दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर मुखर होने लगे हैं। चुनाव नतीजे आने के बाद बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मंत्रियों के परिजनों ने संगठनात्मक कार्यशैली पर खुलकर सवाल उठाए हैं। कार्यकर्ताओं की अनदेखी और प्रशासनिक हावी होने के आरोपों के बीच मुख्यमंत्री आवास पर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई गई, जिसमें चुनावी पराजय के कारणों पर गंभीर चर्चा हुई।
अंदरूनी बयानबाजी और वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी
उपचुनाव के नतीजों के तुरंत बाद पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने X पर एक संदेश पोस्ट किया जिसमें उन्होंने साफ शब्दों में लिखा कि अब आत्ममंथन का समय आ गया है। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की बहू और पूर्व मंत्री राहुल सिंह की पत्नी उमिता सिंह ने भी पार्टी की स्थिति पर चिंता जाहिर की। उमिता सिंह ने कहा कि जब राजनीतिक कार्यकर्ताओं की जगह प्रशासनिक अधिकारी यह दावा करने लगें कि उनकी पहुंच ऊपर तक है, तब चुनाव परिणाम हमेशा विपरीत ही आते हैं।
हार के कारणों का विश्लेषण करने के लिए मुख्यमंत्री आवास पर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नेताओं ने अधिकतर समय चुप्पी साधे रखी। सबसे ध्यान देने योग्य बात यह रही कि वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा इस समीक्षा बैठक में उपस्थित नहीं हुए, जिससे राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हार के कारणों की जांच के लिए दो-सदस्यीय कमेटी गठित
दतिया उपचुनाव के नतीजों की गहराई से समीक्षा करने के लिए प्रदेश नेतृत्व ने दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति में प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को सदस्य नियुक्त किया गया है।
यह गठित समिति दतिया विधानसभा क्षेत्र के चुनाव प्रबंधन से जुड़े जिम्मेदार पदाधिकारियों, स्थानीय कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं से सीधी बातचीत करेगी। पूरी प्रक्रिया का विश्लेषण करने के बाद समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट और निष्कर्ष प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को सौंपेगी, ताकि पराजय के मुख्य कारणों को चिन्हित किया जा सके।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और नया राजनीतिक गणित
दतिया उपचुनाव के परिणामों पर विपक्षी नेताओं ने तीखे तंज कसे हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीजेपी कार्यकर्ताओं के पास अब कुछ बाकी नहीं बचा है और पार्टी को यह 12 साल का रिटर्न गिफ्ट मिला है। अखिलेश यादव ने कहा कि बिना पुलिस-प्रशासन का दुरुपयोग किए या बिना बेईमानी के चुनाव लड़ने पर जनता की असली नाराजगी सामने आ जाती है।
इसके साथ ही इस उपचुनाव में नए राजनीतिक समीकरण भी देखने को मिले हैं। सांसद चंद्रशेखर की पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव मंडल ने भी चुनाव में उल्लेखनीय वोट हासिल किए हैं, जिसकी चर्चा क्षेत्र के राजनीतिक विश्लेषकों के बीच जोर-शोर से हो रही है।



















