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तूफान में फंसे पाकिस्तानी विमानों के लिए भारत ने खोला अपना आसमान, तीन फ्लाइट्स को मिनटों में दी सुरक्षित राह — पिछले साल पाकिस्तान ने हमारी इंडिगो को ठुकराया थापाकिस्तान
14 जून 2026, 4:17 am (46 दिन पहले)· 4

तूफान में फंसे पाकिस्तानी विमानों के लिए भारत ने खोला अपना आसमान, तीन फ्लाइट्स को मिनटों में दी सुरक्षित राह — पिछले साल पाकिस्तान ने हमारी इंडिगो को ठुकराया था

मॉनसून के भयंकर तूफान में लाहौर में लैंडिंग नामुमकिन होने पर पाकिस्तान की तीन यात्री फ्लाइट्स को भारत ने कुछ मिनटों के लिए अपना एयरस्पेस देकर सुरक्षित निकाला, जबकि ठीक एक साल पहले पाकिस्तान ने ऐसी ही मुसीबत में फंसी भारतीय इंडिगो फ्लाइट को रास्ता देने से इनकार कर दिया था।

मॉनसून के इस मौसम में पंजाब के ऊपर का आसमान कुछ ही पलों में जानलेवा बन गया। तेज़ बवंडर और लगातार गिरती आसमानी बिजली के बीच पाकिस्तानी एयरलाइंस के तीन बड़े यात्री विमान बुरी तरह फंस गए। ये तीनों फ्लाइट्स दुबई, जेद्दा और दम्माम से सैकड़ों मुसाफिरों को लेकर आ रही थीं और इनकी मंज़िल लाहौर थी, लेकिन वहां विजिबिलिटी जीरो हो जाने के कारण उतरना नामुमकिन हो चुका था।

ऐसे हालात में जब चारों तरफ कयामत जैसा नज़ारा था, भारत ने अपने एयरस्पेस के दरवाज़े खोल दिए। मदद की गुहार लगा रहे पाकिस्तानी विमानों को कुछ मिनटों के लिए भारतीय आसमान में सुरक्षित जगह दी गई, ताकि उनमें बैठे बेकसूर यात्रियों की जान बचाई जा सके।

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तीनों विमानों को भारत ने कैसे एक-एक कर निकाला

हर फ्लाइट की अपनी अलग दास्तां थी, और हर बार भारत की एटीसी ने इंसानियत को राजनीति से ऊपर रखा।

लाहौर-दुबई फ्लाइट (9P-514): रात करीब 9:13 बजे यह विमान कसूर के रास्ते में पूरी तरह भटक गया। पायलटों ने जान बचाने के लिए भारतीय एयरस्पेस में इमरजेंसी एंट्री की मांग की, और अमृतसर एटीसी ने इसे रास्ता दे दिया। यह प्लेन करीब 20 मिनट तक भारतीय पंजाब के आसमान में सुरक्षित उड़ता रहा और रात 9:33 बजे बहावलनगर के रास्ते वापस पाकिस्तान लौट गया।

लाहौर-जेद्दा फ्लाइट (9P-586): रात 8:52 बजे यह विमान कंगनपुर के पास से भारतीय सीमा में दाखिल हुआ। तूफान इतना भयानक था कि कॉकपिट में पायलटों के हाथ कांप रहे थे। भारत ने इसे 4 मिनट का सुरक्षित रास्ता दिया, जिसके बाद यह सुलेमानकी के पास से वापस लौटा।

दम्माम-लाहौर फ्लाइट (PF-743): रात 8:59 बजे यह जहाज़ हवेली लाखा के पास से भारतीय आसमान में पहुंचा और करीब 6 मिनट भारत की पनाह में रहने के बाद कसूर के रास्ते वापस चला गया।

लाहौर में विजिबिलिटी जीरो होने के बावजूद भारतीय एटीसी ने लगातार लाहौर एटीसी से संपर्क बनाए रखा और इन फ्लाइट्स को सुरक्षित निकालने में पूरा सहयोग दिया। बाद में इनमें से एक फ्लाइट को पेशावर डायवर्ट करना पड़ा।

ठीक एक साल पहले — जब पाकिस्तान ने मुंह मोड़ लिया था

भारत ने जहां पड़ोसी देश के नागरिकों की जान बचाने के लिए अपना आसमान खोल दिया, वहीं इस घटना ने उस दिन की याद ताज़ा कर दी जब पाकिस्तान ने ठीक ऐसी ही मुसीबत में फंसी एक भारतीय फ्लाइट की मदद करने से साफ इनकार कर दिया था।

दिल्ली से श्रीनगर जा रही इंडिगो की फ्लाइट (6E2142) पठानकोट के पास एक खतरनाक ओलावृष्टि और आसमानी बवंडर में घिर गई थी। विमान में सवार सैकड़ों भारतीय यात्रियों की सांसें थम-सी गई थीं। जब पायलट ने भांप लिया कि आगे बढ़ना मौत को न्योता देना है, तो उसने तुरंत लाहौर एटीसी से संपर्क कर तूफान से बचने के लिए कुछ मिनट पाकिस्तानी एयरस्पेस इस्तेमाल करने की इजाज़त मांगी।

डीजीसीए (DGCA) की जांच रिपोर्ट में यह बात साफ तौर पर सामने आई कि इंडिगो के पायलट ने मौसम खराब होने का हवाला देकर थोड़ा बाईं ओर मुड़ने की बार-बार गुज़ारिश की, लेकिन पाकिस्तानी अफसरों ने उसकी एक न सुनी और भारतीय विमान को रास्ता देने से दो-टूक इनकार कर दिया।

तूफान को चीरकर बची थी सैकड़ों जानें

पाकिस्तान के इनकार के बाद इंडिगो के पायलटों के पास कोई विकल्प नहीं बचा था। चक्रवात बिल्कुल करीब था, इसलिए उन्हें मजबूरन उसी भयानक तूफान के बीच से विमान को निकालने का कठिन फैसला लेना पड़ा।

जैसे ही प्लेन कड़कती बिजली और बड़े-बड़े ओलों के बीच घुसा, वह हवा में बुरी तरह हिचकोले खाने लगा। ओलों की मार इतनी तेज़ थी कि विमान का अगला हिस्सा यानी 'नोज़ राडोम' हवा में ही टूट गया। यह तो पायलटों की सूझबूझ का ही कमाल था कि उन्होंने सबसे छोटे रास्ते से तूफान को चीरते हुए विमान को श्रीनगर में सुरक्षित उतार लिया और सभी यात्रियों की जान बच गई।

दो देशों की दो अलग सोच

इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि भारत और पाकिस्तान के नज़रिए में ज़मीन-आसमान का फर्क है। 'अतिथि देवो भव' और 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना रखने वाले भारत के लिए आसमान में फंसे बेकसूर मुसाफिरों की जान सरहद और सियासत की लड़ाई से कहीं ऊपर है। चाहता तो भारत साल भर पुरानी घटना का बदला ले सकता था और पाकिस्तानी विमानों को उनके हाल पर छोड़ सकता था, लेकिन उसने इंसानियत को चुना।

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