पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के रावलकोट शहर में जारी जन आक्रोश को दबाने के लिए पाकिस्तानी शासन ने एक नई साजिश रची है। जम्मू कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में चल रहे जन आंदोलन से घबराए पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और खुफिया एजेंसी आईएसआई ने खूंखार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के टॉप कमांडर मसूद इलियास कश्मीरी को मैदान में उतारा है। भारत की सैन्य कार्रवाई में अपने पूरे परिवार को खो चुका यह मोस्ट वांटेड आतंकी रावलकोट में भेष बदलकर शांति वार्ता के नाम पर एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बना। इस घटनाक्रम से साफ हो गया है कि इस्लामाबाद और रावलपिंडी के हुक्मरान पीओके में उठ रही नागरिक अधिकारों की आवाज को कुचलने के लिए किस हद तक गिर चुके हैं।
रावलकोट समेत पूरे पीओके में आम नागरिक बिजली की बढ़ी दरों, बेतहाशा महंगाई, बुनियादी सुविधाओं के अभाव और पाकिस्तानी प्रशासन की ज्यादतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे हुए हैं। जम्मू कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के झंडे तले चल रहा यह आंदोलन अब आर-पार की जंग में तब्दील हो चुका है। जब बल प्रयोग और प्रशासनिक सख्ती से यह आंदोलन नहीं दबा, तो पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने आतंकवादियों को सादे कपड़ों में ढाल बनाकर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
रावलकोट में नागरिक आंदोलन को कुचलने का सीक्रेट प्लान
पीओके में लगातार बिगड़ते हालात के बीच इस्लामाबाद की हुकूमत और सैन्य नेतृत्व बेहद दबाव में हैं। स्थानीय नागरिकों की ओर से बुनियादी सहूलियतों और आजादी की मांग को लेकर किए जा रहे प्रदर्शनों से पाकिस्तानी प्रशासन की नींव हिल गई है। इस आंदोलन को कमजोर करने के मकसद से आईएसआई की देखरेख में एक तथाकथित शांति प्रतिनिधिमंडल तैयार किया गया। इसका काम प्रदर्शनकारी नेताओं से बात करके आंदोलन को खत्म कराना था।
हालांकि, इस पूरी कवायद के पीछे की खौफनाक हकीकत तब सामने आई जब यह जानकारी मिली कि प्रतिनिधिमंडल में जैश-ए-मोहम्मद का मोस्ट वांटेड कमांडर मसूद इलियास कश्मीरी भी चुपके से शामिल किया गया था। अवामी एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत के दौरान यह आतंकी लगातार कैमरों और मीडिया की नजरों से बचता हुआ देखा गया। यद्यपि इस घटना से जुड़े कथित वीडियो फुटेज की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन खुफिया एजेंसियों से मिले संकेत बताते हैं कि जनरल असीम मुनीर अपनी नाकामी पर पर्दा डालने के लिए खूंखार आतंकियों का सहारा ले रहे हैं।
लश्कर और जैश का खूनी गठजोड़: ISI का दोहरा खेल
पीओके में अपने खिलाफ उठती आवाजों से बौखलाई पाकिस्तानी सेना ने अपने पाले हुए आतंकी संगठनों को समानांतर मोर्चे पर तैनात कर दिया है। आईएसआई ने आंदोलनकारियों को चुप कराने के लिए लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का एक नया खूनी गठजोड़ बनाया है।
पहला मोर्चा दुष्प्रचार का है, जिसके तहत लश्कर-ए-तैयबा ने रावलकोट में प्रदर्शन कर रहे नागरिक समाज के नेताओं के खिलाफ गंदा अभियान चला रखा है। अपने अधिकारों की मांग कर रहे आम लोगों और नेताओं को खुलेआम देशद्रोही और गद्दार करार दिया जा रहा है।
दूसरा मोर्चा जमीनी दहशत का है। आंदोलनकारी नागरिकों को डराने, धमकाने और उन पर हमले करने के लिए लश्कर और जैश के हथियारबंद आतंकियों को सादे कपड़ों में सड़कों पर उतारा गया है।
तीसरा मोर्चा आईएसआई के दोहरे खेल का हिस्सा है। एक तरफ जहां लश्कर के जरिए धमकियां और गोलियां बरसाई जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ मसूद इलियास कश्मीरी जैसे दुर्दांत आतंकी को शांतिदूत बनाकर मेज पर बातचीत के लिए भेजा जा रहा है। इस रणनीति का मकसद नागरिक नेताओं में खौफ पैदा करके उन्हें आंदोलन वापस लेने पर मजबूर करना है।
कौन है मोस्ट वांटेड कमांडर मसूद इलियास कश्मीरी?
