आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से जुड़े मामले की जांच को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। लखनऊ स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने दावा किया कि विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित तत्कालीन विशेष जांच दल यानी एसआईटी की रिपोर्ट का गायब पन्ना नंबर छह अब उनके पास मौजूद है। संजय सिंह ने इस पन्ने को सार्वजनिक करते हुए कहा कि इसमें दर्ज तथ्य पूर्व में की गई एसआईटी जांच की निष्पक्षता और वर्तमान में जारी प्रशासनिक कार्रवाइयों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
छठे पन्ने में दर्ज दावे और अनिल मिश्रा की भूमिका
संजय सिंह ने एसआईटी रिपोर्ट के इस पन्ने का ब्योरा साझा करते हुए कहा कि दस्तावेज में डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका को साफ तौर पर रेखांकित किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. अनिल मिश्रा ने बैंक से जुड़े तय नियमों और शर्तों को शिथिल किया, जिसके कारण मंदिर परिसर में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय गबन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनीं। सांसद का कहना था कि नियमों में दी गई ढील ने ही मंदिर की व्यवस्था में सेंध लगाने का मौका दिया, जिसके लिए सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही जिम्मेदार है।
40 दिनों में 70 बार चोरी और क्लीन चिट पर सवाल
आप सांसद ने रिपोर्ट के हवाले से जानकारी दी कि राम मंदिर में महज 40 दिनों की अवधि के भीतर 70 बार चोरी की घटनाएं अंजाम दी गईं। जांच के दौरान इन मामलों से जुड़ी 81 लाख रुपये की राशि बरामद की गई थी। संजय सिंह ने सवाल उठाया कि जब जांच रिपोर्ट में घटना से जुड़े सभी संबंधित पदाधिकारियों को लापरवाही और व्यवस्थागत खामियों के लिए जिम्मेदार माना गया है, तो फिर चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा को क्लीन चिट कैसे दी जा सकती है? उन्होंने कहा कि यह फैसला जांच के निष्कर्षों के विपरीत दिखाई देता है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और 26 दस्तावेजों का पुलिंदा
संजय सिंह ने ध्यान दिलाया कि 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने जांच प्रक्रिया में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई थी और एसआईटी से मामले की ताजा स्थिति रिपोर्ट तलब की थी। लेकिन उसी दिन मीडिया में यह खबरें प्रसारित कराई जाने लगीं कि आरोपियों को क्लीन चिट दे दी गई है। उन्होंने इसे सर्वोच्च अदालत की निगरानी प्रक्रिया का अनादर करार देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। उन्होंने X पर 20 अगस्त 2026 को अपनी प्रेसवार्ता का वीडियो साझा करते हुए इन बातों को प्रमुखता से उठाया।
अपनी आगे की रणनीति की जानकारी देते हुए संजय सिंह ने बताया कि उन्होंने वर्तमान एसआईटी अध्यक्ष किरन एस. को पत्र भेजकर मुलाकात का समय मांगा है। वह जांच एजेंसी के सामने नए सबूत पेश करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि वह पूर्व में सौंपे गए 13 दस्तावेजों के अलावा 13 नए दस्तावेज भी एसआईटी को सौंपेंगे, जिससे कुल दस्तावेजों की संख्या 26 हो जाएगी। सांसद ने चेतावनी दी कि यदि इन 26 दस्तावेजों के आधार पर पारदर्शी जांच नहीं की गई, तो वह इन सभी कागजातों के साथ सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
ज़मीन सौदे से परे चढ़ावे और आभूषणों की जांच की मांग
संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यह पूरा मामला केवल ज़मीन की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें चंदे, चढ़ावे और आभूषणों की चोरी जैसे गंभीर पहलू भी शामिल हैं। उन्होंने पूर्व के विवादित ज़मीन सौदे का जिक्र करते हुए कहा कि दो करोड़ रुपये की ज़मीन को महज पांच मिनट के भीतर 18.50 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। इस सौदे में चंपत राय के दस्तखत और डॉ. अनिल मिश्रा की गवाही की भूमिका आज भी संदेह के घेरे में है, जिसकी परत-दर-परत जांच होनी बेहद जरूरी है।
शिक्षा व्यवस्था और प्रयागराज जलभराव पर सरकार का घेराव
प्रेस वार्ता के दौरान आप सांसद ने मंदिर मुद्दे के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार को अन्य जनहित के मामलों पर भी घेरा। उन्होंने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर चिंता जताई। इसके साथ ही उन्होंने प्रयागराज में बाढ़ और भारी जलभराव के कारण आम जनता को हो रही दिक्कतों का मुद्दा भी उठाया। संजय सिंह ने मांग की कि राज्य सरकार को बच्चों की पढ़ाई, युवाओं के रोज़गार और आपदा प्रबंधन जैसे बुनियादी विषयों पर अपनी जवाबदेही तय करनी चाहिए।



















