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दिल्ली जल बोर्ड टेंडर घोटाला: 669 दिन की रिहाई के बाद एसीबी ने सत्येंद्र जैन को फिर किया गिरफ्तारराजनीति
19 अग॰ 2026, 7:05 am (24 दिन पहले)· 3

दिल्ली जल बोर्ड टेंडर घोटाला: 669 दिन की रिहाई के बाद एसीबी ने सत्येंद्र जैन को फिर किया गिरफ्तार

दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर में गड़बड़ी के आरोप में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार कर लिया है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 18 अक्टूबर 2024 को जमानत मिलने के 669 दिन बाद यह कार्रवाई हुई है।

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने 18 अगस्त 2026 को उन्हें दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) टेंडर में हुए कथित घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 18 अक्टूबर 2024 को अदालत से नियमित जमानत मिलने के ठीक 669 दिन बाद उनकी यह दूसरी गिरफ्तारी हुई है। एसीबी ने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के बाद पूर्व मंत्री सहित कुल छह लोगों को हिरासत में लिया है, जिन्हें अदालत में पेश करने के बाद जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

एसीबी की कार्रवाई: छह आरोपी चढ़े पुलिस के हत्थे

एंटी करप्शन ब्रांच ने इस मामले में केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि तत्कालीन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और ठेका कंपनियों के मालिकों पर भी शिकंजा कसा है। जांच एजेंसी द्वारा मंगलवार को गिरफ्तार किए गए छह प्रमुख आरोपियों की सूची इस प्रकार है

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  • सत्येंद्र कुमार जैन: दिल्ली सरकार के पूर्व जल मंत्री।
  • उदित प्रकाश राय: दिल्ली जल बोर्ड के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (आईएएस)।
  • अंकित श्रीवास्तव: दिल्ली जल बोर्ड के तत्कालीन संविदा सलाहकार।
  • नागेंद्र यादव: मैसर्स एएन एंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर।
  • राजा कुमार: मैसर्स यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक।
  • पंकज वर्मा: कुर्रा मैसर्स सृजनहार के संचालक।

घोटाले की कानूनी रूपरेखा और एफआईआर के तथ्य

एसीबी ने यह पूरी कार्रवाई दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय द्वारा भेजी गई आधिकारिक शिकायत के आधार पर दर्ज प्राथमिक रिपोर्ट के तहत की है। इस मामले में एफआईआर संख्या 10/2024 के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 7ए, 9 और 13 के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 409 (सरकारी सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात), 418 (नुकसान पहुंचाने के इरादे से छल) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

जांच अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि दिल्ली में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उन्हें अपग्रेड करने के लिए जो टेंडर जारी किए गए थे, उनमें नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई। निविदा की तकनीकी शर्तों में इस प्रकार बदलाव किए गए ताकि केवल एक विशेष कंपनी, मैसर्स यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड, को ही आर्थिक और तकनीकी लाभ पहुंचाया जा सके। जिस समय यह पूरा फर्जीवाड़ा किया गया, उस दौरान सत्येंद्र जैन दिल्ली के जल मंत्री पद पर तैनात थे।

प्रस्ताव से टेंडर तक: 1,546 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट की पूरी टाइमलाइन

दिल्ली जल बोर्ड के एसटीपी प्लांट्स को आधुनिक बनाने की इस पूरी योजना में चरणबद्ध तरीके से नियमों को बदला गया। जांच एजेंसी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार इस परियोजना का घटनाक्रम इस प्रकार रहा

  • 7 अक्टूबर 2021: दिल्ली के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की क्षमता में सुधार और उनका आधुनिकीकरण करने के लिए आईएफएएस (एकीकृत फिक्स्ड-फिल्म एक्टिवेटेड स्लज) तकनीक का औपचारिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया।
  • 14 अक्टूबर 2021: तत्कालीन जल मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन ने इस तकनीक और प्रस्ताव को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दी।
  • 21 और 23 दिसंबर 2021: जल मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन की अध्यक्षता में बैठकों का आयोजन हुआ। इन बैठकों में तत्कालीन आईएएस अधिकारी व डीजेबी सीईओ उदित प्रकाश राय और संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव भी मौजूद थे। इन बैठकों के दौरान टेंडर की नियम व शर्तों (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) को अंतिम रूप दिया गया। मौजूदा एसटीपी के 100 प्रतिशत अपग्रेडेशन के लिए फिक्स्ड मीडिया वाली आईएफएएस तकनीक को अनिवार्य शर्त के रूप में शामिल किया गया।
  • 28 दिसंबर 2021: अधिकारी एस. सी. वशिष्ठ द्वारा तैयार विस्तृत प्रस्ताव को अजय गुप्ता और उदित प्रकाश राय के जरिए आगे बढ़ाते हुए 1,546 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट की मंजूरी प्रक्रिया में शामिल किया गया।

