लागत में किफायती और रफ्तार में बेमिसाल: जानिए दुनिया की महंगी ट्रेनों को कैसे टक्कर दे रही है भारत की वंदे भारतसफल एंजियोप्लास्टी के बाद एम्स से घर लौटे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डाअसम के होजाई में पटरियों पर आया हाथियों का झुंड, वन कर्मियों ने राजधानी एक्सप्रेस को रुकवाकर टाला बड़ा हादसादिल्ली के अस्पतालों में H1N1 और H3N2 के मरीज बढ़े, जानिए डॉक्टर एस चंद्रा की सलाह और वैक्सीन की पूरी जानकारीगॉल में मानव सुथार के 10 विकेट से भारत की ऐतिहासिक जीत, 600वें टेस्ट में श्रीलंका को 165 रनों से हरायासुनील पाल ने कपिल शर्मा के शो पर लगाया बेइज्जती का आरोप, कहा समय रैना को हीरो बनाने के लिए हुआ खेलपंप.फन में 40% की धमाकेदार तेजी, ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा ओपन इंटरेस्ट और नेटवर्क रेवेन्यूश्रीलंका को पहले टेस्ट में हराने के बाद टीम इंडिया का PCT बढ़ा, फिर भी 5वें पायदान पर क्यों अटका है भारतअमृत भारत स्टेशन योजना के तहत गाज़ीपुर में बनी राष्ट्रनायकों की कलाकृतियों के सामने खुले में शौच पर बढ़ा जनाक्रोशलुधियाना के बीआरएस नगर में पिज्जा आउटलेट पर ताबड़तोड़ फायरिंग, इंस्टाग्राम पोस्ट से गोपी लहोरिया ग्रुप ने दी धमकी
तमिलनाडु: राजनीतिक प्रदर्शनों में छात्रों की एंट्री रोकने का आदेश वापस, भारी विरोध के बाद विजय सरकार ने खींचे कदमराजनीति
19 अग॰ 2026, 1:43 pm (2 घंटे पहले)· 2

तमिलनाडु: राजनीतिक प्रदर्शनों में छात्रों की एंट्री रोकने का आदेश वापस, भारी विरोध के बाद विजय सरकार ने खींचे कदम

तमिलनाडु सरकार ने सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों के छात्रों को राजनीतिक प्रदर्शनों से दूर रखने संबंधी अपना 17 अगस्त का आदेश वापस ले लिया है। CJP और वामपंथी संगठनों के तीखे विरोध और राज्य में जारी NEET प्रदर्शनों के बीच विजय सरकार को यह कदम उठाना पड़ा।

तमिलनाडु में राजनीतिक माहौल के बीच राज्य प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए छात्रों को विरोध प्रदर्शनों से दूर रखने वाले अपने पूर्व आदेश को रद्द कर दिया है। मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने सरकारी कला और विज्ञान महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को कॉकरोच जनता पार्टी तथा वामपंथी संगठनों द्वारा आयोजित आंदोलनों और प्रदर्शनों में भाग लेने से रोकने संबंधी निर्देश वापस ले लिया है। इस प्रशासनिक कदम के सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस छिड़ गई थी, जिसके बाद कॉलेजिएट शिक्षा विभाग को अपने पिछले परिपत्र को वापस लेने का औपचारिक पत्र जारी करना पड़ा।

प्रशासनिक आदेश को वापस लेने की पूरी प्रक्रिया

उच्च शिक्षा ढांचे के अंतर्गत जारी इस नए बदलाव के तहत कॉलेजिएट शिक्षा विभाग ने बुधवार को घोषणा की कि पूर्व में जारी निषेध संबंधी आदेश अब प्रभावी नहीं रहेगा। इस संबंध में कॉलेज शिक्षा की संयुक्त निदेशक सिंथिया सेल्वी पी ने मंगलवार को एक नया आदेश जारी किया था। इस नए पत्र में स्पष्ट किया गया कि विभाग द्वारा 17 अगस्त 2026 को जारी किया गया पिछला निर्देश पूरी तरह से वापस लिया जा रहा है।

ये भी पढ़ें

विभाग द्वारा जारी यह ताजा पत्र तमिलनाडु राज्य के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों के प्रिंसिपलों को प्रेषित किया गया है। 17 अगस्त को जारी परिपत्र के उजागर होने के बाद से ही प्रशासनिक गलियारों और शैक्षणिक संस्थानों में हलचल मची हुई थी, जिसके बाद सरकार ने त्वरित कदम उठाते हुए स्थिति को शांत करने के उद्देश्य से आदेश निरस्त कर दिया।

छात्रों पर रोक लगाने वाले मूल आदेश में क्या था?

विवाद के केंद्र में रहे 17 अगस्त 2026 के पत्र में कॉलेज शिक्षा आयुक्त की ओर से कड़े दिशा-निर्देश दिए गए थे। उस आदेश में सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों के प्रिंसिपलों को सख्त निर्देश दिया गया था कि वे स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के साथ मिलकर एक संयुक्त तंत्र विकसित करें। इस तंत्र का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि छात्र-छात्राएं और युवा किसी भी स्थिति में राजनीतिक प्रदर्शनों या आंदोलनों का हिस्सा न बनें।

उस आदेश में 14 अगस्त को जारी एक पूर्व सरकारी पत्र का हवाला दिया गया था, जिसमें विभिन्न प्रशासनिक और शैक्षणिक विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर त्वरित कार्रवाई करने की आवश्यकता पर बल दिया गया था। संपूर्ण संदेश पर 'मोस्ट अर्जेंट' यानी अत्यंत आवश्यक का टैग लगाया गया था। इसके साथ ही सभी संबंधित कॉलेजों को निर्देश दिया गया था कि वे इस दिशा में की गई अपनी प्रशासनिक कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट तुरंत कॉलेजिएट शिक्षा निदेशालय को सौंपें।

