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तमिलनाडु में सत्ता के 100 दिन पूरे होते ही थलापति विजय को 2029 में प्रधानमंत्री बनाने की उठी मांग, टीवीके नेताओं ने खोला मोर्चाराजनीति
19 अग॰ 2026, 3:40 pm (2 घंटे पहले)· 3

तमिलनाडु में सत्ता के 100 दिन पूरे होते ही थलापति विजय को 2029 में प्रधानमंत्री बनाने की उठी मांग, टीवीके नेताओं ने खोला मोर्चा

तमिलनाडु में सी जोसेफ विजय की सरकार के 100 दिन पूरे होने पर टीवीके नेताओं ने उन्हें 2029 में भारत का अगला प्रधानमंत्री बनाने की मांग उठाई है। पार्टी मंत्रियों का कहना है कि दक्षिण भारत से नया राष्ट्रीय नेतृत्व निकलना चाहिए।

तमिलनाडु में सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु वेत्री कड़गम (टीवीके) सरकार ने अपने शासन के 100 दिन सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इस छोटे से कार्यकाल के दौरान राज्य प्रशासन द्वारा लिए गए कई अहम फैसलों, प्रशासनिक संवेदनशीलता और कल्याणकारी योजनाओं की तेज रफ्तार को लेकर चारों तरफ चर्चा हो रही है। हालांकि, इन 100 दिनों के मील के पत्थर तक पहुंचते ही राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक नई और बड़ी बहस ने जोर पकड़ लिया है। टीवीके के भीतर अब थलापति विजय से मुख्यमंत्री बने सी जोसेफ विजय को वर्ष 2029 के आम चुनावों में भारत के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की मांग मुखर होने लगी है और पार्टी के शीर्ष नेता इस मुद्दे पर माहौल तैयार करने में जुट गए हैं।

विधानसभा से उठी प्रधानमंत्री पद की मांग

विधानसभा के भीतर टीवीके के मंत्रियों ने विजय को राष्ट्रीय राजनीति में पेश करने की वकालत खुलकर शुरू कर दी है। राज्य के मानव संसाधन प्रबंधन मंत्री सरतकुमार ने मंगलवार को सदन में भाषण देते हुए कहा कि हमारे दिलों, घरों और सेंट जॉर्ज फोर्ट में मुख्यमंत्री के रूप में विराजमान हमारे नेता ही भारत के अगले प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने विजय के काम करने के तरीके की सराहना करते हुए जोर दिया कि सुबह और शाम का ख्याल किए बिना लगातार काम करने वाले विजय भविष्य में देश की कमान जरूर संभालेंगे। सरतकुमार के इस वक्तव्य पर टीवीके के अधिकांश विधायकों ने मुस्कान के साथ मेजें थपथपाकर अपना समर्थन जाहिर किया।

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इससे ठीक एक दिन पहले राज्य के पब्लिक वर्क्स मंत्री आधाव अर्जुन ने भी इसी तरह की राय व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि आने वाले समय में दक्षिण भारत से एक प्रधानमंत्री का निकलना बेहद जरूरी है और वह नेतृत्व तमिलनाडु की धरती से ही आना चाहिए। आधाव अर्जुन का मानना था कि ऐसा नेता पूरे देश के नागरिकों का समान रूप से प्रतिनिधित्व करेगा और सभी के साथ समानता का व्यवहार करेगा। हालांकि किसी भी नई राजनीतिक पार्टी में शीर्ष नेता की तारीफ होना सामान्य बात मानी जा सकती है, लेकिन महज दो साल पहले यानी 2024 में गठित हुई और 2026 के विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करके सत्ता में आई टीवीके के लिए 100 दिनों के भीतर दिल्ली के तख्त की बात करना एक बड़ी रणनीतिक महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व का गणित और इतिहास

टीवीके के नेता अपनी इस मांग के पीछे दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व का सबसे बड़ा तर्क दे रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो तमिलनाडु से आज तक कोई भी नेता देश के प्रधानमंत्री पद तक नहीं पहुंच सका है। पूरे दक्षिण भारत की बात करें तो अंतिम बार एचडी देवेगौड़ा लगभग तीन दशक पहले भारत के प्रधानमंत्री बने थे। उसके बाद से देश की केंद्रीय सत्ता में मुख्य रूप से उत्तर भारत का ही वर्चस्व रहा है। यही वजह है कि टीवीके अब इस क्षेत्रीय भावना को राष्ट्रीय स्तर पर भुनाने की कोशिश कर रही है ताकि पार्टी का जनाधार राज्य की सीमाओं से बाहर भी फैलाया जा सके।

100 दिनों में लागू की गई प्रमुख योजनाएं और फैसले

मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की सरकार ने अपने शुरुआती 100 दिनों के कार्यकाल में जनता से किए गए कई प्रमुख चुनावी वादों को तेजी से धरातल पर उतारा है। प्रशासन ने महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सिंगाप्पेन स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया है। इसके अलावा सामाजिक कल्याण के तहत नवजात शिशुओं को सोने की अंगूठी तथा नवविवाहित दुल्हनों को सोने का सिक्का और साड़ी प्रदान करने वाली योजनाओं की शुरुआत की गई है।

