उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। प्रदेश में चुनावी माहौल गरमाने के साथ ही नेताओं की सुरक्षा को अधिक चाक-चौबंद और अभेद्य बनाने के उद्देश्य से सुरक्षा मुख्यालय ने विशेष कदम उठाया है। इस नई व्यवस्था के अंतर्गत राज्य के 44 प्रमुख नेताओं को बुलेटप्रूफ जैकेट प्रदान करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। सुरक्षा घेरे को मजबूत करने के इस प्रयास में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के साथ-साथ विपक्षी दलों के दिग्गजों को भी शामिल किया गया है।
अखिलेश यादव और मायावती समेत 11 मंत्रियों को सुरक्षा कवच
सुरक्षा मुख्यालय द्वारा तैयार की गई विस्तृत सूची के मुताबिक, विपक्षी खेमे के शीर्ष नेताओं में शामिल समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती को बुलेटप्रूफ जैकेट उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा योगी सरकार के 11 मंत्रियों को भी इस सुरक्षा कवच के दायरे में रखा गया है। जिन मंत्रियों को यह बुलेटप्रूफ जैकेट दी जा रही है, उनमें संजय निषाद और नंद गोपाल नंदी जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि केवल मंत्रियों तक ही यह व्यवस्था सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विधायकों और अन्य प्रमुख राजनेताओं को भी इसमें शामिल किया गया है। इस सूची में संगीत सोम और सुरेश राणा जैसे वरिष्ठ नेताओं का नाम भी शामिल है, जिन्हें चुनावी दौरों के दौरान बुलेटप्रूफ सुरक्षा मिलेगी।
10 लाख रुपये की लागत और Y से Z+ श्रेणी के नेताओं को प्राथमिकता
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, राज्य सुरक्षा मुख्यालय ने इन 44 बुलेटप्रूफ जैकेट्स की खरीद पर करीब 10 लाख रुपये की धनराशि खर्च की है। सुरक्षा तंत्र को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए खरीदी गई ये जैकेट्स उन नेताओं को आवंटित की जा रही हैं, जो वर्तमान में Y श्रेणी से लेकर सर्वोच्च Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त कर रहे हैं। राज्य के जिन नेताओं को पहले से ही सुरक्षा कवर मिला हुआ है, उनकी सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए यह अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण प्रदान किया जा रहा है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह से निष्प्रभावी किया जा सके।
आधिकारिक बयान के बिना खुफिया इनपुट के आधार पर एहतियाती कदम
हालांकि, बुलेटप्रूफ जैकेट वितरण के इस फैसले को लेकर योगी सरकार की ओर से कोई औपचारिक या आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद, प्रशासनिक हलकों का मानना है कि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा हाल ही में प्रस्तुत किए गए सुरक्षा आकलन और खुफिया इनपुट्स के आधार पर ही यह एहतियाती निर्णय लिया गया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान बड़े नेताओं की रैलियों, विशाल जनसभाओं, रोड शो और सघन चुनावी दौरों में भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे संवेदनशील समय में शीर्ष राजनेताओं की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक या जोखिम से बचने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने पूर्व-उपाय के रूप में यह अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई है।



















