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बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की दरार चौड़ी, 7 बार के विधायक मानस रंजन भुंइया ने थामा इस्तीफा, ममता बनर्जी की चुनौतियां बढ़ींराजनीति
13 जून 2026, 11:41 pm (47 दिन पहले)· 0

बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की दरार चौड़ी, 7 बार के विधायक मानस रंजन भुंइया ने थामा इस्तीफा, ममता बनर्जी की चुनौतियां बढ़ीं

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। पूर्व मंत्री और 7 बार के विधायक मानस रंजन भुंइया ने पार्टी और सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद तृणमूल कांग्रेस के अंदर की दरारें अब खुलकर दिखने लगी हैं। ताजा झटके के तौर पर ममता सरकार में मंत्री रह चुके वरिष्ठ नेता मानस रंजन भुंइया ने पार्टी से नाता तोड़ लिया है। उन्होंने शनिवार को पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी के नाम एक पत्र भेजा, जिसमें अपने सभी संगठनात्मक पदों के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा देने का ऐलान किया। भुंइया ने खुद यह पुष्टि की कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अपने रिश्ते पूरी तरह समाप्त करने का फैसला कर लिया है।

कांग्रेस से तृणमूल तक का लंबा राजनीतिक सफर

पश्चिम मेदिनीपुर जिले की सबांग विधानसभा सीट भुंइया की राजनीति का केंद्र रही है। यहां से वह कुल 7 बार विधायक चुने जा चुके हैं और लंबे अरसे तक कांग्रेस के कद्दावर चेहरों में उनकी गिनती होती थी। सबांग सीट पर उन्होंने 6 मौकों पर कांग्रेस के टिकट से जीत हासिल की। वर्ष 2016 में उन्होंने कांग्रेस से किनारा कर लिया और तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

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इस्तीफे की असल वजह पर साधी चुप्पी

पार्टी छोड़ने के पीछे की वजहें उन्होंने स्पष्ट रूप से नहीं बताईं। हालांकि अपने इरादों की झलक देते हुए उन्होंने कहा, 'एक राजनेता अपनी आखिरी सांस तक राजनेता ही रहता है। मैं अपनी अंतिम सांस तक सबांग और पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए काम करता रहूंगा।' जब उनसे पूछा गया कि क्या वह BJP का दामन थामने की सोच रहे हैं, तो उन्होंने इस पर सीधा जवाब टालते हुए कहा, 'मैंने अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं किया है। आगे चलकर निर्णय लूंगा।'

चुनावी मैदान में मिले लगातार झटके

बीते कुछ चुनावों में भुंइया के लिए नतीजे निराशाजनक रहे हैं। वर्ष 2021 में उन्होंने सबांग सीट पर टीएमसी के टिकट से जीत दर्ज की थी, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस बार BJP प्रत्याशी अमल कुमार पांडा ने उन्हें 11 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से शिकस्त दी। इससे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में भी वह मेदिनीपुर सीट से ताल ठोक चुके थे, जहां BJP के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के हाथों उन्हें पराजय झेलनी पड़ी थी।

राज्यसभा सांसद से लेकर मंत्री तक की भूमिकाएं

अपने राजनीतिक जीवन में भुंइया ने कई अहम पद संभाले हैं। वह 2021 तक टीएमसी की ओर से राज्यसभा सांसद रहे। इसके बाद ममता बनर्जी की सरकार में उन्हें कई महत्वपूर्ण विभागों की कमान सौंपी गई, जिनमें सिंचाई एवं जलमार्ग, लघु एवं सूक्ष्म उद्योग तथा वस्त्र विभाग शामिल थे।

ममता के करीबी सुदीप बंद्योपाध्याय भी बागी खेमे के साथ

दूसरी ओर, संसद में लंबे समय तक ममता बनर्जी के भरोसेमंद सहयोगी रहे वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय भी अब बागी गुट के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। बागी सांसदों का यह समूह सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की तैयारी में है, ताकि संसद में खुद को 'असली तृणमूल कांग्रेस' के रूप में मान्यता दिलाने की मांग रखी जा सके। शनिवार को सुदीप बंद्योपाध्याय ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और बागी TMC सांसद शताब्दी रॉय के साथ बैठक की। इसके साथ ही उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से भी भेंट की।

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