हैं और घटना के तुरंत बाद उन्हें बेहद सुरक्षित तरीके से प्रांतीय राजधानी क्वेटा पहुंचा दिया गया है।
स्थानीय पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, हमलावरों की गोलियों का निशाना छह लोग बने, जिनमें बलूचिस्तान पुलिस के तीन जवान शामिल हैं। दो पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आई हैं और उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। सभी घायल व्यक्तियों को तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद क्वेटा के मुख्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। हमले के बाद पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मंत्री को सुरक्षित निकालना प्राथमिक लक्ष्य था।
शहबाज शरीफ सरकार और सेनापति आसिम मुनीर से लांगो के राजनीतिक संबंध
हमले का शिकार बने मीर ज़ियाउल्लाह लांगो बलूचिस्तान की राजनीति में एक बेहद प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। वे बलूचिस्तान आवामी पार्टी (BAP) के वरिष्ठ नेता हैं और वर्तमान में बलूचिस्तान में सत्तारूढ़ साझा गठबंधन सरकार का प्रमुख हिस्सा हैं। प्रांतीय सरकार में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP), पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) और BAP का गठबंधन चल रहा है। इसके अलावा, इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली केंद्रीय सरकार को भी BAP का पूरा समर्थन प्राप्त है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मीर ज़ियाउल्लाह लांगो सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना के शीर्ष जनरलों और सेनापति आसिम मुनीर के बेहद करीबी माने जाते हैं। इस्लामाबाद की केंद्र सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान के साथ लांगो के गहरे संबंधों के कारण ही वे बलोच विद्रोही गुटों के सीधे निशाने पर हैं। इस हमले को सैन्य नेतृत्व के लिए एक सीधे संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि बलूचिस्तान में सैन्य बल प्रयोग से असंतोष दबाया नहीं जा सका है।
खद कोचा हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त, एक महीने में चौथा हमला
मस्तुंग का खद कोचा क्षेत्र पिछले कुछ समय से सुरक्षा बलों और प्रांतीय प्रशासन के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण इलाका बन चुका है। जिस हाईवे पर गृह मंत्री के काफ़िले को निशाना बनाया गया, वह सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। चिंताजनक बात यह है कि पिछले महज 30 दिनों के भीतर इसी हाईवे पर यह चौथा बड़ा हमला दर्ज किया गया है।
इससे पहले हुए हमलों के बाद पाकिस्तानी सेना और स्थानीय पुलिस ने इलाके में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाने के दावे किए थे। दावा किया गया था कि आतंकवादियों और विद्रोहियों के सफाए के लिए चलाए गए अभियानों से हाईवे को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया गया है। हालांकि, सीधे प्रांतीय गृह मंत्री के काफ़िले पर हुए इस हमले ने सेना और पुलिस प्रशासन के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है।
पूरे इलाके की घेराबंदी और BLA पर गहराया संदेह
गृह मंत्री पर हुए इस हमले के तुरंत बाद पूरे बलूचिस्तान में आपातकालीन सुरक्षा कदम उठाए गए हैं। पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक बलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे मस्तुंग जिले और खद कोचा क्षेत्र की नाकाबंदी कर दी है। हाईवे के सभी प्रवेश और निकास द्वारों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है ताकि हमलावर इलाके से भाग न सकें। पास के पहाड़ी और जंगली इलाकों में सेना द्वारा बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। राजधानी क्वेटा और उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
यद्यपि अभी तक किसी भी बलोच अलगाववादी संगठन ने इस हमले की औपचारिक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है, लेकिन हमले की योजना, स्थान और तरीके को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) पर ही सबसे अधिक संदेह है। BLA इससे पहले भी सरकारी प्रतिष्ठानों और सेना से जुड़े नेताओं पर ऐसे ही घातक हमले करती रही है।
बलूचिस्तान में गहराता असंतोष: प्राकृतिक संसाधन और CPEC विवाद
बलूचिस्तान में हिंसा और सशस्त्र विद्रोह का इतिहास काफी पुराना और जटिल है। यह प्रांत प्राकृतिक गैस, खनिज पदार्थों और बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद पाकिस्तान का सबसे पिछड़ा और गरीब क्षेत्र बना हुआ है। स्थानीय बलोच नागरिकों का आरोप है कि इस्लामाबाद स्थित केंद्र सरकार और पंजाब प्रांत के नेता उनके संसाधनों का अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं और बलूचिस्तान के लोगों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
इसके साथ ही, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत बलूचिस्तान में चल रही चीनी परियोजनाओं को लेकर भी स्थानीय आबादी में भारी रोष व्याप्त है। लोगों का मानना है कि इन विकास परियोजनाओं का वास्तविक लाभ स्थानीय निवासियों को न देकर बाहरी लोगों को दिया जा रहा है। इसी जनआक्रोश के कारण स्थानीय बागी गुट लगातार पाकिस्तानी सेना, पुलिस बल और सरकारी पदाधिकारियों को निशाना बना रहे हैं।



















