मुंबई में केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने हिजाब विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले का समर्थन करते हुए मुस्लिम समाज से न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि हिजाब मुस्लिम समुदाय की महिलाओं और स्कूल जाने वाली छात्राओं की एक पुरानी पारंपरिक प्रथा रही है, लेकिन 21वीं सदी के भारत में सभी नागरिकों और समुदायों को देश के संविधान तथा कानूनी व्यवस्था के अनुसार कार्य करना चाहिए। आठवले ने याद दिलाया कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में अंतिम फैसला सुनाया था, तब मुस्लिम समाज ने बड़प्पन दिखाते हुए उस निर्णय को स्वीकार किया था, और हिजाब मामले में भी वही परिपक्वता दिखाई जानी चाहिए।
संविधान और कानून को सर्वोपरि मानने की अपील
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि धार्मिक रीति-रिवाजों और पारंपरिक मान्यताओं का अपना स्थान हो सकता है, परंतु कोई भी व्यवस्था देश के कानून से ऊपर नहीं हो सकती। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा है कि हिजाब पहनना अनिवार्य नहीं है और यह स्कूल यूनिफॉर्म का हिस्सा नहीं है। अदालत के इस निर्णय के आलोक में उन्होंने कहा कि न्यायिक आदेशों का पालन करना और उनका आदर करना हर नागरिक का नैतिक तथा संवैधानिक दायित्व है।
आठवले ने जोर देकर कहा कि आधुनिक समाज में कानून के नियमों का पालन करना ही देश की प्रगति का आधार है। उन्होंने अदालत के निर्देश का हवाला देते हुए कहा
“मुझे लगता है कि कोर्ट के आदेश का पालन किया जाना चाहिए।”
अयोध्या राम मंदिर फैसले का ऐतिहासिक संदर्भ
आठवले ने अपने वक्तव्य में अयोध्या के दशकों पुराने विवाद का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि राम जन्मभूमि का मामला कई वर्षों से लंबित था और इसका कोई सर्वमान्य समाधान नहीं निकल पा रहा था। उस समय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित भूमि का एक तिहाई हिस्सा मुस्लिम पक्ष को देने का निर्णय सुनाया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट विचार था कि भूमि का 25 प्रतिशत हिस्सा देने से यह कानूनी विवाद हमेशा के लिए बना रहेगा और स्थायी शांति स्थापित नहीं हो सकेगी।
केंद्रीय मंत्री ने इस बात का भी उल्लेख किया कि पुरातत्व विभाग की शुरुआती उत्खनन टीम का हिस्सा रहे एक मुस्लिम अधिकारी ने विवादित ढांचे के नीचे प्राचीन मंदिर के अवशेष होने की बात उजागर की थी। इन वैज्ञानिक और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने पूरी जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। मुस्लिम समुदाय ने देश की शीर्ष अदालत के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया था। आठवले का मानना है कि उसी प्रकार हिजाब से जुड़े हाईकोर्ट के फैसले को भी कानून के दायरे में रहकर स्वीकार किया जाना चाहिए।
मुस्लिम नेतृत्व और सामाजिक समरसता पर विचार
हाईकोर्ट के फैसले पर असदुद्दीन ओवैसी द्वारा व्यक्त की गई प्रतिक्रिया पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुस्लिम समाज को अपना नेतृत्व चुनने और उसे मजबूत करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने माना कि असदुद्दीन ओवैसी अपने समाज के एक प्रमुख नेता के रूप में काम कर रहे हैं, लेकिन वे अकेले नेता नहीं हैं। भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और आठवले की अपनी पार्टी आईपीआई में भी कई निष्ठावान मुस्लिम नेता सक्रिय हैं जो अपने समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आठवले ने कहा कि ओवैसी का मानना है कि मुस्लिम समाज के लिए एक बड़ा केंद्रीय नेता होना चाहिए। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री ने विचार व्यक्त किया कि ऐसा दूरदर्शी नेता सामने आना चाहिए जो देश के सभी मुस्लिमों को एकजुट कर सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय के लोग विभिन्न राजनीतिक दलों का समर्थन करते हैं। अंत में उन्होंने सभी वर्गों से आग्रह किया कि हमें देश में आपसी भाईचारे, शांति और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने के लिए मिलकर आगे बढ़ना चाहिए।



















