तेलंगाना कांग्रेस के भीतर लंबे समय से जारी अंदरूनी मतभेद के बीच रक्षाबंधन के अवसर पर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। राज्य की मंत्री कोंडा सुरेखा और मंत्री सीतक्का सोमवार को अचानक मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के आधिकारिक आवास पर पहुंचीं और उन्हें रक्षासूत्र बांधा। परकाला विधानसभा क्षेत्र से जुड़े हालिया विवाद के बाद यह पहला अवसर था जब कोंडा सुरेखा मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से मिलने उनके घर आईं। इस कारण इस मुलाकात को सिर्फ एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि राज्य की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि, त्योहार की मिठास के बीच दोनों शीर्ष नेताओं के बीच की पुरानी राजनीतिक तल्खी साफ तौर पर महसूस की गई।
मुख्यमंत्री आवास पर रक्षाबंधन का आयोजन और नेताओं का व्यवहार
सोमवार को जब दोनों महिला मंत्री मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के निवास स्थान पर पहुंचीं, तो सबसे पहले उन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी गीता और उनकी पुत्री नैमिषा रेड्डी का पारंपरिक तरीके से स्वागत करते हुए उन्हें तिलक लगाया। इसके बाद मंत्री सीतक्का ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की कलाई पर राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने भी पूरे उत्साह और गर्मजोशी के साथ सीतक्का का अभिवादन किया तथा उनसे हाथ मिलाया। लेकिन इसके ठीक विपरीत, जब कोंडा सुरेखा ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी, तब माहौल में पहले जैसी सहजता और आत्मीयता नजर नहीं आई। वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान इस बात ने विशेष रूप से खींचा कि राखी बंधवाते समय मुख्यमंत्री का रुख कोंडा सुरेखा की तरफ काफी तटस्थ रहा और उन्होंने सीधे उनकी ओर देखने से परहेज किया। यही वजह है कि इस मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो सामने आते ही कांग्रेस के अंदरूनी खेमों में चर्चाएं शुरू हो गईं। इसके अलावा, इस अवसर पर कांग्रेस की अन्य महिला कार्यकर्ताओं और ब्रह्माकुमारी संगठन की प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें रक्षासूत्र बांधा।
मुलाकात के बाद कोंडा सुरेखा का बयान और राजनीतिक रुख
मुख्यमंत्री आवास से निकलने के पश्चात मंत्री कोंडा सुरेखा ने अपने निजी निवास पर पत्रकारों से बातचीत की। मीडियाकर्मियों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस पावन अवसर पर किसी भी प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी नहीं करना चाहती हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वे रेवंत रेड्डी को लगातार तीसरी बार राखी बांध रही हैं और वे प्रदेश के सभी नागरिकों की बहन की तरह हैं। उन्होंने कहा कि उनकी ईश्वर से यही प्रार्थना है कि भगवान मुख्यमंत्री को राज्य के तेज विकास और जनता की सेवा के लिए अपार शक्ति प्रदान करें। सुरेखा ने यह भी कहा कि तेलंगाना की समस्त महिलाओं का आशीर्वाद सदैव मुख्यमंत्री के साथ रहेगा। यद्यपि उन्होंने मीडिया के सामने पूरी तरह सौहार्दपूर्ण रुख अपनाने का प्रयास किया, परंतु हाल की घटनाओं ने उनके इस बयान के पीछे छुपे राजनीतिक तनाव को उजागर कर दिया।
सुष्मिता पटेल के बयानों से उपजा परकाला विधानसभा विवाद
कोंडा सुरेखा और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के बीच संबंधों में आई इस खटास की मुख्य वजह सुरेखा की बेटी सुष्मिता पटेल द्वारा दिए गए आक्रामक बयान हैं। कुछ दिनों पूर्व परकाला विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक सार्वजनिक सभा के दौरान सुष्मिता पटेल ने खुले मंच से मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और स्थानीय कांग्रेस विधायक रेवुरी प्रकाश रेड्डी पर कड़े प्रहार किए थे। उन्होंने अपनी बात रखते हुए अपने पिता कोंडा मुरली के राजनीतिक योगदान का हवाला दिया और सवाल उठाया कि पार्टी संगठन में उनके पिता को अब तक कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों नहीं दी गई है। सुष्मिता ने निर्भीक अंदाज में बयान देते हुए कहा था कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव से डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने परकाला के वर्तमान विधायक रेवुरी प्रकाश रेड्डी को अपना पद छोड़कर तुरंत चुनावी मैदान में आकर मुकाबला करने की सीधी चुनौती दे डाली थी। इस सार्वजनिक हमले ने कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया।
