केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और मुख्य विपक्षी दल पर तीखे प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि चुनावी शिकस्त मिलने के बाद जनादेश को खारिज करना पार्टी की पुरानी फितरत बन चुका है। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और मतदान प्रक्रिया को लेकर विपक्षी खेमे की तरफ से उठाए जा रहे सवालों पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी चुनावी नतीजे कांग्रेस के खिलाफ जाते हैं, पार्टी संवैधानिक संस्थाओं पर ठीकरा फोड़ने लगती है।
जीत पर आयोग सही, हार पर गलत: तीन राज्यों का दिया हवाला
शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के दोहरे मानदंड पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी जब कहीं विजय हासिल करती है तब उसे चुनाव आयोग की निष्पक्षता में कोई खोट नजर नहीं आता। उन्होंने पूछा कि अगर देश की चुनावी व्यवस्था में ही कोई गड़बड़ी है, तो कांग्रेस कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में सरकार बनाने में कैसे सफल रही? केंद्रीय मंत्री के अनुसार, जीत का सेहरा खुद बांधना और पराजय मिलते ही आयोग को कटघरे में खड़ा करना विपक्ष के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को उजागर करता है।
बैलेट पेपर की मांग पर घेरा, तकनीकी सुधारों का किया बचाव
मतपत्रों के जरिए चुनाव कराने की विपक्ष की लगातार उठ रही मांग को आड़े हाथों लेते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कांग्रेस देश की चुनावी प्रक्रिया को 80 और 90 के दशक के दौर में पीछे धकेलना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक तकनीक के समावेश ने मतदान और मतगणना की पूरी प्रणाली को बेहद पारदर्शी बना दिया है। ऐसे में पारदर्शी व्यवस्था को नकारते हुए पुराने ढर्रे पर लौटने की मांग करना समझ से परे है और यह प्रगतिशील भारत की सोच के खिलाफ है।
आपातकाल की याद दिलाते हुए संवैधानिक संस्थाओं पर हमले का आरोप
संवैधानिक मर्यादाओं का जिक्र करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि हार का सामना करने पर चुनाव आयोग को बदनाम करना और स्वायत्त संस्थाओं के ढांचे को चोट पहुंचाना कांग्रेस के डीएनए का हिस्सा है। उन्होंने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए कहा कि कांग्रेस पहले भी आपातकाल थोपकर देश के लोकतंत्र को गहरी चोट पहुंचा चुकी है। वर्तमान समय में भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करके एक बेहद खतरनाक राजनीतिक खेल खेला जा रहा है।
अराजकता की राह पर जाने की चेतावनी
केंद्रीय मंत्री ने चेताया कि देश की स्थापित संस्थाओं और प्रक्रियाओं को बार-बार कटघरे में खड़ा करके उन्हें ध्वस्त करने का प्रयास राष्ट्रहित के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है। यह रवैया समाज और राजनीति को अराजकता की तरफ धकेलने जैसा है। उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस के इस प्रकार के मंसूबे और नापाक इरादे कभी सफल नहीं हो पाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए सभी राजनीतिक दलों से परिपक्वता और जिम्मेदारी भरा आचरण करने की अपील की।



















