उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गोरखपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए राजनीतिक विरोधियों पर तीखा हमला बोला। इस अवसर पर उन्होंने 995 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 14 प्रमुख विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस मंच का उपयोग करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य की पूर्ववर्ती सरकारों, विशेष रूप से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के शासनकाल की कड़ी आलोचना की। उन्होंने रोजगार, कानून व्यवस्था और आस्था के मुद्दों पर विपक्ष को घेरते हुए वर्तमान सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा।
चीनी मिलों की बंदी और किसानों का संघर्ष
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2007 से लेकर 2017 तक के एक दशक को उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और कृषि क्षेत्र के लिए एक अंधकारमय दौर करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस 10 वर्ष की अवधि के दौरान समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन ने राज्य की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया। सबसे बड़ा प्रहार राज्य की 29 चीनी मिलों को बंद करके किया गया। इन महत्वपूर्ण चीनी मिलों को ओने-पौने दामों पर बेच दिया गया, जिससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था चरमरा गई, बल्कि अनगिनत नौजवान बेरोजगार हो गए। यह कदम उन अन्नदाता किसानों के लिए भी एक बड़ा झटका था, जिनकी आजीविका पूरी तरह से इन मिलों पर निर्भर थी। अपनी नीतियों से इन दलों ने कृषि क्षेत्र को हाशिए पर धकेलने का काम किया।
रोजगार में सिंडिकेट का खात्मा और पारदर्शी चयन
पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी की सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उस दौर में युवाओं के साथ बड़े पैमाने पर छल और भेदभाव किया जाता था। सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया पर एक विशेष सिंडिकेट का कब्जा हो गया था, जो योग्य और होनहार नौजवानों को नौकरी पाने से रोकता था। इसके विपरीत, आज की व्यवस्था में भारी बदलाव आया है। उन्होंने लखनऊ में अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि जब वह चयनित युवाओं से मिलते हैं, तो गोरखपुर के नौजवान बहुत गर्व के साथ अपने गृह जिले का नाम बताते हैं। आज गोरखपुर और पूरे प्रदेश के युवा बिना किसी सिफारिश या भेदभाव के अपनी योग्यता के आधार पर यूपी पुलिस में भर्ती हो रहे हैं। वे शिक्षक बन रहे हैं और यूपी पब्लिक सर्विस कमीशन की कठिन परीक्षाएं पास करके उप जिलाधिकारी (एसडीएम) और डिप्टी एसपी जैसे प्रतिष्ठित पदों पर अपनी जगह बना रहे हैं।
त्योहारों पर अराजकता और आस्था पर प्रहार
वर्ष 2017 से पहले की कानून व्यवस्था का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह दौर दंगों और चरम अराजकता का था। होली, विजया दशमी, दुर्गा पूजा और रामनवमी जैसे पावन पर्वों के दौरान प्रदेश में लगातार दंगे भड़कते थे, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। तत्कालीन सरकारों ने जन्माष्टमी के आयोजनों पर रोक लगाने का प्रयास किया और कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्वक नहीं निकलने दिया। विपक्ष के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "जो लोग आस्था पर प्रहार करते थे, आज वे सबसे बड़े आस्थावान बनने का ठेका ले चुके हैं।"
राम मंदिर आंदोलन और विरोधियों का दोहरा मापदंड
आस्था के विषय को और विस्तार देते हुए उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान विपक्ष की भूमिका को याद किया। उन्होंने जनता को याद दिलाया कि ये वही लोग हैं जिन्होंने राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण में हर संभव बाधाएं खड़ी की थीं। आंदोलन के दौरान निहत्थे राम भक्तों पर गोलियां चलवाई गईं और मंदिर निर्माण को रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय में अपने महंगे अधिवक्ता खड़े किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों का इतिहास आस्था के साथ खिलवाड़ करने का रहा है, जब वे आज आस्था, किसानों और युवाओं के भविष्य पर बड़े-बड़े उपदेश देते हैं, तो उनके ये उपदेश पूरी तरह से हास्यास्पद लगते हैं।
सुरक्षित माहौल और डबल इंजन का संकल्प
व्यापारियों और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने बेटियों और व्यापारियों के सामने सुरक्षा का एक गंभीर संकट पैदा कर दिया था। लेकिन आज उत्तर प्रदेश में सुरक्षा का एक मजबूत माहौल स्थापित हो चुका है और इसी सुरक्षित वातावरण के कारण राज्य में विकास की गति तेज हुई है। यह डबल इंजन की सरकार का ही परिणाम है कि विकास की योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के हर गरीब, हर गांव, हर किसान, नौजवान और महिला तक पहुंच रहा है। इसके साथ ही, बुधवार को भी गोरखपुर में अपनी एक अन्य सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने चुनावी रणनीतियों पर भी चर्चा की थी। उस सभा में उन्होंने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया था कि चुनाव का असली कुरुक्षेत्र मतदान केंद्र यानी बूथ होता है और जो बूथ जीत लेता है, वही चुनाव जीतता है।



















