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अटरू निकाय चुनाव: राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे-बहू का वोटर आवेदन खारिज, एसडीएम ने अंगूठे के निशान और पते पर उठाये सवालराजनीति
27 अग॰ 2026, 11:43 am (1 घंटे पहले)· 3

अटरू निकाय चुनाव: राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे-बहू का वोटर आवेदन खारिज, एसडीएम ने अंगूठे के निशान और पते पर उठाये सवाल

राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर और बहू हेमलता का अटरू में मतदाता सूची में नाम जोड़ने का आवेदन एसडीएम अंजना सहरावत ने खारिज कर दिया है। शिक्षित होने के बावजूद आवेदन पर अंगूठे का निशान लगाने और 6 महीने की निवास शर्त पूरी न करने पर यह कार्रवाई की गई।

राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के परिवार से जुड़ा एक विवाद बारां जिले की अटरू नगरपालिका में गरमा गया है। मंत्री के बेटे पवन दिलावर और उनकी पत्नी हेमलता द्वारा अटरू के वार्ड संख्या 21 की मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए दिए गए आवेदनों को प्रशासनिक जांच के बाद निरस्त कर दिया गया है। उपखंड अधिकारी (एसडीएम) अंजना सहरावत ने जमीनी सत्यापन कराने के बाद यह फैसला सुनाया, जिससे आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

अंगूठे के निशान ने खड़े किए सवाल

प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब पवन दिलावर और उनकी पत्नी हेमलता ने अटरू नगरपालिका के वार्ड 21 में अपने नाम नए मतदाता के रूप में दर्ज कराने के लिए आवेदन दाखिल किया। हालांकि, दोनों आवेदक शिक्षित होने के बावजूद आवेदन पत्र पर हस्ताक्षर करने के स्थान पर अंगूठे का निशान लगा रखा था। शुरुआती स्तर पर बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ने आवेदनों की सिफारिश करते हुए उन्हें आगे बढ़ा दिया था। लेकिन जब ये दस्तावेज उच्च स्तरीय जांच समिति के पास पहुंचे, तो अधिकारियों को संदेह हुआ कि पढ़े-लिखे नागरिक होने के बाद भी अंगूठे का उपयोग क्यों किया गया। इसी शंका के आधार पर मामले की गहराई से जांच करने के निर्देश दिए गए।

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निवास प्रमाण पत्र न मिलने पर कार्रवाई

संदेह गहराने पर एसडीएम अंजना सहरावत ने पूरे प्रकरण का मौके पर जाकर निष्पक्ष सत्यापन कराने के आदेश दिए। चुनाव नियमों के अनुसार, किसी भी क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए संबंधित व्यक्ति का वहां कम से कम छह महीने से लगातार निवास करना अनिवार्य होता है। प्रशासनिक टीम द्वारा की गई जमीनी जांच में पवन दिलावर और उनकी पत्नी के वार्ड 21 में रहने का कोई ठोस या प्रामाणिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका। निवास की शर्त पूरी न होने के कारण एसडीएम ने नियमानुसार दोनों आवेदनों को निरस्त कर दिया।

चेयरमैन पद के लिए चुनावी बिसात

अटरू में मतदाता बनने की इस कवायद के पीछे गहरा राजनीतिक गणित छिपा हुआ माना जा रहा है। हालिया आरक्षण प्रक्रिया में अटरू नगरपालिका के चेयरमैन का पद अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के लिए आरक्षित घोषित किया गया है। पवन दिलावर अटरू से पार्षद का चुनाव जीतकर चेयरमैन की दौड़ में शामिल होने की योजना बना रहे थे। इसके अलावा, भाजपा के टिकट के लिए भी परिवार के भीतर प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। पवन दिलावर और उनके चाचा यानी शिक्षा मंत्री के भाई कृष्ण मुरारी दिलावर, दोनों ने अटरू के वार्ड संख्या 5 से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने के लिए अपनी दावेदारी पेश की है।

