राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर में हुए वित्तीय घपले के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा यानी एसीबी ने बड़ी कार्रवाई की है। इस प्रकरण में दिल्ली सरकार के पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन और पूर्व आईएएस अधिकारी उदित प्रकाश राय सहित कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस कार्रवाई के तुरंत बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सामाजिक माध्यम एक्स के जरिए दावा किया कि यह गिरफ्तारी कानून या साक्ष्यों के आधार पर नहीं, बल्कि सीधे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दबाव में की गई है।
गिरफ्तारी की टाइमिंग और प्रक्रिया पर अरविंद केजरीवाल के सवाल
आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेता अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। केजरीवाल का दावा है कि एसीबी के एक अधिकारी से मिली जानकारी के मुताबिक, संस्था का सुबह तक सत्येंद्र जैन को हिरासत में लेने का कोई विचार नहीं था। लेकिन दोपहर के समय गृहमंत्री का फोन सीधे जांच एजेंसी के अधिकारियों के पास आया, जिसके तुरंत बाद गिरफ्तारी को अंजाम दे दिया गया। केजरीवाल ने तर्क दिया कि मौजूदा व्यवस्था में यह तय नहीं होता कि किसी व्यक्ति ने अपराध किया है या नहीं, बल्कि यह देखा जाता है कि शीर्ष सत्ता किसे जेल भेजना चाहती है।
आप संयोजक ने आगे कहा कि सामान्य पुलिस प्रक्रिया में किसी संदिग्ध को तब गिरफ्तार किया जाता है जब उससे पूछताछ करनी हो या जांच को आगे बढ़ाना हो। हालांकि इस मामले में जांच एजेंसी ने सत्येंद्र जैन की पुलिस रिमांड या कस्टडी की मांग तक नहीं की। केजरीवाल के अनुसार, बिना कस्टडी मांगे की गई यह गिरफ्तारी दर्शाती है कि एजेंसी का उद्देश्य कोई वास्तविक पूछताछ करना नहीं था, बल्कि यह कदम केवल राजनीतिक दबाव के तहत उठाया गया है। सत्येंद्र जैन आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के साथ-साथ पंजाब के सह-प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
दिल्ली जल बोर्ड टेंडर घोटाला और एसीबी की एफआईआर
दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच ने यह पूरी कार्रवाई एफआईआर संख्या 10/2024 के तहत दर्ज मामले में की है। इस एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 7ए, 9 और 13 के अलावा भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 420, 409, 418 और 120-बी जोड़ी गई हैं। एसीबी द्वारा गिरफ्तार किए गए छह प्रमुख आरोपियों में दिल्ली के पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन, दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं आईएएस उदित प्रकाश राय, डीजेबी के पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव और तीन निजी कंपनियों के मालिक शामिल हैं।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की शुरुआत दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय द्वारा भेजी गई एक आधिकारिक शिकायत के बाद हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के नवीनीकरण और अपग्रेडेशन से जुड़े टेंडर आवंटन में व्यापक धांधली की गई। एसीबी की शुरुआती जांच में सामने आया कि टेंडर की तकनीकी शर्तों को जानबूझकर इस प्रकार तैयार किया गया था जिससे एक खास तकनीकी प्रदाता कंपनी मेसर्स यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को अनुचित लाभ पहुंचाया जा सके।
नियमों में हेरफेर और वित्तीय नुकसान का आरोप
एसीबी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया के दौरान अनिवार्य माने जाने वाले पायलट अध्ययन को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया। इसके अलावा, इस्तेमाल होने वाली तकनीक और मीडिया से संबंधित ऐसी कड़ी शर्तें जोड़ दी गईं जिससे अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियां दौड़ से बाहर हो गईं। इतना ही नहीं, शोधित पानी की गुणवत्ता से जुड़े बेहद जरूरी मानकों को भी टेंडर दस्तावेज से हटा दिया गया था। इन तमाम मनमाने बदलावों का सीधा असर यह हुआ कि स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा समाप्त हो गई और सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ आ पड़ा।
जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से यह बात उजागर हुई है कि टेंडर की शर्तें, शुद्धिपत्र और उससे संबंधित गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक रूप से जारी होने से पहले ही सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के बीच साझा किए जा चुके थे। बाद में इन्हीं दस्तावेजों को दिल्ली जल बोर्ड के आधिकारिक टेंडर नोटिस में ज्यों का त्यों शामिल कर लिया गया, जो स्पष्ट रूप से एक बड़ी साठगांठ की ओर इशारा करता है।
कमीशन का खेल और 1.52 करोड़ रुपये का मनी ट्रेल
मामले की वित्तीय जांच के दौरान एसीबी को रिश्वत और कमीशन के पैसे के लेन-देन का स्पष्ट मनी ट्रेल मिला है। जांच में खुलासा हुआ कि बिचौलिए के तौर पर दो मुखौटा कंपनियों, मेसर्स सृजनहार और मेसर्स एएन एंटरप्राइजेज का इस्तेमाल किया गया था। तकनीक प्रदाता कंपनी मेसर्स यूरोटेक से धन पहले मेसर्स एएन एंटरप्राइजेज के खाते में भेजा गया। इसके पश्चात आरोपी नागेंद्र यादव की प्रोपराइटरशिप फर्म के जरिए 1.52 करोड़ रुपये की राशि दिल्ली जल बोर्ड के तत्कालीन सीईओ उदित प्रकाश राय और उनके करीबियों के बैंक खातों में स्थानांतरित की गई।
जांच एजेंसियों का कहना है कि रिश्वत के रूप में मिली इस 1.52 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया था। इसके साथ ही डिजिटल फोरेंसिक जांच में यह भी पता चला कि आरोपी राजा कुमार कुर्रा, नागेंद्र यादव और अंकित श्रीवास्तव के बीच एसटीपी टेंडर और उसकी संशोधित शर्तों को लेकर लगातार बातचीत हो रही थी। इसी आपसी बातचीत और मिलीभगत के आधार पर ऐसी शर्तें तैयार की गईं जिनसे यूरोटेक कंपनी को निविदा का काम मिलना सुनिश्चित हो सका।



















