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सावरकर की रिहाई की असली वजह क्या थी? राहुल गांधी मानहानि केस में गवाह ने कोर्ट में खोले तथ्यराजनीति
2 जुल॰ 2026, 6:03 pm (116 दिन पहले)· 5

सावरकर की रिहाई की असली वजह क्या थी? राहुल गांधी मानहानि केस में गवाह ने कोर्ट में खोले तथ्य

पुणे कोर्ट में सात्यकि सावरकर ने कहा कि वीडी सावरकर की रिहाई दया याचिकाओं से नहीं, बल्कि जनदबाव और कांग्रेस के 1923 काकीनाडा प्रस्ताव से हुई थी। यह बयान राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि केस की सुनवाई के दौरान दर्ज हुआ।

पुणे की एक अदालत में बुधवार को वीर सावरकर की रिहाई को लेकर एक अहम बयान दर्ज हुआ। सावरकर के भाई के प्रपौत्र सात्यकि सावरकर ने अदालत में कहा कि हिंदुत्व विचारक वीडी सावरकर को ब्रिटिश सरकार ने उनकी दया याचिकाओं की वजह से नहीं, बल्कि बढ़ते जनदबाव के चलते रिहा किया था। यह पूरा मामला नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि केस से जुड़ा है, जो वीडी सावरकर पर की गई उनकी कुछ टिप्पणियों को लेकर दर्ज हुआ था।

सात्यकि सावरकर ने कोर्ट में क्या कहा

सात्यकि सावरकर ने कहा कि 1923 में कांग्रेस के काकीनाडा अधिवेशन में एक प्रस्ताव पारित हुआ था, जिसमें सावरकर की रिहाई की मांग की गई थी, और यह प्रस्ताव भी उनकी रिहाई की एक बड़ी वजह बना। उन्होंने आगे एक तुलना करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी से पहले भी ऐसा ही कोई प्रस्ताव पारित किया होता, तो शायद उनकी फांसी टल सकती थी।

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जिरह के दौरान वकील मिलिंद पवार के सवाल

राहुल गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता मिलिंद पवार ने सात्यकि सावरकर से जिरह की। यह जिरह एमपी/एमएलए विशेष अदालत के न्यायाधीश अमोल शिंदे के सामने हुई। इस दौरान ब्रिटिश सरकार को कथित तौर पर सावरकर द्वारा दी गई दया याचिकाओं के कुछ अंश शिकायतकर्ता सात्यकि सावरकर के सामने रखे गए। इस पर सात्यकि ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि उस याचिका की सामग्री खुद सावरकर ने लिखी थी या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि वे यह दावा नहीं कर सकते कि सावरकर ने अपनी दया याचिका में किसी शर्त पर रिहाई मांगी थी, और न ही यह कि सावरकर ने ब्रिटिश सरकार से इस शर्त पर रिहाई मांगी थी कि वे किसी राजनीतिक या क्रांतिकारी आंदोलन में हिस्सा नहीं लेंगे। हालांकि, उन्होंने खुद ही यह जोड़ा कि सावरकर की रिहाई दया याचिकाओं का नतीजा नहीं थी।

अगली सुनवाई में पेश होगा कांग्रेस का प्रस्ताव

सात्यकि सावरकर ने बताया कि वे अगली सुनवाई में इंडियन नेशनल कांग्रेस के उस प्रस्ताव की एक कॉपी अदालत में जमा करेंगे, जिसमें सावरकर की रिहाई की मांग की गई थी। यह कदम उनके इस दावे को पुख्ता करने के लिए उठाया जा रहा है कि जनदबाव और राजनीतिक मांग ने रिहाई में बड़ी भूमिका निभाई थी।

प्रस्ताव में दर्ज है बीजापुर जेल का जिक्र

उस प्रस्ताव में लिखा है कि मिस्टर सावरकर को इस प्रशासन ने उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी, और उनके भाई को भी यही सज़ा मिली थी। इसमें आगे कहा गया है कि खुद एक कैदी के तौर पर, प्रस्ताव में बात करने वाले व्यक्ति ने बीजापुर जेल के उसी कमरे में समय बिताया था, जहां विनायक दामोदर सावरकर के भाई गणेश सावरकर रहते थे, और गणेश सावरकर को तब तक रिहा किया जा चुका था। प्रस्ताव में इसके बाद लिखा गया है कि विनायक दामोदर सावरकर को अभी तक रिहा नहीं किया गया है, और यही कारण है कि सिर्फ इसी एक कैदी के मामले में सरकार की कार्रवाई की निंदा करने के लिए अपवाद बनाया जा रहा है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि इस व्यक्ति को बहुत बदले की भावना के चलते जेल में रखा जा रहा है, जबकि वह रिहाई का हकदार है। सात्यकि सावरकर की गवाही और यह ऐतिहासिक दस्तावेज़ अब अदालत में इस मानहानि मामले की सुनवाई का अहम हिस्सा बन गए हैं।

सवाल-जवाब

सात्यकि सावरकर कौन हैं?
वे वीडी सावरकर के भाई के प्रपौत्र हैं और राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में शिकायतकर्ता हैं।
यह मामला किससे जुड़ा है?
यह नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ वीडी सावरकर पर की गई टिप्पणियों को लेकर दायर आपराधिक मानहानि केस से जुड़ा है।
सात्यकि सावरकर के मुताबिक वीडी सावरकर की रिहाई किस वजह से हुई थी?
उनके मुताबिक रिहाई बढ़ते जनदबाव और कांग्रेस के 1923 के काकीनाडा अधिवेशन में पारित प्रस्ताव की वजह से हुई थी, न कि दया याचिकाओं की वजह से।
जिरह किसने और कहां की?
राहुल गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता मिलिंद पवार ने एमपी/एमएलए विशेष अदालत के न्यायाधीश अमोल शिंदे के सामने सात्यकि सावरकर से जिरह की।
कांग्रेस का प्रस्ताव कब अदालत में पेश होगा?
सात्यकि सावरकर ने कहा कि वे अगली सुनवाई में इंडियन नेशनल कांग्रेस के उस प्रस्ताव की कॉपी अदालत में जमा करेंगे।
सात्यकि ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस ने उनकी फांसी से पहले भी ऐसा ही प्रस्ताव पारित किया होता, तो उनकी फांसी टल सकती थी।
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