राजस्थान की वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में नगर निकाय चुनाव का ऐलान होते ही चुनावी माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। भीलवाड़ा नगर निगम बनने के बाद यह पहला मौका है जब शहर की बागडोर किसी महिला मेयर के हाथों में होगी। कुल 70 वार्डों में फैले 2,96,654 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करके इस नए नगर निगम के प्रशासनिक नेतृत्व का फैसला करेंगे।
भीलवाड़ा का 54 साल का सफर और राजनीतिक समीकरण
भीलवाड़ा में स्थानीय निकाय का गठन साल 1970 में नगर परिषद के तौर पर हुआ था। बीते 54 वर्षों के दौरान शहर का दायरा बढ़ा और अब इसे 70 वार्डों वाले नगर निगम का दर्जा दिया जा चुका है। भीलवाड़ा में अब तक हुए 7 निकाय चुनावों के इतिहास पर नजर डालें तो राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बराबरी की रही है। इन 7 चुनावों में 4 बार भाजपा और 3 बार कांग्रेस का बोर्ड बना है। हालांकि, इस बार नगर निगम का शीर्ष मेयर पद महिलाओं के लिए आरक्षित होने के कारण चुनावी समीकरण बदल गए हैं। शहर के लोगों के बीच नए नेतृत्व और भीलवाड़ा के विकास को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
जमीनी समस्याएं, महिला सुरक्षा और जनसुविधाएं
शहर की महिला मतदाताओं ने नए प्रशासनिक प्रमुख से जुड़ी अपनी उम्मीदें खुलकर सामने रखी हैं। स्थानीय निवासी माया देवी, अनुराधा झा, रेखा मीणा और आशा सेन का मानना है कि पहली महिला मेयर ऐसी होनी चाहिए जो हर वार्ड और मोहल्ले के जमीनी हालात से पूरी तरह वाकिफ हो। महिलाओं ने शहर में लगातार बढ़ते अतिक्रमण, टूटी सड़कों, सीवरेज की नाकामी, पीने के पानी की किल्लत और जल निकासी के खराब इंतजामों को बेहद गंभीर मुद्दा बताया है। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा के कड़े प्रबंध करने, पर्याप्त महिला शौचालयों का निर्माण कराने, कचरा प्रबंधन को व्यवस्थित करने, सड़कों पर घूमते आवारा पशुओं से राहत दिलाने और पार्कों के रखरखाव की मांग उठाई गई है। नागरिकों की मुख्य चाहत यही है कि मेयर हर आम इंसान की पहुंच में रहे और जनसमस्याओं का तेजी से समाधान करे।
ओवरब्रिज इलाके की मांगें और बुनियादी ढांचा
दूसरी तरफ, शहरवासी राज कुमार पायक, अजय खोईवाल, लोकेश, गौतम और गोपाल शर्मा ने कहा कि निगम का दर्जा मिलने के बावजूद कई इलाकों की हालत गांवों से भी बदतर बनी हुई है। नागरिकों ने बताया कि मुख्य रेलवे लाइन के दूसरी पार ओवरब्रिज इलाके में रहने वाली विशाल आबादी को आने-जाने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी और पुलिया की सख्त जरूरत है। इसके अलावा, रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम, अव्यवस्थित पार्किंग और बारिश के समय होने वाले जलभराव की समस्या का पक्का समाधान करने की मांग की गई है ताकि कपड़ा नगरी भीलवाड़ा को एक व्यवस्थित और आधुनिक शहर के रूप में विकसित किया जा सके।
वार्डों का गणित और मतदाताओं के आंकड़े
भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में इस दफा कुल 2,96,654 मतदाता अपने वोट से भावी नेतृत्व चुनेंगे। कुल मतदाताओं में 1,51,012 पुरुष, 1,45,632 महिला और 10 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। शहर के कुल 70 वार्डों में से 14 वार्ड ऐसे हैं जहां 5,000 से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं, जबकि बाकी 56 वार्ड 5,000 से कम मतदाताओं वाले हैं। चुनावी बिगुल बजने के बाद भीलवाड़ा की जनता एक ऐसे सरल और दूरदर्शी नेता को चुनने के मूड में है जो बिना किसी प्रशासनिक प्रोटोकॉल के हर नागरिक की शिकायतें सुन सके।



