कोटा में डेरा और राजनीतिक बैकग्राउंड

स्थानीय निकाय चुनावों के महत्व को देखते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पिछले एक सप्ताह से राजधानी जयपुर छोड़कर कोटा जिले में कैंप किए हुए हैं। मदन दिलावर वर्तमान में कोटा जिले की रामगंजमंडी विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं, लेकिन उनका इस क्षेत्र से पुराना नाता रहा है क्योंकि वे पूर्व में अटरू विधानसभा क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अपने बेटे को अटरू नगरपालिका का चेयरमैन बनाने की उनकी रणनीतिक कोशिशों को मतदाता आवेदन खारिज होने से बड़ा झटका लगा है। हालांकि, विधिक प्रावधानों के तहत आवेदकों के पास एसडीएम के इस निरस्तीकरण आदेश के खिलाफ बारां के जिला कलेक्टर के समक्ष अपील दायर करने का विकल्प खुला हुआ है।

विपक्ष को मिला नया सियासी मुद्दा

चुनावी माहौल के बीच इस पूरे प्रकरण ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। विपक्षी दल कांग्रेस इस मुद्दे को भुनाने की तैयारी कर रही है और मंत्री के परिवार पर चुनावी नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगा सकती है। राजस्थान में सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल व्यवस्था और समय-समय पर दिए गए अपने बेबाक बयानों को लेकर मदन दिलावर पहले से ही विपक्ष के निशाने पर बने हुए हैं। ऐसे में बेटे और बहू के वोटर कार्ड आवेदन खारिज होने का मामला आगामी निकाय चुनावों में सत्तापक्ष के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।

सवाल-जवाब

अटरू में पवन दिलावर और हेमलता का वोटर आवेदन क्यों खारिज हुआ?
शिक्षित होने के बावजूद अंगूठा लगाने पर संदेह हुआ और जांच में वार्ड 21 में 6 महीने से रहने का कोई प्रमाण नहीं मिला।
किस अधिकारी ने जांच के बाद यह आवेदन निरस्त किया?
अटरू की उपखंड अधिकारी (एसडीएम) अंजना सहरावत ने जमीनी जांच कराकर आवेदनों को खारिज कर दिया।
पवन दिलावर किस पद के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं?
वह अटरू से पार्षद चुनाव जीतकर एससी के लिए आरक्षित चेयरमैन पद की रेस में शामिल होना चाहते थे।
एसडीएम के फैसले के खिलाफ क्या कानूनी रास्ता उपलब्ध है?
आवेदक एसडीएम के इस निरस्तीकरण आदेश के खिलाफ बारां जिला कलेक्टर के समक्ष अपील दायर कर सकते हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Ravikash Gupta@ravikash·31 मिनट पहले

अटरू निकाय चुनाव में मदन दिलावर के परिवार के आवेदन खारिज होने से स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। शिक्षा मंत्री के बेटे और भाई के बीच संभावित टिकट संघर्ष और चेयरमैन पद की रेस ने पार्टी की आंतरिक कलי को सतह पर ला दिया है। प्रशासनिक सख्ती ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय निकाय चुनावों में भी नियमों का पालन कितना संवेदनशील होता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस पारिवारिक और राजनीतिक खींचतान से कैसे निपटती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·31 मिनट पहले

यह प्रशासनिक कार्रवाई चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत कानूनी और प्रक्रियात्मक अनुपालन की अनिवार्यता को उजागर करती है। एक ओर जहां शिक्षित आवेदकों द्वारा अंगूठे का निशान लगाना और छह महीने की निवास शर्त पूरी न होना प्रशासनिक जांच के दायरे में आया है, वहीं यह मामला स्थानीय निकाय चुनावों में पारदर्शिता और कानून के समक्ष समानता के संदेश को मजबूत करता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रभावित पक्ष इस कानूनी और प्रशासनिक बाधा को पार करने के लिए क्या रुख अपनाता है।

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