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एनएसए अजीत डोभाल बीजिंग रवाना, चीनी विदेश मंत्री वांग यी से 25वें दौर की सीमा वार्ता पर होगी चर्चाराजनीति
24 अग॰ 2026, 7:39 am (19 दिन पहले)· 2

एनएसए अजीत डोभाल बीजिंग रवाना, चीनी विदेश मंत्री वांग यी से 25वें दौर की सीमा वार्ता पर होगी चर्चा

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल बीजिंग पहुंच चुके हैं जहां वे चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ एलएसी विवाद और द्विपक्षीय संबंधों पर 25वें दौर की उच्चस्तरीय विशेष प्रतिनिधि वार्ता करेंगे।

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर पिछले लंबे समय से चले आ रहे तनाव को पूरी तरह समाप्त करने और जमीनी स्तर पर शांति स्थापित करने की दिशा में एक अहम कूटनीतिक कदम उठाया गया है। इसी सिलसिले में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल बीजिंग की यात्रा पर रवाना हो चुके हैं, जहां वे मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ महत्वपूर्ण मुलाकात करेंगे। यह दोनों देशों के बीच विशेष प्रतिनिधियों के स्तर पर होने वाली 25वीं दौर की उच्चस्तरीय वार्ता है, जिसका मुख्य उद्देश्य सीमा विवाद का कोई स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान तलाशना है।

वार्ता का एजेंडा और मुख्य बिंदु

इस उच्चस्तरीय बैठक का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु एलएसी पर पूर्ण स्थिरता बहाल करना और दोनों पड़ोसी देशों के बीच बनी कूटनीतिक दूरियों को पाटना है। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि दोनों देशों के प्रतिनिधि सीमा पर वर्तमान जमीनी हालात की बेहद बारीकी से समीक्षा करेंगे। इसके अलावा, अक्टूबर 2024 में सेनाओं के पीछे हटने यानी डिसइंगेजमेंट को लेकर जो समझौते तय हुए थे, उनकी प्रगति का आकलन भी इस बैठक में किया जाएगा।

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अरुणाचल प्रदेश की हालिया घटनाएं और रणनीतिक मुद्दे

यह कूटनीतिक संवाद ऐसे समय में हो रहा है जब हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी क्षेत्र में चीनी सैनिकों की आक्रामक हरकतों और गतिविधियों को लेकर खबरें सामने आई थीं। ऐसे में इस बैठक के दौरान यह सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा कि सीमावर्ती इलाकों में किसी भी तरह के नए तनाव को उभरने से रोका जा सके। कुल 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा पर चल रहे व्यापक विवाद को सुलझाने के लिए दोनों नेता आपसी सहमति वाले तौर-तरीकों पर गंभीरता से विचार-विमर्श करेंगे।

गलवान घाटी के बाद सामान्य स्थिति की बहाली

बैठक में साल 2020 में गलवान घाटी में उत्पन्न हुए गंभीर संकट के बाद से दोनों देशों के बीच धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हालातों को और गति देने पर भी बात होगी। इसके तहत पेट्रोलिंग के पुराने अधिकारों को दोबारा बहाल करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही, डब्ल्यूएमसीसी फ्रेमवर्क के अंतर्गत स्थापित उस विशेषज्ञ समूह के कामकाज की भी समीक्षा की जाएगी, जिसे सीमा के विभिन्न सेक्टरों में स्थिति को स्पष्ट करने और शुरुआती कदम उठाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अजीत डोभाल और वांग यी पश्चिमी सेक्टर के मौजूदा तंत्र के साथ-साथ पूर्वी और मध्य सेक्टरों में जनरल स्तर के मैकेनिज़्म समेत संपूर्ण बॉर्डर मैनेजमेंट ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर मंथन करेंगे। इसके अलावा, दोनों पक्षों के बीच भारत-चीन के समग्र द्विपक्षीय संबंधों और राजनीतिक पैरामीटर्स तथा गाइडिंग प्रिंसिपल्स से जुड़े साल 2005 के समझौते को मजबूत बनाने की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों की भी समीक्षा की जाएगी।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले कूटनीतिक तैयारियां

इस पूरी बातचीत के पीछे एक बड़ा कूटनीतिक मकसद यह भी है कि आगामी 12 से 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे से पहले एक अनुकूल और सकारात्मक माहौल तैयार किया जाए। हालांकि अभी तक बीजिंग या नई दिल्ली की तरफ से चीनी राष्ट्रपति की यात्रा को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन दोनों देशों के राजनयिक और अधिकारी उनके भारत आने की पूरी उम्मीद जता रहे हैं।

यदि यह दौरा तय होता है, तो इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच एक बार फिर आमने-सामने मुलाकात होने का रास्ता साफ हो जाएगा। दोनों शीर्ष नेताओं की पिछली मुलाकात अगस्त 2025 में तियानजिन शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन के दौरान हुई थी। अब देखना यह है कि अजीत डोभाल और वांग यी की इस अहम बीजिंग बैठक से सीमाई क्षेत्रों में स्थिरता लाने और द्विपक्षीय रिश्तों को पटरी पर लाने में कितनी बड़ी सफलता मिलती है।

सवाल-जवाब

अजीत डोभाल बीजिंग क्यों गए हैं?
अजीत डोभाल चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता में हिस्सा लेने के लिए बीजिंग गए हैं।
इस उच्चस्तरीय वार्ता का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस बैठक का मुख्य फोकस वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर स्थिरता बहाल करना और सीमा विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालना है।
यह बैठक किन मुद्दों की समीक्षा करेगी?
यह बैठक अक्टूबर 2024 के डिसइंगेजमेंट समझौतों, पेट्रोलिंग अधिकारों की बहाली और सीमा प्रबंधन के ढांचे की समीक्षा करेगी।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का इस दौरे से क्या संबंध है?
यह बातचीत सितंबर में होने वाले ब्रिक्स समिट से पहले चीनी राष्ट्रपति के संभावित भारत दौरे के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार करने के उद्देश्य से भी महत्वपूर्ण है।
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