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भारत से क्यों दूरी बना रहे हैं तारिक रहमान, बांग्लादेशी सियासत में हसीना फैक्टर का क्या है खेलराजनीति
18 अग॰ 2026, 4:37 pm (24 दिन पहले)· 3

भारत से क्यों दूरी बना रहे हैं तारिक रहमान, बांग्लादेशी सियासत में हसीना फैक्टर का क्या है खेल

बांग्लादेश की पूर्व उच्चायुक्त वीणा सिकरी ने खुलासा किया है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार शेख हसीना के दिसंबर तक वतन लौटने के ऐलान से डरी हुई है। इसी वजह से ढाका पिछले छह महीने से भारत के निमंत्रण को टाल रहा है और भारत से दूरी बनाए हुए है।

भारत और बांग्लादेश के बीच के कूटनीतिक रिश्तों में इन दिनों एक अजीब सी ठंडक देखी जा रही है, जिसके पीछे बांग्लादेश की सियासत और वहां के मौजूदा समीकरण बड़ा कारण बने हुए हैं। बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीणा सिकरी ने एक बड़ा बयान देते हुए साफ किया है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान का प्रशासन शेख हसीना के दिसंबर तक देश में वापसी के ऐलान के बाद से काफी डरा हुआ है। उनके मुताबिक, जमीनी स्तर पर अवामी लीग की लगातार बढ़ती लोकप्रियता ही वह मुख्य वजह है जिसके चलते ढाका लगातार भारत से एक सुरक्षित दूरी बना रहा है और बीते छह महीनों से भारत की तरफ से मिले आधिकारिक निमंत्रण का कोई जवाब नहीं दे रहा है।

पूर्व राजनयिक ने इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से रोशनी डालते हुए बताया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भारत की यात्रा पर आने का औपचारिक निमंत्रण ठीक छह महीने पहले फरवरी 2026 में ही भेज दिया गया था। यह न्योता तब दिया गया था जब उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के तौर पर अपने पद की शपथ ली थी। वीणा सिकरी का यह भी कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह भारत सरकार की तरफ से उन्हें उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद मिला हुआ सबसे पहला न्योता था, लेकिन इसके बावजूद भारतीय पक्ष पिछले छह महीनों से उनके किसी भी प्रकार के आधिकारिक जवाब का इंतजार ही कर रहा है। इसके अलावा, कुछ हफ्ते पहले ही भारत की तरफ से उन्हें बिम्सेटक के चेयरमैन की हैसियत से ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए एक बार फिर से दूसरा निमंत्रण भी भेजा गया था।

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पूर्व उच्चायुक्त ने तारिक रहमान के पिछले रवैया और मौजूदा राजनीतिक रुख के बीच के विरोधाभास को भी बहुत करीब से उजागर किया है। उन्होंने याद दिलाया कि मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान जब अवामी लीग पार्टी पर प्रतिबंध लगाने की बातें उठी थीं, तब खुद तारिक रहमान ने सार्वजनिक रूप से यह बयान दिया था कि वह किसी भी राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाए जाने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं। उनका तब यह तर्क था कि हर पार्टी पूरी तरह से सक्रिय रहनी चाहिए और अगर देश के आम नागरिकों को वह पार्टी पसंद नहीं आएगी, तो वे चुनावों में उसे वोट नहीं देंगे। उन्होंने यह भी याद किया कि जब तारिक रहमान खुद लंदन में निर्वासन की जिंदगी जी रहे थे, तब वह अक्सर अपनी राजनीतिक रैलियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया करते थे और उस दौरान वह मौजूदा सरकार के खिलाफ हर मुमकिन तीखी टिप्पणी करते थे। उस दौर में भी शेख हसीना की सरकार ने कभी उनके भाषणों या उनकी गतिविधियों पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगाया था।

वीणा सिकरी ने आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि जैसी ही तारिक रहमान ने देश की सत्ता संभाली और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे, वैसे ही उनके तेवर और प्रशासनिक कार्रवाइयां पूरी तरह बदल गईं। अब वह अपनी भारत यात्रा को टालने के लिए बार-बार शेख हसीना को एक बहाने के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। कूटनीतिक हलकों में पहले इस बात की जोरदार चर्चाएं चल रही थीं कि संभवतः 20 से 22 अगस्त के आसपास तारिक रहमान भारत के दौरे पर आ सकते हैं। हालांकि, अचानक से 5 अगस्त को शेख हसीना की तरफ से की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद से इस पूरे मामले को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।

विशेषज्ञों और पूर्व राजनयिक के अनुसार, किसी भी देश से किसी व्यक्ति का प्रत्यर्पण पूरी तरह से एक लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रिया का मामला होता है, जिसमें काफी लंबा वक्त लगता है। लेकिन इसके बावजूद बांग्लादेश की मौजूदा हुकूमत इस बात से बुरी तरह घबराई हुई है क्योंकि शेख हसीना ने खुद सार्वजनिक रूप से यह ऐलान कर दिया है कि वह इस साल दिसंबर तक अपने वतन वापस लौट जाएंगी। इसी संभावित वापसी ने रहमान सरकार की नींद उड़ा रखी है और वे अंदर से पूरी तरह सहम गए हैं। उन्हें इस बात का गहरा डर सता रहा है कि अवामी लीग का कैडर बेस आज भी मजबूत है और आम जनता के बीच उनकी लोकप्रियता हर गुजरते दिन के साथ तेजी से बढ़ती ही जा रही है, जो मौजूदा हुकूमत के लिए भविष्य में एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