पुरानी गिरफ्तारी का इतिहास और 872 दिनों का जेल प्रवास

सत्येंद्र जैन को पहली बार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 30 मई 2022 को गिरफ्तार किया था। वह मामला आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ था। ईडी ने 2017 में एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि 2015-16 के दौरान जब जैन मंत्री पद पर थे, तब उन्होंने कोलकाता की शेल कंपनियों और हवाला चैनलों का उपयोग करके अवैध धन प्राप्त किया। इस धन का इस्तेमाल दिल्ली और उसके आसपास कृषि भूमि खरीदने में किया गया था।

उस मामले में सत्येंद्र जैन लगभग 18 महीने यानी कुल 872 दिनों तक हिरासत में रहे। हालांकि, उन्हें मई 2023 में स्वास्थ्य संबंधी कारणों से सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत भी मिली थी। इसके बाद 18 अक्टूबर 2024 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें इस आधार पर नियमित जमानत दे दी कि केस की सुनवाई में अत्यधिक देरी हो रही है और वह लंबे समय से जेल में बंद हैं। रिहाई के 669 दिनों बाद अब उन्हें एक नए भ्रष्टाचार मामले में एसीबी द्वारा फिर से गिरफ्तार कर लिया गया है।

सवाल-जवाब

सत्येंद्र जैन को 18 अगस्त 2026 को क्यों गिरफ्तार किया गया?
उन्हें दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर में कथित भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया है।
सत्येंद्र जैन के साथ और कौन-कौन गिरफ्तार हुआ है?
उनके साथ डीजेबी के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय (आईएएस), पूर्व सलाहकार अंकित श्रीवास्तव और तीन ठेका कंपनियों के मालिक नागेंद्र यादव, राजा कुमार और पंकज वर्मा गिरफ्तार हुए हैं।
यह मामला किस तकनीक और बजट से जुड़ा है?
यह मामला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों को अपग्रेड करने के लिए आईएफएएस तकनीक के उपयोग और लगभग 1,546 करोड़ रुपये के टेंडर में की गई गड़बड़ी से जुड़ा है।
सत्येंद्र जैन पहली बार जेल कब गए थे और जमानत कब मिली थी?
वह मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पहली बार 30 मई 2022 को गिरफ्तार हुए थे और 872 दिनों की हिरासत के बाद 18 अक्टूबर 2024 को उन्हें जमानत मिली थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Karan Malhotra@karan-malhotra·23 दिन पहले

यह मामला केवल एक राजनीतिक गिरफ्तारी से अधिक प्रशासनिक और वित्तीय भ्रष्टाचार की परतें उघाड़ता है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की धाराओं के तहत आईएएस अधिकारी समेत छह लोगों की संलिप्तता यह दर्शाती है कि टेंडर की तकनीकी शर्तों में सुनियोजित बदलाव किए गए थे। चूंकि मामला 1,546 करोड़ रुपये के भारी-भरकम प्रोजेक्ट से जुड़ा है, इसलिए जांच एजेंसी के लिए यह साबित करना अहम होगा कि राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल किस स्तर पर हुआ। आने वाले दिनों में अदालत में रिमांड की सुनवाई और अन्य संविदाओं की फोरेंसिक ऑडिट इस केस की दिशा तय करेंगे।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·23 दिन पहले

इस 1,546 करोड़ रुपये के एसटीपी टेंडर घोटाले की जांच से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों के आधुनिकीकरण में आई रुकावटों और उससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दूरगामी असर का भी पर्दाफाश होना चाहिए। दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले महानगर में बुनियादी ढांचे में देरी से दूषित जल और स्वच्छता संकट का खतरा बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर नागरिकों की सेहत को प्रभावित करता है।

Rohan Verma@rohan-verma·23 दिन पहले

यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। जिस तरह से प्रशासनिक अधिकारियों और ठेका कंपनियों के मालिकों को भी इस कड़ी में नामजद किया गया है, उससे यह स्पष्ट है कि जांच अब केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि नीतिगत और टेंडर स्तर पर हुई मिलीभगत के गहरे जालों तक फैल चुकी है। आगे की न्यायिक प्रक्रिया में यह देखना अहम होगा कि क्या एजेंसी अन्य कड़ियों को भी जोड़ पाती है।

Ravikash Gupta@ravikash·23 दिन पहले

यह प्रकरण मात्र एक प्रशासनिक अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सार्वजनिक बुनियादी ढांचे से जुड़े 1,546 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स की वित्तीय शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। टेंडर की तकनीकी शर्तों में बदलाव और चुनिंदा निजी फर्मों को लाभ पहुंचाने की बात यह दर्शाती है कि कॉरपोरेट-सरकारी तंत्र की यह सांठगांठ शहर की आर्थिक व्यवस्था और विकास परियोजनाओं की साख को किस तरह प्रभावित करती है। आने वाले समय में वित्तीय फॉरेंसिक जांच यह तय करेगी कि इस कथित मिलीभगत से सरकारी खजाने को कितना प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हुआ है।

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