बलूचिस्तान के सुराब क्षेत्र में स्थित गोअनधान गांव पर रात के समय हुए एक घातक हवाई हमले में 28 निर्दोष नागरिकों की दर्दनाक मौत हो गई। पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने उस वक्त रिहायशी घरों को निशाना बनाकर बमबारी की जब पूरा गांव सो रहा था। इस विनाशकारी हमले में मारे गए लोगों में 9 बच्चे और 7 महिलाएं शामिल हैं। यह भीषण सैन्य कार्रवाई बलूचिस्तान भर में नागरिकों द्वारा आयोजित पाकिस्तान से स्वतंत्रता के व्यापक आयोजनों के ठीक बाद हुई है। घटना में 17 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें मलबे से निकालकर स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सहायता दी जा रही है।
आधी रात की बमबारी और गोअनधान में तबाही का परिदृश्य
घटना की रात करीब 2 बजे जब गोअनधान गांव के निवासी अपने घरों में सो रहे थे, तभी पाकिस्तानी सैन्य लड़ाकू विमानों की आवाज़ से पूरा इलाका थर्रा उठा। लड़ाकू विमानों ने सीधे बेकसूर बलोच नागरिकों के कच्चे और पक्के मकानों पर भारी गोला-बारूद गिराया। बमबारी के तीव्र धमाकों ने पूरे गांव को पल भर में मलबे के ढेर में बदल दिया। धमाकों के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई और मकानों की छतें गिरने से दर्जनों लोग जिंदा दफन हो गए।
हवाई हमले के तुरंत बाद की स्थितियों में पूरा गांव खंडहर नजर आने लगा। चारों ओर कंक्रीट, मिट्टी और लकड़ी के टुकड़ों के बीच दबे हुए शवों को निकालने की कोशिशें शुरू हुईं। स्थानीय लोग अपने हाथों से मलबा हटाकर अपनों की तलाश में जुट गए। सैन्य जेट विमानों से गिराए गए बमों के कारण किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला और सो रहे परिवार मलबे के नीचे दब गए।
हताहतों का विवरण और घायलों की नाजुक स्थिति
इस भीषण हमले में जान गंवाने वाले 28 लोगों का आंकड़ा बेहद भयावह स्थिति को उजागर करता है। मृतकों में सबसे अधिक संख्या असहाय महिलाओं और मासूम बच्चों की दर्ज की गई है। इस सैन्य हमले में कुल 9 बच्चों की मौत हो गई, जो हमले के वक्त अपने बिस्तरों पर बेखबर सो रहे थे। इसके साथ ही अपने परिवारों और बच्चों को बचाने का प्रयास कर रहीं 7 महिलाओं ने भी इस गोलाबारी में अपनी जान गंवा दी। हमले में 12 बलोच पुरुषों की भी मौत हुई है।
मृतकों के अतिरिक्त इस हवाई हमले में 17 से अधिक नागरिक गंभीर रूप से झुलसने और मलबे में दबने के कारण घायल हुए हैं। बचाव कार्य के दौरान मलबे से निकाले गए घायलों में से कई की हालत बेहद चिंताजनक बनी हुई है। स्थानीय चिकित्सा सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के बीच घायलों का उपचार किया जा रहा है। गंभीर रूप से घायल लोगों की स्थिति को देखते हुए आशंका व्यक्त की जा रही है कि आने वाले समय में मौतों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है।
स्वतंत्रता प्रदर्शन और सैन्य कमान की जवाबी कार्रवाई
आधी रात को आम नागरिकों के रिहायशी इलाके को निशाना बनाने के पीछे की वजह इस हमले से एक दिन पूर्व बलूचिस्तान में हुए नागरिक प्रदर्शनों से जुड़ी है। बलूच आवाम ने पाकिस्तान सरकार और सेना के शासन के खिलाफ पूरे क्षेत्र में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन किया था। इस दौरान सड़कों पर बलोच राष्ट्रीय ध्वज फहराए गए थे तथा सेना और हुकूमत की नीतियों के विरोध में उग्र नारेबाजी की गई थी।
बलूचिस्तान में आम लोगों का यह बागी रुख और सरेआम आजादी का जश्न मनाना सैन्य नेतृत्व को नागवार गुजरा। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने नागरिकों की उठती आवाज को दबाने और क्षेत्र में खौफ का माहौल कायम करने के इरादे से कड़ा कदम उठाने का निर्देश दिया। इसी बौखलाहट और प्रतिशोध की कार्रवाई के तहत आधी रात को शांत गोअनधान गांव पर लड़ाकू विमानों से बम गिराने का आदेश कार्यान्वित किया गया।
जमीनी नाकेबंदी, प्रताड़ना और सैन्य चुप्पी
क्षेत्र के प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय स्रोतों के अनुसार यह कार्रवाई केवल एक हवाई हमले तक सीमित नहीं थी। बमबारी से ठीक पहले और उसके तुरंत बाद सैन्य टुकड़ियों ने पूरे गोअनधान गांव की घेराबंदी कर ली थी। गांव में प्रवेश करने वाले रास्तों को सील कर दिया गया और सेना के जवानों ने स्थानीय लोगों के साथ मारपीट और यातना देने की गतिविधियों को अंजाम दिया।
पाकिस्तानी बल पिछले कई दशकों से बलूचिस्तान के विभिन्न हिस्सों में सैन्य अभियानों के नाम पर आम नागरिकों को गैर-कानूनी ढंग से हिरासत में लेने, प्रताड़ना केंद्रों में रखने और फर्जी मुठभेड़ों में मार गिराने जैसी कार्रवाइयों के आरोप झेलते रहे हैं। हालांकि, नागरिक बस्तियों पर सीधे फाइटर जेट्स से बमबारी करने की यह घटना सैन्य कार्रवाइयों के खतरनाक स्तर को दर्शाती है। घटना के घंटों बीत जाने के बाद भी पाकिस्तानी सेना और प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से इस भीषण हमले पर पूरी तरह चुप्पी साधी गई है।
बलूचिस्तान में असंतोष के आर्थिक और सामाजिक कारण
बलूचिस्तान के निवासियों द्वारा पाकिस्तान से अलग होने की मांग और निरंतर जारी असंतोष के पीछे गहरे आर्थिक और मानवाधिकार से जुड़े कारण हैं। प्राकृतिक संसाधनों के दृष्टिकोण से बलूचिस्तान अत्यधिक समृद्ध क्षेत्र है, जहां प्राकृतिक गैस, तांबा, सोना और कई मूल्यवान खनिजों के विशाल भंडार मौजूद हैं। इसके बावजूद बलूचिस्तान के आम नागरिक अत्यधिक गरीबी, बेरोजगारी, पीने के साफ पानी की कमी और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में जीवन जीने को मजबूर हैं।
स्थानीय आबादी लंबे समय से यह आरोप लगाती रही है कि पाकिस्तान की केंद्रीय सत्ता बलूचिस्तान के प्राकृतिक खजानों का दोहन तो करती है, लेकिन उसके बदले स्थानीय लोगों को केवल तंगहाली और उपेक्षा ही मिलती है। इसके अतिरिक्त, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) जैसी अरबों डॉलर की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भी बलोच लोगों के रोजगार और अधिकारों की अनदेखी की गई है। संसाधनों की इस बेदखली और निरंतर सैन्य दमन के कारण ही बलूचिस्तान में स्वतंत्रता आंदोलन और विद्रोही समूहों की सक्रियता लगातार मजबूत हो रही है।



















