कर्नाटक लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक करने और अभ्यर्थियों से भारी रकम वसूलने का एक बड़ा मामला गरमा गया है। परीक्षा आयोजन से ठीक पहले प्रश्नपत्र लीक कराकर उसे 30 लाख से 40 लाख रुपये तक में बेचने का नेटवर्क सक्रिय था। इस पूरे खेल में राज्य सरकार के मंत्रियों और सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेताओं की मिलीभगत का दावा किया गया है। दूसरी ओर, यह भी कहा जा रहा है कि राजनीतिक विवादों और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर हमलों के जरिए इस गंभीर भर्ती घोटाले से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास चल रहा है। संबित पात्रा ने इस पूरे मामले को लेकर प्रेस के सामने विस्तृत ब्योरा रखा और सरकार की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए।
स्टिंग ऑपरेशन और पेन ड्राइव से लीक हुआ पर्चा
इस पूरे घोटाले की पृष्ठभूमि इसी वर्ष 8 और 9 जनवरी को आयोजित हुई परीक्षा से जुड़ी है। परीक्षा शुरू होने से ठीक एक दिन पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर दिया गया था। एस. मंजूनाथ नामक व्यक्ति द्वारा किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन के माध्यम से इस अनुचित गतिविधि के पुख्ता प्रमाण जुटाए गए। छानबीन में सामने आया कि ज्ञानेंद्र कुमार ने परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों को एक पेन ड्राइव में सुरक्षित कर बाहर निकाला था। इसके बाद बसवराज कन्नाले नाम के बिचौलिए को ऐसे अभ्यर्थियों की तलाश का जिम्मा दिया गया जो परीक्षा में बैठने वाले थे। बिचौलिए ने शुरू में प्रत्येक अभ्यर्थी से 80 लाख रुपये की भारी मांग रखी थी, लेकिन बाद में यह सौदा प्रति अभ्यर्थी 30 से 40 लाख रुपये के बीच तय हुआ।
रिजॉर्ट में ठहराव और करोड़ों के लेनदेन का खुलासा
शुरुआती दौर में 11 अभ्यर्थियों से कुल मिलाकर 1 करोड़ 52 लाख रुपये की नकद राशि वसूली गई। बाकी बची रकम की गारंटी के तौर पर उनसे पोस्ट डेटेड चेक ले लिए गए थे। एकत्र की गई इस कुल राशि में से 1 करोड़ 30 लाख रुपये सीधे ज्ञानेंद्र कुमार को सौंपे गए। रिश्वत के तौर पर मिले इसी धन से ज्ञानेंद्र कुमार ने महंगी ज्वेलरी खरीदी, जिसमें 22 लाख रुपये की कीमत का एक डायमंड नेकलेस भी बरामद हुआ है। परीक्षा से ठीक पहले बसवराज ने बेंगलुरु शहर के बाहर एक निजी रिजॉर्ट बुक कराया, जहां इन सभी अभ्यर्थियों को ठहराया गया था। रिजॉर्ट के भीतर परीक्षार्थियों को लीक हुए प्रश्न और उनके सटीक उत्तर रटवाए गए। इसके बाद जब 17 जुलाई को आयोग ने नतीजे घोषित किए, तो इस गिरोह के संपर्क में आए सभी अभ्यर्थियों का चयन हो चुका था। मामले में गड़बड़ी उजागर होने के बाद कर्नाटक सरकार ने मामले की प्रारंभिक जांच सीआईडी को सौंपी थी।
ईडी की छापेमारी और विशेष जांच दल का गठन
प्रकरण में वित्तीय हेराफेरी का पहलू सामने आते ही प्रवर्तन निदेशालय ने भी दखल दिया और छापेमारी की कार्रवाई की। ईडी की इस तलाशी कार्रवाई के दौरान कई निर्णायक दस्तावेज और साक्ष्य बरामद किए गए। घूस देकर परीक्षा पास करने वाले 11 अभ्यर्थियों में से 10 लड़के सरकारी गवाह बन गए हैं, जिससे जांच एजेंसियों के हाथ मजबूत हुए हैं। मामले की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने अब एक एसआईटी का गठन कर निष्पक्ष जांच का आदेश दिया है। संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन युवाओं के भविष्य का खुलेआम सौदा कर रहा है और पूरे सिस्टम को रिश्वतखोरी का केंद्र बना दिया गया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सत्ता से जुड़े प्रभावशालियों के नाम सामने आने के डर से मामले की लीपापोती करने की कोशिशें की जा रही हैं।



















