बलूचिस्तान का नुश्की जिला इस समय पाकिस्तानी सैन्य बलों की सख्त नाकेबंदी का सामना कर रहा है, जिसके कारण पूरा इलाका एक तरह से बाहरी दुनिया से कट चुका है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असिम मुनीर के दिशा-निर्देशों में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत जिले को चारों तरफ से घेर लिया गया है। नाजी जर्मनी के दौर में जिस तरह तानाशाह एडोल्फ हिटलर द्वारा इलाकों को सील कर आबादी को प्रताड़ित किया जाता था, वैसी ही स्थितियां नुश्की में पैदा कर दी गई हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि वहां जहरीली गैसों का इस्तेमाल किया गया था, जबकि यहां भोजन, पानी और आवश्यक दवाओं की आपूर्ति रोककर आम नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। बलोच नेशनल मूवमेंट द्वारा इस स्थिति को लेकर बेहद गंभीर जानकारियां साझा की गई हैं।
नुश्की में पूर्ण सैन्य घेराबंदी और आवाजाही पर सख्त प्रतिबंध
बलोच नेशनल मूवमेंट की ओर से जारी बयानों के अनुसार, नुश्की जिले में पिछले कई महीनों से सुरक्षा बलों की ओर से बेहद कड़े प्रतिबंध लागू हैं। जिले की सभी बाहरी और आंतरिक सीमाओं को पूरी तरह सील कर दिया गया है। मुख्य सड़कों पर किसी भी तरह की सार्वजनिक बस, ट्रक या निजी वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी गई है। स्थानीय लोग अपने ही घरों के भीतर सीमित रहने को विवश हैं क्योंकि पूरे क्षेत्र में कर्फ्यू जैसे कठोर नियम लागू हैं। सार्वजनिक परिवहन की अनुपस्थिति के कारण आम नागरिक आपात स्थिति में भी क्षेत्र छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर नहीं जा पा रहे हैं। इस नाकेबंदी ने पूरे जिले को अलग-थलग कर दिया है।
अभियान में हत्याएं और युवाओं की जबरन गुमशुदगी
क्षेत्र में जारी सैन्य कार्रवाई के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। बलोच नेशनल मूवमेंट के अनुसार, बीते एक सप्ताह की अवधि में ही कम से कम नौ बेकसूर बलूच नागरिकों की जान जा चुकी है। इसके अलावा, दर्जनों युवाओं को रात के समय आवासीय बस्तियों में छापेमारी कर जबरन उठाकर अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया है, जिनका अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। स्थानीय निवासियों में इस कार्रवाई को लेकर गहरा डर व्याप्त है, क्योंकि सैन्य वाहन देर रात गांवों और कस्बों में प्रवेश करते हैं और सुबह लोगों के गायब होने अथवा शव बरामद होने की खबरें सामने आती हैं।
खाद्यान्न संकट, दवाओं का अभाव और स्वास्थ्य सेवाओं पर रोक
महीनों से जारी नाकेबंदी के कारण नुश्की के स्थानीय बाजारों में खाद्य सामग्री और जरूरी दवाइयों का स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो चुका है। दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद करा दिए गए हैं। इसका सबसे भयानक प्रभाव छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों पर पड़ रहा है। बीमार व्यक्ति आवश्यक दवाओं के बिना जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। यहां तक कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंसों को सेना की जांच चौकियों पर रोक दिया जाता है, जिससे समय पर इलाज न मिलने के कारण कई लोग दम तोड़ रहे हैं।
बाजारों में लूटपाट और निजी संपत्तियों का नुकसान
बलोच नेशनल मूवमेंट ने आरोप लगाया है कि इस सैन्य नाकेबंदी और कर्फ्यू का फायदा उठाकर सुरक्षा बल स्थानीय बाजारों में अनधिकृत रूप से प्रवेश कर रहे हैं। बंद पड़ी दुकानों के ताले तोड़कर वहां रखे सामान की लूटपाट की जा रही है। नागरिकों की व्यक्तिगत संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया जा रहा है। इससे स्थानीय व्यापारियों और आम जनता को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनका जीवनयापन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है।
सामूहिक दंड की नीति और बलूच संगठनों की प्रतिक्रिया
बलोच नेशनल मूवमेंट का मानना है कि यह पूरी कार्रवाई पाकिस्तानी प्रशासन की सामूहिक दंड की नीति का हिस्सा है। संगठन के अनुसार, जब सैन्य बल स्वतंत्रता की मांग करने वाले बलूच लड़ाकों का मुकाबला करने में विफल रहते हैं, तो वे इसका गुस्सा आम नागरिकों पर निकालते हैं। बलूचिस्तान में स्वतंत्रता के आंदोलन के प्रसार से सेना के मनोबल पर प्रभाव पड़ा है, जिसे छिपाने के लिए बेकसूर लोगों पर कड़े उपाय थोपे जा रहे हैं और इसे सैन्य सफलता के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। बलोच यकजेहती कमेटी ने भी इस नाकेबंदी की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन करार दिया है।
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से अपील
नुश्की में निर्मित मानवीय आपातकाल को देखते हुए विभिन्न बलूच सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और विश्व भर की मानवाधिकार संस्थाओं से आग्रह किया है कि वे बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना द्वारा थोपी गई नाकेबंदी और अत्याचारों का तुरंत संज्ञान लें। बलोच नेशनल मूवमेंट ने स्थानीय नागरिकों का आह्वान किया है कि वे इस कठिन समय में संयम और एकजुटता बनाए रखें, और विश्वास व्यक्त किया है कि यह दमनकारी दौर अधिक समय तक नहीं टिकेगा।



