किसानों के आर्थिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से कृषि ऋण माफ कर दिए गए हैं। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को प्रोत्साहन देने के लिए मुफ़्त लैपटॉप और साइकिलों का वितरण निर्बाध रूप से जारी है। सरकार ने अपने चुनावी वादे के अनुसार मुफ़्त बिजली योजना को भी लागू कर दिया है। राज्य में कानून व्यवस्था दुरुस्त करने और गिरोहबंद अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए नशीले पदार्थों तथा आपराधिक गिरोहों के खिलाफ विशेष टास्क फोर्स बनाई गई है। जनहित में बड़ा कदम उठाते हुए स्कूलों और धार्मिक स्थलों के पास संचालित शराब की दुकानों को पूरी तरह बंद करा दिया गया है। हाल ही में एक और बड़ा फैसला लेते हुए सरकार ने तीसरे बच्चे के जन्म पर महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश की अवधि को 12 हफ्तों से बढ़ाकर पूरा 365 दिन कर दिया है।

विपक्ष की सराहना और राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन

विजय सरकार के इन 100 दिनों के कामकाज का असर इतना गहरा रहा है कि सत्ता पक्ष ही नहीं बल्कि विपक्षी खेमे से भी सराहना के स्वर सुनाई दे रहे हैं। पूर्व भाजपा नेता अन्नामलाई ने सरकार के शुरुआती कदमों की तारीफ करते हुए कहा है कि विजय के आने से तमिलनाडु की राजनीति में एक नई ताजगी महसूस हो रही है। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ काफी गंभीर नजर आ रही है। हालांकि अन्नामलाई ने चेतावनी भी दी कि राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए सरकार के पास अभी एक स्पष्ट रोडमैप दिखाई नहीं दे रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2029 की राष्ट्रीय राजनीति के बारे में अभी से कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। उनके अनुसार विजय को सबसे पहले तमिलनाडु में अपने पूरे पांच साल के कार्यकाल के दौरान सुशासन साबित करना होगा। 100 दिनों की शुरुआती सफलता निश्चित रूप से एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन किसी भी नेता की वास्तविक राजनीतिक परीक्षा लंबे शासनकाल में होती है। इसके बावजूद, टीवीके के शीर्ष मंत्रियों द्वारा इतनी जल्दी दिल्ली की गद्दी का जिक्र करना यह साफ दर्शाता है कि पार्टी केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि राष्ट्रीय परिदृश्य में अपनी जगह बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।

सवाल-जवाब

टीवीके सरकार के 100 दिन पूरे होने पर क्या नया राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है?
टीवीके के मंत्रियों ने मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय को 2029 के आम चुनावों में भारत का अगला प्रधानमंत्री बनाने की मांग उठाई है।
किस मंत्री ने विधानसभा में विजय को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताया?
मानव संसाधन प्रबंधन मंत्री सरतकुमार ने विधानसभा में कहा कि दिन-रात काम करने वाले विजय भारत के अगले प्रधानमंत्री बनेंगे।
दक्षिण भारत से प्रधानमंत्री बनाने के पीछे क्या तर्क दिया गया?
पब्लिक वर्क्स मंत्री आधाव अर्जुन ने तर्क दिया कि दक्षिण भारत और तमिलनाडु से एक ऐसा राष्ट्रीय नेता निकलना चाहिए जो देश के हर नागरिक का समान प्रतिनिधित्व करे।
विजय सरकार ने अपने 100 दिनों के कार्यकाल में कौन सी प्रमुख योजनाएं शुरू की हैं?
सरकार ने महिलाओं के लिए सिंगाप्पेन टास्क फोर्स बनाई, नवजात शिशुओं को सोने की अंगूठी, दुल्हनों को सोने का सिक्का, किसानों की ऋण माफी, मुफ्त बिजली, और तीसरे बच्चे पर 365 दिन का मातृत्व अवकाश लागू किया।
विपक्षी नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
पूर्व भाजपा नेता अन्नामलाई ने भ्रष्टाचार विरोधी कदमों और ताजगी की सराहना की लेकिन स्पष्ट रोडमैप की कमी बताई, जबकि विश्लेषकों का मानना है कि 2029 की चर्चा अभी बहुत शुरुआती है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·46 मिनट पहले

टीवीके मंत्रियों द्वारा सत्ता के शुरुआती सौ दिनों में ही विजय को राष्ट्रीय मंच पर पेश करने की यह रणनीति तमिलनाडु की क्षेत्रीय भावनाओं को भुनाने का एक बड़ा राजनीतिक संकेत है। दक्षिण भारत से लंबे समय से प्रधानमंत्री न मिलने के ऐतिहासिक खालीपन को भरने का यह प्रयास क्षेत्रीय दलों के राष्ट्रीय प्रसार की पुरानी रणनीति का ही अगला कदम प्रतीत होता है, जिसका असर 2029 के चुनावों पर पड़ सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·46 मिनट पहले

यह राजनीतिक महत्वाकांक्षा केवल क्षेत्रीय भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी आर्थिक निहितार्थ भी हैं। जब कोई नया राजनीतिक दल शुरुआती दौर में ही राष्ट्रीय नेतृत्व की बात करता है, तो निवेशकों और कॉर्पोरेट जगत का ध्यान क्षेत्रीय नीतियों से हटकर राष्ट्रीय स्तर की संभावनाओं पर केंद्रित हो जाता है। 2029 के चुनावों से पहले यदि यह वैचारिक बदलाव वित्तीय और औद्योगिक गलियारों में पकड़ बनाता है, तो तमिलनाडु की आर्थिक और औद्योगिक वृद्धि को लेकर बाजार का रुख भी तेजी से बदल सकता है।

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