सवाल-जवाब

तारिक रहमान को भारत आने का निमंत्रण कब दिया गया था?
तारिक रहमान को प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद फरवरी 2026 में भारत आने का पहला निमंत्रण दिया गया था।
बांग्लादेश की सरकार भारत के न्योते का जवाब क्यों नहीं दे रही है?
शेख हसीना के दिसंबर तक देश लौटने के ऐलान और अवामी लीग की बढ़ती लोकप्रियता के कारण रहमान सरकार डरी हुई है और भारत से दूरी बना रही है।
वीणा सिकरी कौन हैं?
वीणा सिकरी बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त हैं जिन्होंने दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों पर यह बयान दिया है।
शेख हसीना ने वतन वापसी को लेकर क्या ऐलान किया है?
शेख हसीना ने ऐलान किया है कि वह इस साल दिसंबर तक अपने देश वापस लौट जाएंगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Vikram Yadav@vikram-yadav·24 दिन पहले

बांग्लादेश में नेतृत्व परिवर्तन के बाद भी कूटनीतिक गतिरोध और पूर्व प्रधानमंत्री की संभावित वापसी का असर द्विपक्षीय संबंधों पर साफ़ दिख रहा है। पिछले छह महीनों से उच्च-स्तरीय यात्राओं का टलना यह बताता है कि ढाका घरेलू राजनीतिक असुरक्षा और अवामी लीग के बढ़ते जनाधार के बीच कशिश और खिंचाव के दौर से गुजर रहा है। यदि यह ठंडक बनी रही, तो क्षेत्रीय कूटनीति और व्यापारिक समझौतों पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है, जिससे दोनों देशों के रणनीतिक समीकरण प्रभावित होने की पूरी संभावना है।

Priya Sharma@priya-sharma·24 दिन पहले

विक्रम के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह स्पष्ट है कि कूटनीतिक गतिरोध का असर केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव दोनों देशों के सामाजिक-सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जन-सरोकार से जुड़े रिश्तों पर पड़ेगा। जब राजधानियों के स्तर पर संवादहीनता बढ़ती है, तो सीमावर्ती क्षेत्रों के सांस्कृतिक उत्सव, कलात्मक सहयोग और लोगों के बीच आपसी मेल-मिलाप की सहज प्रक्रिया बाधित होने लगती है। आधुनिक समय में किसी भी राष्ट्र की प्रगति और क्षेत्रीय शांति के लिए यह जरूरी है कि कूटनीति के साथ-साथ सांस्कृतिक और मानवीय संवाद भी खुला रहे, अन्यथा यह दूरी दोनों समाजों के बीच अविश्वास की खाई को और चौड़ा कर सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 दिन पहले

यह कूटनीतिक और रणनीतिक गतिरोध द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है। पूर्व उच्चायुक्त वीणा सिकरी के खुलासे से स्पष्ट है कि आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता और शेख हसीना की संभावित वापसी का डर ढाका की विदेश नीति को प्रभावित कर रहा है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो इसका असर दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा, व्यापारिक समझौतों और आतंकवाद विरोधी सहयोग पर पड़ सकता है, जिससे दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में नए समीकरण पैदा होने की आशंका है।

Rohan Verma@rohan-verma·24 दिन पहले

यह घटनाक्रम भारत-बांग्लादेश कूटनीति में एक संवेदनशील मोड़ है। वीणा सिकरी के खुलासे बताते हैं कि ढाका घरेलू राजनीतिक असुरक्षा के कारण उच्चस्तरीय संवाद टाल रहा है। अवामी लीग की ज़मीनी पकड़ और शेख हसीना की संभावित वापसी का यह डर द्विपक्षीय वार्ताओं और क्षेत्रीय स्थिरता को अनिश्चितता में धकेल रहा है।

Ravikash Gupta@ravikash·24 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह रणनीतिक हिचकिचाहट केवल कूटनीतिक ठहराव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर क्षेत्रीय व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और सीमावर्ती आर्थिक स्थिरता पर पड़ रहा है। जब ढाका घरेलू राजनीतिक अस्थिरता और अवामी लीग के प्रभाव के डर से द्विपक्षीय बैठकों और उच्चस्तरीय मंचों से दूरी बनाता है, तो भारत-बांग्लादेश के बीच लंबित आर्थिक समझौतों, ऊर्जा गलियारों और सीमा पार निवेश प्रवाह पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है। यदि यह गतिरोध जारी रहा, तो दोनों देशों के बीच डिजिटल और वित्तीय एकीकरण की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।

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