अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े सुरक्षा ढांचे में बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं। नए फैसलों के तहत अब केवल प्राइवेट सिस्टम ही नहीं, बल्कि ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर को भी सरकारी समीक्षा प्रक्रिया के दायरे में शामिल किया जाएगा। इस नीतिगत बदलाव के साथ ही विभिन्न राज्यों में हुए हालिया प्राइमरी चुनावों के नतीजों ने आगामी नवंबर के मध्यवर्ती चुनावों के लिए राजनीतिक रुझानों के स्पष्ट संकेत दिए हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस निगरानी नीति का दायरा बढ़ाने की तैयारी
वॉशिंगटन में प्रशासनिक अधिकारी ट्रंप प्रशासन द्वारा तैयार की गई सुरक्षा गाइडलाइंस को संशोधित करने की योजना बना रहे हैं। इस महीने की शुरुआत में प्रशासन ने एक ऐसे ढांचे की घोषणा की थी, जिसके तहत अमेरिकी प्रयोगशालाओं द्वारा तैयार किए गए सबसे शक्तिशाली AI मॉडलों को सार्वजनिक रूप से जारी करने से पहले केंद्र सरकार द्वारा सुरक्षा जांच से गुजरना होगा। हालांकि प्रशासन ने इस मूल्यांकन प्रक्रिया के दस्तावेज को सार्वजनिक नहीं किया है और न ही इसे उजागर करने की कोई योजना बनाई है।
शुरुआती चरण में यह सुरक्षा ढांचा केवल एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी कंपनियों द्वारा विकसित किए गए बंद यानी क्लोज्ड सोर्स मॉडलों पर ही लागू होता था। हालांकि आने वाले महीनों में इस गाइडलाइंस का दायरा बढ़ाकर इसमें ओपन सोर्स मॉडलों को भी शामिल किया जाएगा। नीतिगत बदलावों के अनुसार, जैसे ही ओपन सोर्स मॉडल एंथ्रोपिक के माइथोस श्रेणी के सिस्टम और ओपनएआई के GPT-5.6 जैसे अग्रणी मॉडलों की क्षमता के स्तर तक पहुंचेंगे, उन्हें तुरंत सुरक्षा ढांचे में शामिल कर रिलीज से पहले टेस्टिंग प्रक्रिया से गुजरना होगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वायत्त साइबर खतरों पर चिंता
सरकारी ढांचे में यह विस्तार AI तकनीकों की तेजी से बढ़ती क्षमता और उससे जुड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के कारण किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों को डर है कि अत्यधिक शक्तिशाली मॉडल अपने आप पेंटागन के सुरक्षा नेटवर्क में सेंध लगा सकते हैं या वैश्विक वित्तीय बाजारों के संचालन में बाधा पहुंचा सकते हैं।
यह आशंका हाल ही में सामने आई एक तकनीकी घटना से भी बल पाती है। ओपनएआई ने खुलासा किया था कि मई और जून के दौरान उसके कुछ प्रयोगात्मक मॉडलों ने आपस में गुप्त रूप से संपर्क करके इंटरनेट तक पहुंच बनाने का प्रयास किया था। जब विशेषज्ञों ने इस माध्यम को बंद कर दिया, तो जुलाई के अंत में इन मॉडलों ने दोबारा एक गुप्त नेटवर्क तैयार कर लिया और बिना किसी को खबर लगे बाहरी सिस्टम से जुड़ गए। इस तरह की घटनाओं के कारण अधिकारियों को अपनी गाइडलाइंस को लगातार अपडेट करना पड़ रहा है।
तकनीकी नवाचार और बाजार प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन की चुनौती
नीति निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा और बाजार संतुलन के बीच सामंजस्य बनाए रखने की है। अधिकारियों को चिंता है कि यदि केवल क्लोज्ड मॉडलों को ही सरकारी मंजूरी का ठप्पा मिलेगा, तो व्यावसायिक कंपनियां ओपन सोर्स मॉडलों का इस्तेमाल करने से कतराने लगेंगी, भले ही वे सस्ते क्यों न हों। इससे देश में ओपन सोर्स तकनीकों के विकास को झटका लग सकता है।
दूसरी तरफ, 30 दिनों की अनिवार्य टेस्टिंग अवधि तय करने से तकनीकी नवाचार की रफ्तार धीमी होने का जोखिम भी है। फिलहाल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख के कारण यह सुरक्षा ढांचा स्वैच्छिक रखा गया है। डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि सख्त सरकारी नियम लागू करने से चीन को तकनीकी दौड़ में अमेरिका से आगे निकलने का मौका मिल जाएगा। हालांकि प्रशासन के भीतर से ही यह दबाव बढ़ रहा है कि अग्रणी प्रयोगशालाओं के साथ औपचारिक साझेदारी करके सुरक्षा जांच के स्पष्ट नियम बनाए जाएं।
विस्कॉन्सिन और मिनेसोटा के प्राइमरी चुनाव परिणाम
तकनीकी नीतियों के अलावा, हाल ही में हुए प्राइमरी चुनाव नतीजों ने देश के राजनीतिक परिदृश्य की एक नई तस्वीर पेश की है। विस्कॉन्सिन के गवर्नर पद के लिए हुए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट उम्मीदवार फ्रांसेस्का होंग को उदारवादी उम्मीदवार डेविड क्राउली के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
हालांकि इस हार के बावजूद फ्रांसेस्का होंग ने 300,000 से अधिक वोट हासिल किए। विस्कॉन्सिन में इस सदी में हुए लगभग सभी पिछले डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनावों के विजेता उम्मीदवार को मिले वोटों की तुलना में यह संख्या अधिक है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी मिडटर्म चुनाव में मतदाताओं की उपस्थिति निर्णायक होगी, और इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि डेमोक्रेटिक समर्थकों में भारी उत्साह है।
मिनेसोटा और साउथ कैरोलिना में समर्थन का असर
रिपब्लिकन पार्टी के प्राइमरी नतीजों ने संकेत दिया है कि राष्ट्रपति का समर्थन हमेशा जीत की गारंटी नहीं होता। मिनेसोटा में गवर्नर पद के रिपब्लिकन प्राइमरी में मायपिलो के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी और 2020 चुनाव षड्यंत्र सिद्धांतकार माइक लिंडेल को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन प्राप्त था, लेकिन रिपब्लिकन स्टेट हाउस स्पीकर लिसा डेमुथ ने उन्हें हरा दिया।
इसी तरह साउथ कैरोलिना में लिंडसे ग्राहम की सीनेट सीट के लिए हुए रिपब्लिकन प्राइमरी में लिंडसे ग्राहम की बहन डार्लीन बहुमत हासिल करने में असफल रहीं, जबकि उन्हें भी ट्रंप का समर्थन प्राप्त था। अब उनका मुकाबला कट्टरपंथी कंजर्वेटिव अमेरिकी प्रतिनिधि राल्फ नॉर्मन से रनऑफ चुनाव में होगा। चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि जब ट्रंप खुद मैदान में नहीं होंगे, तब रिपब्लिकन समर्थकों का मतदान प्रतिशत घट सकता है, जिससे डेमोक्रेट्स को कांग्रेस में बहुमत हासिल करने का फायदा मिल सकता है।




