प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो राजनीतिक गतिविधियों में आई तेजी और दो प्रमुख राजनीतिक समूहों द्वारा आयोजित रैलियों में युवाओं की बढ़ती उपस्थिति को देखते हुए TVK सरकार चिंतित थी। इसी पृष्ठभूमि में स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, पुलिस और जिला अधिकारियों को मिलकर रोकथाम संबंधी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे।

राजनीतिक घमासान और BJP का कड़ा रुख

छात्रों की आवाजाही और प्रदर्शन पर रोक लगाने के शुरुआती निर्देश सामने आते ही राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी। भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता विनोज़ पी. सेल्वम ने इस मुद्दे पर वामपंथी संगठनों और कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ तीखा हमला बोला था। उन्होंने इन संगठनों पर आरोप लगाते हुए उन्हें 'अराजकता फैलाने वाले' करार दिया।

विनोज़ पी. सेल्वम ने कहा कि "इन राजनीतिक दलों के नेता युवाओं और विद्यार्थियों को भड़काकर सड़कों पर उतार देते हैं और जब परिणाम भुगतने की नौबत आती है तो छात्रों को अकेला छोड़कर खुद अपने घरों में सुरक्षित बैठ जाते हैं।" उन्होंने विजय सरकार के शुरुआती कदम की सराहना करते हुए कहा था कि इससे छात्रों को अपने करियर पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से आग्रह किया था कि वह अपनी सहयोगी पार्टी CPI(M) के राजनीतिक दबाव में आकर इस अधिसूचना को निरस्त करने की भूल न करे।

NEET विरोध प्रदर्शन और फैसला वापस लेने की मुख्य वजह

सरकार द्वारा जारी आदेश सार्वजनिक होते ही कॉकरोच जनता पार्टी ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया था। CJP नेताओं ने सरकार के इस कदम को सीधे तौर पर 'गैर-संवैधानिक' करार दिया और मुख्यमंत्री विजय से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। पार्टी का तर्क था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं और छात्रों के विरोध जताने के अधिकार को प्रशासनिक आदेशों के जरिए नहीं छीना जा सकता।

यह पूरा राजनीतिक बवंडर ऐसे समय में खड़ा हुआ जब तमिलनाडु भर में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी NEET के मुद्दे को लेकर व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। कॉकरोच जनता पार्टी और वामपंथी विचारधारा से जुड़े छात्र संगठन राज्य भर में NEET के खिलाफ रैलियां और धरने आयोजित कर रहे थे। ऐसे नाजुक मोड़ पर छात्रों को आंदोलनों से दूर रखने का फरमान जारी होने से सरकार चौतरफा घिर गई। बढ़ते राजनीतिक दबाव और व्यापक विरोध को देखते हुए आखिरकार विजय सरकार को अपना कदम पीछे खींचना पड़ा और बुधवार को यह आदेश आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया गया।

सवाल-जवाब

तमिलनाडु सरकार ने छात्रों से जुड़ा कौन सा आदेश वापस लिया है?
सरकार ने 17 अगस्त 2026 को जारी उस निर्देश को वापस ले लिया है जिसमें सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों के छात्रों को राजनीतिक प्रदर्शनों से दूर रखने को कहा गया था।
इस आदेश को वापस लेने की घोषणा कब और किसके द्वारा की गई?
कॉलेज शिक्षा की संयुक्त निदेशक सिंथिया सेल्वी पी ने मंगलवार को रद्द करने का पत्र जारी किया, जिसकी औपचारिक घोषणा बुधवार को हुई।
किस राजनीतिक दल ने इस आदेश को गैर-संवैधानिक बताया था?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस आदेश को गैर-संवैधानिक करार देते हुए मुख्यमंत्री विजय से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की थी।
BJP नेता विनोज़ पी. सेल्वम की इस मामले पर क्या राय थी?
BJP नेता विनोज़ पी. सेल्वम ने CJP और वामपंथी संगठनों को 'अराजकता फैलाने वाले' बताते हुए आरोप लगाया कि वे छात्रों को भड़काते हैं। उन्होंने शुरुआती प्रतिबंध का समर्थन किया था।
तमिलनाडु में वर्तमान में किस मुख्य मुद्दे पर प्रदर्शन चल रहे हैं?
राज्य में इस समय राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को लेकर CJP और वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा व्यापक विरोध प्रदर्शन चलाए जा रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

तमिलनाडु सरकार द्वारा छात्रों के राजनीतिक प्रदर्शनों पर प्रतिबंध का आदेश वापस लेना यह दर्शाता है कि हालिया विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक दबाव के सामने प्रशासन को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ा है। इस घटनाक्रम से राज्य के शैक्षणिक माहौल और प्रशासनिक स्थिरता पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों और सत्ताधारी प्रशासन के बीच टकराव के नए समीकरण बन सकते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

रविकश गुप्ता के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह साफ है कि कॉलेज परिसरों में प्रशासनिक हस्तक्षेप और राजनीतिक दलों की खींचतान का यह प्रकरण आने वाले चुनावों से पहले युवा वर्ग को अपने पाले में करने की रणनीति का हिस्सा है। जब सरकारें इस तरह के प्रतिबंधों को अचानक वापस लेती हैं, तो यह ज़मीनी स्तर पर विपक्ष और छात्र संगठनों के बढ़ते प्रभाव को सीधे तौर पर स्वीकार करने जैसा होता है, जिससे प्रशासनिक मशीनरी की साख पर भी सवाल खड़े होते हैं।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR