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बिहार में एनकाउंटर बनाम कानून का राज: सम्राट चौधरी की कार्यशैली और नीतीश कुमार के मॉडल पर छिड़ी बहसराजनीति
2 घंटे पहले· 2

बिहार में एनकाउंटर बनाम कानून का राज: सम्राट चौधरी की कार्यशैली और नीतीश कुमार के मॉडल पर छिड़ी बहस

भोजपुर में भरत भूषण तिवारी की एनकाउंटर में मौत के बाद बिहार की राजनीति में उबाल है। सम्राट चौधरी की सख्त नीति और पूर्व में नीतीश कुमार द्वारा अपनाए गए कानूनी प्रक्रिया के मॉडल की तुलना ने नई चर्चा को जन्म दिया है।

Vikram YadavVikram YadavBihar Correspondent 4 मिनट पढ़ें AI के लिए
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बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने इस समय एक बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। भोजपुर जिले के बिलौटी में भरत भूषण तिवारी की पुलिस एनकाउंटर में हुई मौत ने सरकार के दावों और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सम्राट चौधरी ने पद संभालते ही पुलिस को अपराधियों के प्रति सख्त रुख अपनाने का निर्देश दिया था और यहां तक कह दिया था कि अपराधियों का पिंडदान कर देना चाहिए। उनका आशय था कि पुलिस को अपराधियों से निपटने में कोई संकोच नहीं करना चाहिए, भले ही इसके लिए जान भी लेनी पड़े। लेकिन बिलौटी की इस घटना ने उनके इसी उत्साह और सख्त नीति को सवालों के घेरे में डाल दिया है।

महापंचायत और बढ़ता हुआ आक्रोश

भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद स्थानीय निवासियों और समर्थकों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। बिलौटी में आयोजित महापंचायत में न केवल पुलिस प्रशासन की कड़ी आलोचना हुई, बल्कि सम्राट चौधरी को भी तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। इस आयोजन में विभिन्न राज्यों से लोग पहुंचे और उन्होंने भरत भूषण को भगत सिंह जैसा सम्मान देते हुए उन्हें शहीद का दर्जा देने की मांग की। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने उनकी प्रतिमा स्थापित करने और स्मारक बनाने की भी आवाज उठाई है। इस माहौल के बीच बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय का एनकाउंटर को गलत बताना इस पूरे मामले को और भी गंभीर बना देता है। इसके अलावा, एक व्यक्ति जिसने खुद को भरत भूषण का भाई बताया था, उसने पुलिस की नौकरी छोड़ने का एलान किया और सरकार को सात दिनों के भीतर न्याय देने की चेतावनी दी, हालांकि परिवार ने उसके दावों का खंडन किया है।

राजनीतिक दबाव और सम्राट चौधरी की प्रतिक्रिया

विपक्ष पहले से ही एनकाउंटर की नीति को लेकर सरकार को घेर रहा था। तेजस्वी यादव ने तो सार्वजनिक रूप से यह आरोप लगाया था कि सम्राट चौधरी के निर्देश पर पुलिस जाति के आधार पर अपराधियों को निशाना बना रही है और यादव समुदाय को खास तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है। अब भरत भूषण तिवारी के मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है क्योंकि वे ब्राह्मण समाज से आते हैं, जिसे भारतीय जनता पार्टी का कोर वोटर माना जाता है। ब्राह्मण समाज अब सम्राट चौधरी से सीएम की कुर्सी छोड़ने की मांग करने लगा है। इस भारी राजनीतिक और सामाजिक दबाव को देखते हुए सम्राट चौधरी को रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ा है। उन्होंने इस मामले की जांच के लिए उच्च न्यायालय के एक अवकाश प्राप्त न्यायाधीश को नियुक्त करने का आदेश दिया है और भरत भूषण के परिजनों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की भी घोषणा की है।

नीतीश कुमार का मॉडल बनाम एनकाउंटर

बिहार में अपराध नियंत्रण को लेकर अब लोग 2005 के बाद के नीतीश कुमार के कार्यकाल को याद कर रहे हैं। नीतीश कुमार ने अपने पहले कार्यकाल में अपराध रोकने के लिए एनकाउंटर का सहारा नहीं लिया था, बल्कि कानून की प्रक्रिया को मजबूत किया था। उन्होंने दो मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया। पहला, पुलिस को अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए पूरी छूट दी, जिससे पहले की राजद सरकार में पुलिस जो संकोच करती थी, वह खत्म हो गया। दूसरा, उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया ताकि मुकदमों का स्पीडी ट्रायल हो सके। इससे अपराधियों को सजा मिली और उनकी जमानत की प्रक्रिया कठिन हो गई, जिससे जंगल राज का अंत हुआ।

कानूनी प्रक्रिया की ऐतिहासिक सफलता

नीतीश कुमार के शासनकाल में जनवरी 2006 से अगस्त 2010 के बीच 52343 अपराधियों को दोषी ठहराया गया और उन्हें सजा मिली। इसमें अपहरण और हत्या जैसे गंभीर मामलों के अपराधी भी शामिल थे। इस दौरान आपराधिक छवि वाले ताकतवर नेताओं पर भी कानूनी चाबुक चला। सीवान के सांसद शहाबुद्दीन को छोटे लाल गुप्ता हत्याकांड में, पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को अजीत सरकार मर्डर केस में, और आनंद मोहन सिंह को जी कृष्णैया हत्याकांड में जेल की हवा खानी पड़ी। इनके अलावा मुन्ना शुक्ला, सूरजभान सिंह, सुनील पांडेय और अशोक महतो जैसे दर्जनों बाहुबलियों को कानून के दायरे में लाकर जेल भेजा गया। उस समय एनकाउंटर की आवश्यकता ही नहीं पड़ी, क्योंकि अदालतें अपना काम कर रही थीं। यही कारण है कि आज जनता एनकाउंटर की राजनीति के बजाय नीतीश कुमार के उस न्यायपूर्ण और कानूनी मॉडल को बेहतर मान रही है।

इसका आप पर असर

भारत में: यह घटना संकेत देती है कि एनकाउंटर आधारित अपराध नियंत्रण नीतियों के प्रति आम जनता का नजरिया बदल रहा है, जिससे भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों पर अधिक न्यायिक निगरानी बढ़ सकती है।

बिहार में: भोजपुर क्षेत्र में तनाव और राजनीतिक अनिश्चितता के कारण स्थानीय लोगों को विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा और आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

सवाल-जवाब

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला क्या है?
यह भोजपुर के बिलौटी में पुलिस द्वारा भरत भूषण तिवारी की एनकाउंटर में मौत का मामला है, जिसने व्यापक विरोध को जन्म दिया है।
सम्राट चौधरी पर क्या आरोप लग रहे हैं?
सम्राट चौधरी पर आरोप है कि उनकी सख्त नीति के कारण पुलिस मनमाने ढंग से एनकाउंटर कर रही है और वे इसमें भेदभाव कर रहे हैं।
नीतीश कुमार का मॉडल एनकाउंटर से कैसे अलग था?
नीतीश कुमार ने एनकाउंटर के बजाय फास्ट ट्रैक कोर्ट और कानून की सख्त प्रक्रिया का सहारा लिया था, जिससे अपराधियों को कानूनी सजा मिली।
सरकार ने अब क्या कदम उठाया है?
सरकार ने मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश को नियुक्त किया है और भरत भूषण के परिजनों पर दर्ज केस वापस लेने का आदेश दिया है।
#राजनीति#बिहार#सम्राटचौधरी#एनकाउंटर#नीतीशकुमार#भोजपुर#अपराध

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