संगीत जगत की मशहूर गायिका डॉली पार्टन के 80 वर्ष की उम्र में कैंसर से निधन के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की साज़िश की अफ़वाहें फैलने लगी हैं। उनके परिवार की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, डॉली पार्टन का निधन कैंसर से एक छोटी लड़ाई के बाद हुआ। परिवार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मई के महीने में खुद डॉली पार्टन ने जानकारी दी थी कि वे अपने इम्यून सिस्टम और पाचन तंत्र से जुड़े इलाज का सकारात्मक लाभ उठा रही थीं। हालांकि, सोशल मीडिया पर कुछ लोग उनके निधन को वैक्सीन से जोड़ने के अफ़वाह भरे दावे कर रहे हैं।
पारंपरिक संगीत की दिग्गज और वैक्सीन अनुसंधान के लिए दान
सोशल मीडिया पर फैली अफ़वाहों की जड़ें वैश्विक महामारी के दौरान डॉली पार्टन द्वारा किए गए स्वास्थ्य कार्यों से जुड़ी हैं। वर्ष 2020 में उन्होंने मॉडर्ना एमआरएनए कोविड-19 वैक्सीन के अनुसंधान के लिए 10 लाख डॉलर का दान दिया था। इसके अगले साल 2021 में उन्होंने खुद टीका लगवाते हुए एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में उन्होंने अपने प्रसिद्ध गाने 'जोलीन' की पंक्तियों को बदलकर प्रशंसकों से बिना झिझके टीका लगवाने का अनुरोध किया था। इसी वजह से वे वैक्सीन का विरोध करने वाले समूहों के निशाने पर आ गईं।
राजनीतिक टिप्पणीकारों और मीडिया प्रस्तोताओं के दावे
डॉली पार्टन के निधन के बाद कुछ दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों ने सोशल मीडिया पर यह दावा करना शुरू कर दिया कि उनकी मृत्यु का कारण वैक्सीन हो सकती है। रेडियो प्रस्तोता वेन एलन रूट, जिन्होंने हाल ही में अपने शो में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का इंटरव्यू लिया था, ने एक्स पर लिखा कि क्या डॉली पार्टन वैक्सीन की शिकार बनीं। उन्होंने गायिका के टीवी पर टीका लगवाने और गाने में बदलाव का ज़िक्र करते हुए उनके कैंसर से निधन पर सवाल उठाए। इससे पहले रूट ने अपने शो के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मध्यावधि चुनावों के समय राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने का आग्रह किया था, जिस पर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि दुनिया में अजीब चीजें होती रहती हैं।
इसी तरह, ब्राउनस्टोन इंस्टीट्यूट से जुड़े टोबी रोजर्स ने भी सोशल मीडिया पर गायिका के मॉडर्ना वैक्सीन के समर्थन पर टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि वैक्सीन के कारण उनकी जान जा सकती थी। ब्राउनस्टोन इंस्टीट्यूट की स्थापना जेफरी टकर ने की थी, जो स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ केनेडी जूनियर के करीबी सहयोगी माने जाते हैं। यह संस्था कोविड प्रतिबंधों का विरोध करने के लिए जानी जाती है। यद्यपि स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ केनेडी जूनियर ने डॉली पार्टन के निधन पर कोई सीधा बयान नहीं दिया, लेकिन उन्होंने हाल ही में पेंसिलवेनिया में बिना टीका लगवाए दो लोगों की खसरा से हुई मौत के बाद लॉकडाउन नीतियों को जिम्मेदार ठहराया था।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और पॉडकास्ट की प्रतिक्रिया
एक्स पर 2,73,000 फॉलोअर्स वाली स्वास्थ्य इन्फ्लुएंसर वैलेरी एन स्मिथ ने डॉली पार्टन के निधन पर कई पोस्ट शेयर कीं। उन्होंने दावा किया कि टीका लगने के बाद गायिका को ऑटोइम्यून, लिवर और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो गई थीं और उनकी मृत्यु का मुख्य कारण कैंसर बना। दूसरी ओर, 'क्यूआनॉन एनॉनिमस' पॉडकास्ट के सह-मेजबान ट्रैविस व्यू ने बताया कि डॉली पार्टन की व्यापक लोकप्रियता ही उन्हें इंटरनेट पर साज़िश रचने वालों का निशाना बनाती है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन अनुसंधान को बढ़ावा देने और वित्तीय सहायता देने के कारण वे अफ़वाह फैलाने वालों के निशाने पर थीं।
संपादित वीडियो और शैतानी प्रतीकों के भ्रामक दावे
यह अफ़वाहें केवल एक्स तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि फेसबुक पर भी बिना किसी सबूत के कई तरह के दावे किए गए। इनमें से एक प्रमुख दावा उस वीडियो से जुड़ा था जो डॉली पार्टन ने अपने निधन से कुछ हफ्ते पहले बनाया था। उस वीडियो में उन्होंने अपनी साक्षरता संस्था 'इमेजिनेशन लाइब्रेरी' को 20 लाख डॉलर का दान देने के लिए पॉप स्टार टेलर स्विफ्ट और उनके पति व एनएफएल खिलाड़ी ट्रैविस केल्सी का आभार व्यक्त किया था। वीडियो में उन्होंने मज़ाक में दंपति से उनके पहले बच्चे की मांग की थी।
सोशल मीडिया यूज़र्स ने उस वीडियो के एक छोटे से हिस्से को रोककर दावा किया कि डॉली पार्टन हाथ से शैतानी सींग का इशारा कर रही थीं। इस तस्वीर को फेसबुक पर हजारों बार शेयर किया गया। 'रेड पिल यूएसए' नाम के एक अज्ञात एक्स अकाउंट ने इस वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा, "यह एक बड़ा शैतानी क्लब है और आप इसमें शामिल नहीं हैं।" इस पोस्ट को लगभग 10 लाख बार देखा गया। यूट्यूब पर 6,13,000 सब्सक्राइबर्स वाले डेविड नीनो रोड्रिगेज ने अपने शो में दावा किया कि उनके निधन की भविष्यवाणी पहले ही की जा चुकी थी।
इंटरनेट पर अफ़वाहों की संस्कृति पर विशेषज्ञों की राय
साज़िश की अफ़वाहों पर अध्ययन करने वाले लेखक माइक रोथ्सचाइल्ड ने कहा कि यद्यपि यह अफ़वाहें सोशल मीडिया पर फैली हैं, लेकिन जनता के अपार प्यार के सामने यह बहुत छोटा हिस्सा हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉली पार्टन द्वारा वैक्सीन समर्थन और समलैंगिक अधिकारों के पक्ष में खड़े होने के कारण कुछ कट्टर समूह उनसे असंतुष्ट थे। उन्होंने कहा कि इंटरनेट का एक छोटा हिस्सा अब यह मानने लगा है कि बिना किसी साज़िश, मानव तस्करी या शैतानी गतिविधियों के किसी की स्वाभाविक मृत्यु नहीं हो सकती।



