मुफ्ती मसूद इलियास के नाम से जाना जाने वाला यह आतंकी जैश-ए-मोहम्मद के भीतर कोई सामान्य गुर्गा नहीं है, बल्कि वह इस संगठन के सर्वोच्च अधिकारियों में गिना जाता है। वह लंबे समय से भारतीय सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में शीर्ष पर है।
जैश-ए-मोहम्मद के संगठनात्मक ढांचे में मौलाना मसूद अजहर के बाद सबसे ज्यादा असर मसूद इलियास कश्मीरी का ही माना जाता है। वह आतंकी संगठन के मुख्य प्रवक्ता के रूप में काम करता है, तमाम हिंसक ऑपरेशन्स की योजना बनाता है और युवा लड़ाकों का ब्रेनवॉश करके उन्हें आतंकवाद के दलदल में धकेलने वाला मुख्य भर्ती अधिकारी है।
'ऑपरेशन सिंदूर' और बहावलपुर में मसूद अजहर के कुनबे का खात्मा
मसूद इलियास कश्मीरी वही आतंकी है जिसके एक लीक हुए कबूलनामे ने भारत के सैन्य ऑपरेशन की सफलता की पुष्टि पूरी दुनिया के सामने की थी। 7 मई को भारतीय सेना ने सटीक गुप्त सूचनाओं के आधार पर सीमा पार जाकर पाकिस्तान के बहावलपुर में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के मुख्य मुख्यालय 'मरकज सुभान अल्लाह' पर पिनपॉइंट एयर स्ट्राइक की थी। इस भीषण हमले में जैश का पूरा गढ़ मलबे के ढेर में बदल गया था। उस समय पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना लगातार यह झूठा दावा करती रही कि सीमा पर कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है और सब कुछ सामान्य है।
लेकिन इस सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद इंटरनेट पर मसूद इलियास कश्मीरी का एक रोता हुआ वीडियो सामने आया, जिसने इस्लामाबाद के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। उस वीडियो में कश्मीरी फूट-फूटकर रोते हुए स्वीकार कर रहा था कि भारत के मिसाइल हमले ने उनके मुख्यालय को पूरी तरह तबाह कर दिया है। उसने यह भी माना था कि इस हमले में जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर का पूरा परिवार और कई शीर्ष कमांडर मारे गए। इस बयान ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के सफेद झूठ का पर्दाफाश कर दिया था।
सेना प्रमुख असिम मुनीर की खुली पोल: आतंकियों के जनाजे में शामिल हुई थी फौज
मसूद इलियास कश्मीरी के उस लीक वीडियो ने केवल भारतीय एयर स्ट्राइक की तबाही की पुष्टि ही नहीं की, बल्कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर का घिनौना चेहरा भी दुनिया के सामने लाकर रख दिया। कश्मीरी ने वीडियो में साफ तौर पर खुलासा किया था कि बहावलपुर हमले में मारे गए आतंकियों और मसूद अजहर के परिजनों के जनाजे में शामिल होने के लिए खुद जनरल असीम मुनीर ने अपनी फौज के वरिष्ठ जनरलों और विशेष कमांडो अधिकारियों की ड्यूटी लगाई थी।
इस सनसनीखेज खुलासे से यह बात पूरी तरह साबित हो गई थी कि पाकिस्तान की सेना राज्य प्रायोजित आतंकवाद की सबसे बड़ी रक्षक है। सेना प्रमुख खुद अपने जनरलों को मारे गए आतंकियों के अंतिम संस्कार में भेजकर उन्हें राजकीय सम्मान देने का काम करते रहे हैं।
हताशा में पाकिस्तानी हुकूमत: क्या हाथ से निकल रहा है PoK?
जिस आतंकवादी संगठन की रीढ़ भारत ने एक ही झटके में तोड़ दी थी, उसके टॉप कमांडर को पीओके के त्रस्त नागरिकों के सामने शांति वार्ताकार बनाकर भेजना पाकिस्तानी नेतृत्व की भारी बेबसी को दर्शाता है। रावलकोट और पीओके के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोग अब पाकिस्तानी सेना के दमन चक्र, आसमान छूती महंगाई और बुनियादी नागरिक सुविधाओं के घोर अभाव से पूरी तरह तंग आ चुके हैं।
पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और आईएसआई को यह बात समझनी होगी कि बंदूकों की नोक पर और खूंखार आतंकियों के खौफ से आम जनता के असंतोष को ज्यादा दिनों तक नहीं दबाया जा सकता। मसूद इलियास कश्मीरी जैसे आतंकियों को आगे करके शांति का ढोंग रचना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि इस्लामाबाद का नियंत्रण पीओके पर से धीरे-धीरे ढीला पड़ रहा है।



















