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आरक्षण का विरोध करने वालों पर चले राजद्रोह का मुकदमा, रामदास आठवले की दो टूकराजनीति
24 अग॰ 2026, 8:06 am (19 दिन पहले)· 3

आरक्षण का विरोध करने वालों पर चले राजद्रोह का मुकदमा, रामदास आठवले की दो टूक

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने आरक्षण खत्म करने की मांग करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि संविधान से मिले अधिकारों पर हमला कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुंबई में केंद्रीय मंत्री एवं रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के प्रमुख रामदास आठवले ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि आरक्षण का विरोध करने वाले या इसे समाप्त करने की मांग उठाने वाले तत्वों के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, देश का संविधान हर नागरिक को आरक्षण का मौलिक अधिकार देता है और इसके खिलाफ उठने वाली हर आवाज सीधे तौर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला है।

आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों और अभियानों पर नाराजगी

रामदास आठवले ने अपने बयान में इस बात पर गहरी चिंता जताई कि देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर समेत कई अन्य जगहों पर आरक्षण के खिलाफ सुनियोजित तरीके से प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि न केवल मैदानी इलाकों में बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी एक अभियान चलाकर आरक्षण को खत्म करने या इसमें बड़े बदलाव करने की मांग की जा रही है, जो सामाजिक सौहार्द के लिए ठीक नहीं है।

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संविधान का विरोध करने वालों पर हो कड़ी कार्रवाई

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि आरक्षण का विरोध करना सीधे तौर पर देश के संविधान का विरोध करने के बराबर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग भी ऐसा आरक्षण-विरोधी रुख अपनाते हैं, वे असल में संविधान-विरोधी ताकतों का हिस्सा हैं और प्रशासन को उनके खिलाफ राजद्रोह के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने देशवासियों को यह भी आश्वस्त किया कि तमाम विरोधों के बावजूद कोई भी ताकत इस व्यवस्था को समाप्त नहीं कर सकती, क्योंकि यह देश के मूल संविधान द्वारा प्रदत्त एक संरक्षित अधिकार है।

सवाल-जवाब

रामदास आठवले ने आरक्षण का विरोध करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की मांग की है?
उन्होंने आरक्षण का विरोध करने वालों के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की है।
रामदास आठवले किस राजनीतिक दल के प्रमुख हैं?
वे 'रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले)' के प्रमुख हैं।
आरक्षण के विरोध में प्रदर्शन कहां आयोजित किए गए थे?
आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शनों में दिल्ली का जंतर-मंतर भी शामिल था।
रामदास आठवले ने आरक्षण को क्या बताया है?
उन्होंने आरक्षण को संविधान द्वारा प्रदत्त एक अधिकार बताया है जिसे समाप्त नहीं किया जा सकता।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

रामदास आठवले का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आरक्षण विरोधी प्रदर्शन और अभियान तेज हो गए हैं। इस तरह के तीखे बयानों से राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ने की पूरी आशंका है, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्यों में जहाँ सामाजिक न्याय और दलित राजनीति का चुनावी समीकरणों पर सीधा असर पड़ता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर वैचारिक और राजनीतिक टकराव और अधिक गहरा सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·18 दिन पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह समझना आवश्यक है कि ऐसे नीतिगत बयानों का सीधा असर वित्तीय बाजारों और कॉरपोरेट क्षेत्र की धारणा पर पड़ता है। जब देश में सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता या तीखे ध्रुवीकरण की आशंका बढ़ती है, तो निवेशक किसी भी नीतिगत बदलाव या अनिश्चितता को लेकर सतर्क हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में चुनावी समीकरणों और सामाजिक न्याय की बहस तेज होने से निवेशकों में विनियामक अनिश्चितता का मनोवैज्ञानिक दबाव बन सकता है, जिससे बाजार की धारणा प्रभावित हो सकती है।

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