अनुशासन समिति का नोटिस और मंत्रिमंडल से हटाए जाने की अटकलें
सुष्मिता पटेल के इस तरह खुलेआम मुख्यमंत्री और पार्टी विधायक के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद यह मामला तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी तक पहुंच गया। पार्टी आलाकमान के निर्देश पर कांग्रेस सांसद मल्लू रवि की अध्यक्षता वाली अनुशासन समिति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री कोंडा सुरेखा को कारण बताओ नोटिस थमा दिया। सूत्रों के अनुसार, कोंडा सुरेखा ने अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में यह कहा कि अपनी बेटी सुष्मिता के बयानों से उनका व्यक्तिगत या राजनीतिक रूप से कोई लेना-देना नहीं है और वे पार्टी लाइन के साथ खड़ी हैं। हालांकि, मल्लू रवि की अध्यक्षता वाली इस समिति ने पूरे प्रकरण की गहन समीक्षा की और माना जा रहा है कि उन्होंने सुरेखा के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की सिफारिश की है। इस घटनाक्रम के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जाने लगे कि क्या कांग्रेस नेतृत्व कोंडा सुरेखा को राज्य मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा सकता है। अब यह पूरा विवाद पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष विचाराधीन है।
परकाला सीट पर वर्चस्व की लड़ाई और मुख्यमंत्री का रुख
रेवंत रेड्डी और कोंडा सुरेखा के बीच जारी खींचतान का एक अन्य बड़ा कारण परकाला विधानसभा क्षेत्र पर राजनीतिक नियंत्रण को लेकर छिड़ी जंग है। कोंडा सुरेखा लंबे समय से शिकायत करती रही हैं कि परकाला से पार्टी विधायक रेवुरी प्रकाश रेड्डी लगातार उनके समर्थकों और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को राजनीतिक रूप से किनारे करने का काम कर रहे हैं। इस विवाद के बीच मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हाल ही में मुलुगु और परकाला क्षेत्रों में आयोजित सरकारी व राजनीतिक दौरों में हिस्सा लिया था। इन आयोजनों में मंत्री कोंडा सुरेखा की अनुपस्थिति ने सभी का ध्यान खींचा था। परकाला की एक बड़ी जनसभा में मुख्यमंत्री ने मंच से खुलकर घोषणा की थी कि जनता को आगामी विधानसभा चुनावों में रेवुरी प्रकाश रेड्डी को भारी बहुमत से विजयी बनाना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस खुले समर्थन को पार्टी के भीतर इस संकेत के रूप में देखा गया कि आलाकमान भविष्य में भी परकाला से रेवुरी प्रकाश रेड्डी को ही अपना उम्मीदवार बनाएगा। मुख्यमंत्री के इस बयान के अगले ही दिन सुष्मिता पटेल ने गीसुगोंडा में अपने कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाकर मुख्यमंत्री के फैसले को चुनौती दी और खुद परकाला सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जता दी।
क्या रक्षाबंधन से पिघलेगी तेलंगाना कांग्रेस की राजनीतिक बर्फ?
यद्यपि कोंडा सुरेखा ने मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर रक्षाबंधन की परंपरा का पालन किया और रेवंत रेड्डी को शुभकामनाएं दीं, लेकिन मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच दिखी असहजता यह बताने के लिए काफी है कि संकट अभी टला नहीं है। एक तरफ जहां सुरेखा द्वारा रेवंत रेड्डी को तीसरी बार राखी बांधने का जिक्र रिश्तों को संभालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ परकाला सीट का विवाद, बेटी का बागी रुख और अनुशासन समिति की सिफारिशें कांग्रेस के अंदर गहरी दरार की गवाही दे रही हैं। अब तेलंगाना के राजनीतिक प्रेक्षक इस बात पर नजर टिकाए हुए हैं कि क्या राखी का यह पर्व कांग्रेस के भीतर चल रहे इस सत्ता संघर्ष को शांत कर पाएगा या फिर आने वाले दिनों में यह अंतर्कलह किसी नए राजनीतिक विस्फोट का रूप लेगी।



















